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‘गुजरात हो या मॉरीशस, बिहारी जहां भी गए…’ बिहार दिवस पर PM मोदी ने CM नीतीश को लिखा भावुक पत्र

बिहार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अपनी शुभकामनाएं दीं। इस पत्र में उन्होंने न केवल बिहार के गौरवशाली अतीत को याद किया, बल्कि विस्तार से इसके वर्तमान विकास और भविष्य की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 22, 2026

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो-ANI)

Bihar Diwas: बिहार के 114वें स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक विशेष पत्र लिखकर पूरे प्रदेश को शुभकामनाएं दी हैं। इस पत्र में प्रधानमंत्री ने न केवल बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव को नमन किया है, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन और उनके नेतृत्व में बिहार में आए बड़े परिवर्तन की जमकर सराहना भी की है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में बिहारियों के वैश्विक रसूख का जिक्र करते हुए इसे भारत की प्रगति का प्रतिबिंब बताया है।

नीतीश के नेतृत्व और सुशासन पर PM की मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए लिखा कि बिहार आज जिस विकास पथ पर है, उसमें सुशासन की बड़ी भूमिका है। उन्होंने लिखा, 'आपके नेतृत्व में बिहार एक बड़े परिवर्तन का साक्षी बना है। सुशासन के साथ समाज के सभी वर्गों के कल्याण के प्रति आपकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने राज्य में विश्वास, स्थिरता और प्रगति की एक नई धारा शुरू की है। आज का बिहार अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर अग्रसर है।'

गुजरात से मॉरीशस तक… बिहारी सामर्थ्य की गूंज

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उन दिनों को भावुकता के साथ याद किया जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। पीएम ने याद दिलाया कि कैसे बिहार के लोगों ने अपनी मेहनत से सूरत (गुजरात) की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बिहार गठन के 100 साल पूरे होने पर सूरत में हुए भव्य आयोजन का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि बिहार के लोग जहां भी जाते हैं, अपनी संस्कृति और मूल्यों को साथ लेकर जाते हैं।

पीएम ने लिखा कि उन्होंने स्वयं मॉरीशस, गुयाना और त्रिनिदाद एंड टोबैगो जैसे देशों में बिहार की संस्कृति को फलते-फूलते देखा है। वहां के लोगों ने अपनी जड़ों को आज भी सहेजकर रखा है। प्रधानमंत्री ने महापर्व छठ को बिहार के सांस्कृतिक विस्तार का सबसे सशक्त उदाहरण बताया, जो अब पूरी दुनिया में एक वैश्विक पहचान बना चुका है।

विकास के आंकड़ों से गिनाईं बिहार की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से बिहार के गरीबों और किसानों के जीवन में आए ठोस बदलावों का ब्यौरा भी दिया। पीएम ने बताया कि गरीब कल्याण के लिए पीएम आवास योजना के तहत बिहार में 40 लाख से अधिक घर बनाए गए और उज्ज्वला योजना के माध्यम से 1.20 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन दिया गया।

पीएम ने बताया कि बिहार की 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जिनमें से 31 लाख महिलाएं 'लखपति दीदी' बनकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत बिहार के किसानों के खातों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: बिहार के मखाना को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए नेशनल मखाना बोर्ड का गठन किया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी की नई रफ्तार

प्रधानमंत्री ने पत्र में बिहार की बदलती तस्वीर और बेहतर होती कनेक्टिविटी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने पटना हवाई अड्डे के नए टर्मिनल, दरभंगा की हवाई कनेक्टिविटी और पूर्णिया में बन रहे नए टर्मिनल भवन का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार का एविएशन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को प्राचीन ज्ञान परंपरा को जीवंत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

विरासत और लोकतांत्रिक परंपराओं को नमन

पीएम मोदी ने बिहार को बुद्ध, चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य की भूमि बताते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका को याद किया। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और बाबू जगजीवन राम जैसी विभूतियों को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न दिए जाने के गौरवपूर्ण क्षण को भी याद किया।