
Nitish Kumar political legacy: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही चर्चा पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि विरासत का मतलब सरकारी पद, कुर्सी या सत्ता पर दावा करना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और उनके अपने बेटे दीपक प्रकाश के बीच कोई अंतर नहीं है और निशांत को उनका पूरा आशीर्वाद प्राप्त है।
विरासत के मुद्दे पर जेडीयू और आरएलएम के बीच किसी भी टकराव को खारिज करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कुछ लोग इस शब्द का मतलब पूरी तरह समझे बिना निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि विरासत का संबंध किसी सरकारी पद से नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की दी गई शिक्षाओं और मूल्यों को बचाने का एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे सीख सकें और एक बेहतर समाज बना सकें।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी दिग्गजों की विचारधारा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी किसी एक पार्टी या व्यक्ति की नहीं है। उनकी पार्टी आरएलएम इसी कोशिश में लगी हुई है और दूसरी पार्टियां भी अपने-अपने लेवल पर ऐसी ही कोशिशें कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आखिरकार जनता और इतिहास ही तय करता है कि कौन बेहतर काम कर रहा है। हर पार्टी को अपने संगठन और विचारधारा को आगे बढ़ाने का लोकतांत्रिक अधिकार है और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिकल एंट्री और उत्तराधिकार पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मांग की थी कि निशांत कुमार को एक्टिव पॉलिटिक्स और जेडीयू में लाया जाए। उन्होंने कहा कि निशांत को उनका पूरा आशीर्वाद है। जिस तरह दीपक प्रकाश उनका अपना पुत्र है, ठीक उसी तरह निशांत भी उनके लिए बेटे के समान है और राजनीतिक मंच पर दोनों में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि निशांत और दीपक जैसे युवा बिहार और देश का भविष्य हैं और युवाओं को पॉलिटिक्स में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि भले ही अब वे दूसरी पॉलिटिकल पार्टी चलाते हैं, लेकिन उनके मन में जेडीयू की स्थिति को लेकर उनके मन में भी चिंता रहती है। उन्होंने कहा कि जब समता पार्टी की नींव रखी गई थी, तब नीतीश कुमार के साथ मिलकर उन्होंने भी अपना खून-पसीना बहाया था। आज जेडीयू में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें उस दौर के कठिन संघर्ष और दर्द का अंदाजा नहीं है, इसलिए वे अलग-अलग व्याख्याएं करते हैं।
नीतीश कुमार की विरासत को लेकर उपेंद्र कुशवाहा के दिए बयान पर जदयू विधायक श्याम रजक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी नीतीश कुमार की सीख को पूरी तरह अपनाता है और उनकी सोच, आइडियोलॉजी और विजन को आगे बढ़ाने के लिए डेडिकेटेड है, वही उनका सच्चा फॉलोवर और उनकी विरासत का वारिस है। उन्होंने आगे कहा कि अगर उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के विजन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, तो वह उस विरासत के हकदार हैं।
जदयू विधायक दल के नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि चूंकि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कामकाज में शामिल हो गए हैं, इसलिए वे नीतीश कुमार की विरासत और पार्टी, दोनों की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार, उनकी टीम और जदयू के नेता पार्टी की विरासत को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं और पहले से ही ऐसा कर रहे हैं।