पटना

बीमारी से जंग, मां का समर्पण और बेटे ने जीत IIT का सपना, पढ़िए गुजंन की बिस्तर से IIT तक के सफर की पूरी कहानी

Bihar Success Story सीतामढ़ी के गुंजन कुमार ने गंभीर बीमारी और 70% से अधिक दृष्टि हानि जैसी चुनौतियों के बावजूद JEE Main में 91.8 पर्सेंटाइल और JEE Advanced में PwD-OBC कैटेगरी में 50वीं रैंक हासिल की। इस दौरान उनकी मां ने ऑनलाइन क्लास अटेंड कर नोट्स तैयार किए। अब गुंजन का चयन IIT दिल्ली के अबू धाबी कैंपस में कंप्यूटर साइंस के लिए हुआ है।
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Jul 10, 2026
gunjan kumar
अपनी मां के साथ गुंजन

Success Story बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार की कहानी हर JEE अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा है। JEE Advanced की परीक्षा से ठीक पहले वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) के कारण उनका एक फेफड़ा प्रभावित हो गया, जिससे उन्हें करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उनकी नियमित पढ़ाई और कोचिंग की कक्षाएं भी छूट गईं। इतनी बड़ी चुनौती के बावजूद गुंजन ने हार नहीं मानी। 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि हानि के कारण उन्हें 9.5 पावर का चश्मा पहनना पड़ता है, लेकिन उन्होंने अपने हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने JEE Main में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल की, जबकि JEE Advanced में PWD OBC कैटेगरी में 50वीं और कॉमन PWD कैटेगरी में 120वीं रैंक प्राप्त की। अब उनका लक्ष्य IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर अपने सपनों को नई उड़ान देना है।

मां के नोट्स, बेटे का IIT सपना

गुंजन का कहना है कि परीक्षाएं केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि हिम्मत और धैर्य की भी परीक्षा होती हैं। वहीं उनकी मां गुंजा कुमारी कहती हैं कि बेटे का सपना ही उनका सपना था और उसके लिए नोट्स तैयार करना उनके जीवन के सबसे संतोषजनक अनुभवों में से एक रहा। गुंजन वर्ष 2023 में JEE की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा गए थे। लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में सीने में तेज दर्द के बाद उन्हें न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) हो गया। सर्जरी के बाद उन्हें करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान JEE की तैयारी के सबसे अहम समय में वह नियमित रूप से पढ़ाई नहीं कर सके। उस वक्त उनकी पहली प्राथमिकता IIT नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ होना था।

मां बनी ताकत, बेटा पहुंचा IIT

गुंजन ने बताया, "उस समय मैं IIT के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहा था। मुझे बिस्तर से उठने की भी अनुमति नहीं थी, क्योंकि शरीर पर सर्जरी के बाद पट्टियां बंधी थीं।" ऐसे कठिन समय में मेरी मां जो कि सोशल साइंस में B.Ed. डिग्रीधारी गृहिणी हैं, वह सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आईं। वर्षों तक फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित से दूर रहने के बावजूद वो गुंजन की ऑनलाइन कोचिंग कक्षाएं अटेंड कीं, हर लेक्चर के विस्तृत हस्तलिखित नोट्स तैयार किए और बेटे के साथ नियमित रूप से उनका रिवीजन भी कराया। मां की मेहनत और गुंजन के हौसले का ही परिणाम रहा कि कुछ महीनों बाद 17 वर्षीय गुंजन का IIT दिल्ली के अबू धाबी कैंपस में कंप्यूटर साइंस कोर्स में प्रवेश हो गया। उन्होंने बीमारी और कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ अपने सपनों को नई उड़ान दी।

मां ने उम्मीद नहीं छोड़ी, बेटे ने जीत लिया IIT का सपना

गुंजन ने बताया कि उनकी मां को एक घंटे के ऑनलाइन लेक्चर के नोट्स तैयार करने में करीब ढाई घंटे लग जाते थे। वह पढ़ाई के दौरान लगातार सवाल पूछती थीं, ताकि पढ़ा हुआ विषय अच्छी तरह याद रहे। गुंजन दिसंबर में पूरी तरह स्वस्थ हुए, जिसके बाद जनवरी में होने वाली JEE Main परीक्षा के लिए उनके पास केवल तीन सप्ताह का समय बचा था। उन्होंने कहा, "मेरी मां के बनाए नोट्स ही मेरे रिवीजन का सबसे बड़ा आधार बने।" गुंजन ने JEE Main में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल किया। इसके बाद उन्होंने JEE Advanced में PwD-OBC कैटेगरी में 50वीं और कॉमन PwD कैटेगरी में 120वीं रैंक प्राप्त की, जिससे उन्हें UAE स्थित IIT दिल्ली के अबू धाबी कैंपस में प्रवेश मिला।

वहीं, गुंजा कुमारी के लिए यह सफर भी आसान नहीं था। उन्हें घर की जिम्मेदारियां निभाने, बेटे की देखभाल करने और वर्षों पहले छोड़ चुके फिजिक्स, केमिस्ट्री व गणित जैसे विषयों को दोबारा सीखने के बीच संतुलन बनाना पड़ा। उन्होंने कहा, "यह बहुत मुश्किल था, लेकिन मैंने कभी खुद को टूटने नहीं दिया, क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं हिम्मत हार गई, तो मेरा बेटा भी उम्मीद खो देगा।"

Updated on:
10 Jul 2026 01:34 pm
Published on:
10 Jul 2026 01:18 pm