
JEE NEET : अब डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले मंडला के ग्रामीण और आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के लिए बड़े शहरों का रुख करना जरूरी नहीं है। जिला प्रशासन की पहल से उनके स्कूल में ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का माहौल बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट संकल्प के जरिए जिले के 80 शासकीय विद्यालयों के करीब 1500 विद्यार्थी जेईई, नीट, सीयूईटी और क्लेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कर रहे हैं। 11 जुलाई से शुरू हुआ यह अभियान आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए अवसरों की नई खिड़की खोल रहा है।
विद्यार्थियों के लिए स्कूल समय से पहले सुबह 9.30 से 11 बजे और स्कूल के बाद शाम 4.30 से 5 बजे तक अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था फिजिक्स वाला के साथ समन्वय से विद्यार्थियों को रिकॉर्डेड लेक्चर और डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही डाउट क्लियरिंग सेशन और शिक्षकों के व्यक्तिगत मार्गदर्शन की सुविधा भी है। इस व्यवस्था की खासियत यह है कि विद्यार्थी अपने नियमित स्कूल की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। इससे उन्हें अलग से महंगी कोचिंग लेने या पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाने की जरूरत कम होगी।
प्रोजेक्ट के प्रभारी एपीसी मुकेश पांडे ने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं के बड़ी संख्या में विद्यार्थी उचित मार्गदर्शन और संसाधनों के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते थे। इसी अंतर को खत्म करने के लिए संकल्प शुरू किया गया है। इसके तहत जेईई, नीट, सीयूईटी और क्लेट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के साथ साप्ताहिक एवं मॉक टेस्ट, ओएमआर आधारित परीक्षा, मेंटरशिप और ऑनलाइन आवेदन भरने में सहायता दी जा रही है। चिकित्सकों, इंजीनियरों और करियर विशेषज्ञों के प्रेरक सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी केवल परीक्षा की तैयारी ही नहीं करें, बल्कि अपने करियर को लेकर स्पष्ट निर्णय भी ले सकें।
प्रोजेक्ट में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जा रहा है। साप्ताहिक परीक्षाओं और जिला स्तरीय रैंकिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में कहां खड़े हैं और किन विषयों में उन्हें और मेहनत की जरूरत है। मासिक एमसीक्यू आधारित परीक्षाओं, ग्रेडिंग आधारित मॉनिटरिंग, टॉपर क्लब और रिमेडियल कक्षाओं के जरिए कमजोर विद्यार्थियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मॉडल उत्तर, अभिभावक-शिक्षक बैठक तथा उत्कृष्ट विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्राचार्यों के सम्मान जैसे प्रयास बच्चों में बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा बढ़ाएंगे।
प्रोजेक्ट संकल्प का फोकस सिर्फ प्रतियोगी परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं है। प्रशासन इसे शासकीय विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को सही करियर विकल्पों की जानकारी देने के व्यापक अभियान के रूप में विकसित कर रहा है। इसके लिए प्रशासन 10वीं और 12वीं के बाद उपलब्ध विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी देने वाली विशेष करियर गाइडेंस बुकलेट भी तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि गांव का विद्यार्थी भी समय रहते यह समझ सके कि उसकी रुचि और क्षमता के अनुसार उसके सामने कौन-कौन से रास्ते खुले हैं।
प्रोजेक्ट संकल्प के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं- अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आइआइटी, नीट, क्लेट सहित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं तक पहुंचाना, शासकीय विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार करना और विद्यार्थियों-अभिभावकों को करियर विकल्पों के प्रति जागरूक करना है। - राहुल नामदेव धोटे, कलेक्टर मंडला