पटना

अनिल अग्रवाल ने बिहारी युवाओं को दिए 3 मंत्र, बड़ा निवेश करने की जताई इच्छा; राजस्थान जैसा मॉडल बिहार में लाने की तैयारी

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बिहार दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने बिहार में बड़े निवेश के साथ-साथ नंद घर जैसी परियोजनाओं से जुड़ी अपनी योजनाओं का खुलासा किया। उन्होंने बिहार के युवाओं को तीन मंत्र भी दिए।
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Mar 22, 2026
बिहार दिवस पर अनिल अग्रवाल का पोस्ट
अपने परिवार के साथ उद्योगपति अनिल अग्रवाल (फोटो- X@AnilAgarwal_Ved)

बिहार के 114वें स्थापना दिवस पर जहां देश-दुनिया से शुभकामनाओं का तांता लगा है, वहीं वेदांता समूह के चेयरमैन और दुनिया के दिग्गज उद्योगपतियों में शुमार अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में, उन्होंने विशेष रूप से बिहार के लोगों, खासकर युवाओं के लिए एक बेहद भावुक और दूरदर्शी संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भले ही सात समंदर पार लंदन में रहते हों, लेकिन उनके अंदर का बिहार हमेशा उनके साथ चलता है। इस दौरान उन्होंने बिहार में निवेश की अपनी इच्छा को भी सार्वजनिक किया।

लिट्टी-चोखा की महक और छठ का उल्लास दिल में बसा

अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में उन 15-20 वर्षों को याद किया जो उन्होंने बिहार की मिट्टी में बिताए। उन्होंने लिखा कि चाहे वह लिट्टी-चोखा की सौंधी महक हो, छठ पूजा का उल्लास भरा माहौल हो, या रोजमर्रा की कठिनाइयों से लड़ने का हुनर हो, बिहार हर कदम पर एक बात की याद दिलाता है कि कड़ी मेहनत करो, ईमानदारी से काम करो, और कभी हार मत मानो।

अनिल अग्रवाल ने आगे कहा कि आज भी, जब बिहार के हर कोने-कोने से संदेश आते हैं, चाहे कोई रोजगार के बारे में सलाह मांग रहा हो, अपनी पढ़ाई में मदद चाह रहा हो या बस अपने विचार साझा कर रहा हो, तो उन्हें एहसास होता है कि ये सिर्फ संदेश नहीं हैं। ये उस गहरे जुड़ाव और अपनेपन का प्रतीक हैं जो वह आज भी बिहार के साथ महसूस करते हैं।

अनिल अग्रवाल ने लिखा कि नालंदा की विद्वत्तापूर्ण परंपराओं से लेकर आर्यभट्ट की प्रतिभा तक, बिहार ने हमेशा भारत के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है और आज, बिहार के युवा अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं, न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि दुनिया के हर कोने में।

बिहार के युवाओं के लिए सफलता के 3 मंत्र

अनिल अग्रवाल ने बिहार की नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में मदद करने के लिए तीन अहम सिद्धांत दिए।

  • बड़े सपने देखिए, पर जड़ों को मत भूलिए: आसमान की ऊंचाइयों को छुएं, लेकिन अपनी संस्कृति और मिट्टी से जुड़े रहें।
  • शिक्षा को बनाए रखें अपनी ताकत: बिहारियों की सबसे बड़ी पूंजी उनकी मेधा और शिक्षा है, इसे कभी कम न होने दें।
  • जहां भी जाएं, गर्व से कहें हम बिहारी हैं: दुनिया के किसी भी कोने में अपनी पहचान को पूरी मजबूती और स्वाभिमान के साथ पेश करें।

बिहार में निवेश की इच्छा

अनिल अग्रवाल ने बताया कि वह काफी समय से बिहार में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने लिखा, 'मैं कुछ समय से एक मौका ढूंढ रहा हूं बिहार में कोई निवेश करने का, पर भावनाओं के साथ साथ फिजिबिलिटी भी जरूरी है। आशा है जल्द कुछ हो पाएगा।'

राजस्थान की तरह नंद घर परियोजना

राजस्थान में सफलतापूर्वक लागू किए गए मॉडल से प्रेरणा लेते हुए, अनिल अग्रवाल ने बिहार में भी हजारों 'नंद घर' स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। ये केंद्र ऐसे हब के रूप में काम करते हैं जहां छह साल तक के बच्चों को पौष्टिक भोजन और शिक्षा मिलती है, जबकि महिलाओं को कौशल विकास के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाया जाता है।

बिहार में कोई भूखा न सोए: एक सपना जो जल्द ही हकीकत बनेगा

अपने पोस्ट के आखिर में अनिल अग्रवाल ने लिखा, 'यह सपना कि बिहार में एक भी बच्चा भूखा न सोए और प्रतिभाशाली महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, यह केवल एक सपना नहीं है, यह एक ऐसी हकीकत है जो बहुत जल्द साकार होने वाली है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में, बिहार भारत की अगली महान सफलता की कहानी लिखेगा। आप सभी को बिहार दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हम बिहारी, सब पे भारी।'

कौन हैं उद्योगपति अनिल अग्रवाल?

अनिल अग्रवाल की जीवन कहानी किसी फिल्मी गाथा से कम नहीं है। हालांकि आज उन्हें मेटल किंग के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन उनके सफर की शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी। अनिल अग्रवाल का जन्म पटना के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पटना के मिलर हाई स्कूल से पूरी की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कबाड़ धातु (स्क्रैप मेटल) के व्यापार से की।

1970 के दशक में, अनिल अग्रवाल पटना से मुंबई चले गए, जहां उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर, शून्य से अपना विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया। आज, वह वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन हैं। वह पहले ऐसे भारतीय उद्योगपति थे जिन्होंने अपनी कंपनी (वेदांता) को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सफलतापूर्वक सूचीबद्ध कराया। उन्होंने अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा समाज सेवा और दान-पुण्य के कार्यों के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है।

Updated on:
22 Mar 2026 05:24 pm
Published on:
22 Mar 2026 05:24 pm
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