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बांकीपुर में त्रिकोणीय जंग, बीजेपी के सवर्ण वोट और RJD के मुस्लिम-Yadav समीकरण पर पीके का दांव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हार के बाद प्रशांत किशोर ने इस बार बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर से चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। जन सुराज अगड़े और पिछड़े दोनों वर्गों के वोटरों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी के परंपरागत सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए पार्टी भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर और यूजीसी नियमों जैसे मुद्दों को उठा रही है।
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prashant kishor

प्रशांत किशोर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के करीब नौ महीने बाद प्रशांत किशोर एक बार फिर चुनावी मैदान में उतर गए हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से ताल ठोंकी है। 2025 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर उनकी पार्टी को आठ हजार से भी कम वोट मिले थे। इसके बावजूद प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से अपनी दावेदारी पेश कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। चुनावी समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए उनकी टीम अगड़े और पिछड़े दोनों वर्गों के वोटरों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इस रणनीति को कितनी सफलता मिलती है, इसका फैसला 3 अगस्त को मतगणना के नतीजों के साथ होगा। फिलहाल, जन सुराज ने इस सीट पर पूरी ताकत झोंक दी है।

सवर्ण वोट बैंक पर पीके की नजर

बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी की जीत का आधार उसका सवर्ण वोट बैंक माना जाता है। इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तहत प्रशांत किशोर की टीम मतदाताओं के बीच भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर और यूजीसी नियमों जैसे मुद्दों को उठा रही है। प्रशांत किशोर की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि कोई भी पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं होती, बल्कि सभी दल वोट की राजनीति करते हैं। जन सुराज की टीम भूमिहार (7 फीसदी), ब्राह्मण (7 फीसदी) और राजपूत (5 फीसदी) वोटरों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। टीम का मानना है कि अगर बीजेपी का यह परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होता है तो चुनावी समीकरण बदल सकता है।

MY समीकरण बदलने की कोशिश

इसके साथ ही पीके की रणनीति बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 9 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों को भी अपने साथ जोड़ने की है। जन सुराज का प्रयास है कि आरजेडी प्रत्याशी को मुकाबले से कमजोर कर इस वोट बैंक का समर्थन हासिल किया जाए। वहीं, यादव वोटरों में भी सेंध लगाने की कोशिश जारी है। इसके लिए जन सुराज की टीम आरजेडी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साधकर समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि कांग्रेस ने आरजेडी प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जमीनी स्तर पर कुछ कार्यकर्ता जन सुराज के पक्ष में सक्रिय हैं।

RJD के डर को तोड़ने की रणनीति

प्रशांत किशोर जनसंपर्क के दौरान लोगों को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि उनका वोट आरजेडी के खाते में नहीं जाएगा, बल्कि जनसुराज के पक्ष में ही रहेगा। इसके लिए वह खुद और उनकी चुनावी टीम मतदाताओं के बीच जाकर उन्हें भरोसा दिलाने में जुटी है। दरअसल, पिछले चुनाव में बांकीपुर सीट के कई मतदाताओं के बीच यह धारणा थी कि अगर उन्होंने जनसुराज को वोट दिया तो इसका फायदा आरजेडी को मिल सकता है। पार्टी ने इस बार इसी आशंका को दूर करने के लिए मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की रणनीति बनाई है कि जनसुराज एक मजबूत विकल्प के रूप में चुनाव मैदान में है।

प्रशांत किशोर की प्रचार टीम से जुड़े लोगों का कहना है कि बीजेपी लंबे समय से "जंगलराज" के नैरेटिव के सहारे अपने पक्ष में वोट जुटाती रही है। अब जनसुराज बांकीपुर के मतदाताओं के सामने एक नया राजनीतिक विकल्प पेश करने की कोशिश कर रहा है।