
Flat Network : फ्लैट खरीदते समय अब तक लोग सड़क चौड़ाई, लोकेशन, कारपेट एरिया, पार्किंग, लिफ्ट, क्लब हाउस, बालकनी और सुविधाओं को देखकर कीमत तय करते रहे हैं। लेकिन अब प्रॉपर्टी की कीमत तय करने वाले पैमानों में एक और चीज जुड़ गई है- मोबाइल नेटवर्क। यानि, राजस्थान में बनने वाली आधुनिक बहुमंजिला इमारतों में यह सवाल केवल इतना नहीं होगा कि फ्लैट कितने वर्गफीट का है, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उस फ्लैट के अंदर मोबाइल नेटवर्क और डेटा की स्पीड कैसी रहेगी।
राजस्थान के बिल्डिंग बायलॉज में इंडोर मोबाइल कनेक्टिविटी सॉल्यूशन का प्रावधान शामिल किए जाने के बाद अब ट्राई इसे जमीन पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। टेलीकॉम विशेषज्ञों, मोबाइल ऑपरेटरों, बिल्डरों, आर्किटेक्ट, नगर नियोजकों के बीच इसी बदलाव को लेकर मंथन हो चुका है। केन्द्र की गाइडलान बाद में आई, उससे पहले राजस्थान में काम शुरू हो गया। अब मोबाइल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर नई बिल्डिंग तैयार हो रही है और जो पुरानी इमारते हैं, उन्हें टैक्नोलोजी फ्रेंडली बना रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि मोबाइल नेटवर्क को अब बिल्डिंग बनने के बाद सुधारने की बजाय भवन की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की तैयारी है। इसका असर सीधे उस व्यक्ति पर पड़ेगा, जो लाखों रुपए खर्च कर फ्लैट खरीदता है।
एक ही इलाके में दो समान आकार के फ्लैट हैं। दोनों की लोकेशन और कीमत लगभग समान है। एक इमारत में बेसमेंट से ऊपरी मंजिल तक मोबाइल और डेटा कनेक्टिविटी बेहतर है, जबकि दूसरी में कमरे के अंदर नेटवर्क कमजोर है और कॉल करने के लिए बालकनी में जाना पड़ता है। अभी तक प्रॉपर्टी की कीमत तय करते समय नेटवर्क का अलग से कोई कॉलम नहीं है। लेकिन इंडोर कनेक्टिविटी के ऑडिट और रेटिंग की व्यवस्था लागू होने के बाद यह तस्वीर बदल गई है। बेहतर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की खूबियों में शामिल हो सकती है और खरीदार के फैसले को प्रभावित कर सकती है। यानि, नेटवर्क सीधे फ्लैट की कीमत तय नहीं करेगा, लेकिन उसकी वैल्यू और बिक्री पर असर डालने वाला नया फैक्टर जरूर बनेगा।
अब तक किसी बिल्डिंग में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने पर समाधान के लिए संबंधित मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करना पड़ता था। लेकिन ऊंची इमारतों में यह समस्या केवल टावर का सिग्नल बढ़ाने से हल नहीं होती। मोटी आरसीसी दीवारें, बेसमेंट, भूमिगत पार्किंग, धातु और कांच की संरचना मोबाइल सिग्नल को प्रभावित करती हैं। बिल्डिंग बनने के बाद अतिरिक्त उपकरण लगाने पड़ते हैं और कई बार पूरे भवन में समान कनेक्टिविटी देना मुश्किल होता है। इसीलिए अब नई इमारतों की प्लानिंग के दौरान ही इंडोर कनेक्टिविटी पर ध्यान दिया जा रहा है। यानि, जिस समय आर्किटेक्ट नक्शा तैयार करेगा, उसी समय यह भी तय करना होगा कि मोबाइल सिग्नल अलग-अलग मंजिलों और हिस्सों तक कैसे पहुंचेगा।
ट्राई की इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिल्डिंग नेटवर्क ऑडिट है। इसके लिए 22 एजेंसियां नियुक्त की गई हैं। ये एजेंसियां इमारत के भीतर मोबाइल और डेटा कनेक्टिविटी की स्थिति की जांच करेंगी और बताएंगी कि कहां नेटवर्क मजबूत है और कहां सुधार की जरूरत है। इसका मतलब यह हुआ कि भविष्य में बिल्डिंग की कनेक्टिविटी को केवल बिल्डर के दावे के आधार पर नहीं देखा जाएगा। तकनीकी जांच और मूल्यांकन के आधार पर उसकी स्थिति सामने आ सकेगी। इसी के साथ बिल्डिंग की कनेक्टिविटी के आधार पर रेटिंग देने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। भविष्य में यह रेटिंग खरीदार के लिए उतनी ही उपयोगी जानकारी हो सकती है, जितनी आज कारपेट एरिया, पार्किंग और दूसरी सुविधाओं की जानकारी होती है।
मान लीजिए किसी इमारत को पांच स्टार कनेक्टिविटी रेटिंग मिलती है और दूसरी को दो स्टार। दोनों की लोकेशन और सुविधाएं लगभग समान हैं। ऐसे में घर से काम करने वाला युवा प्रोफेशनल, आईटी कर्मचारी, ऑनलाइन पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी या डिजिटल कारोबार करने वाला व्यक्ति बेहतर कनेक्टिविटी वाली इमारत को प्राथमिकता दे सकता है। यहीं से रियल एस्टेट में डिजिटल कनेक्टिविटी एक नए प्रतिस्पर्धी फीचर के रूप में उभर सकती है। भविष्य में बिल्डर के विज्ञापन में '5 स्टार डिजिटल कनेक्टिविटी' जैसी जानकारी दिखाई दे सकती है और ग्राहक का सवाल होगा- नेटवर्क की रेटिंग कितनी है?
राजस्थान के शहरों में वर्टिकल डवलपमेंट तेजी से बढ़ रहा है। जमीन की सीमित उपलब्धता के कारण बहुमंजिला इमारतों और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों में बहुमंजिला इमारतों में औसतन करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है। करीब 125 बहुमंजिला प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं, जबकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले करीब 1500 प्रोजेक्ट बताए जा रहे हैं। यानि, आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में लोग ऐसी इमारतों में रहेंगे और काम करेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क उनकी रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा होगा। जितनी ऊंची इमारत, उतना बड़ा इंडोर कनेक्टिविटी का सवाल।
यह बदलाव सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है। जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर जैसे शहरों में भी बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट बढ़ रहे हैं। नई टाउनशिप, ग्रुप हाउसिंग, मॉल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, अस्पताल और संस्थागत भवनों में डिजिटल कनेक्टिविटी की जरूरत लगातार बढ़ेगी। निर्माण के समय ही इंडोर नेटवर्क की व्यवस्था करने से बाद में अतिरिक्त सिस्टम लगाने की जरूरत कम हो सकती है और बिल्डिंग को शुरू से ही बेहतर कनेक्टिविटी के लिए तैयार किया जा सकेगा।
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन युवाओं को होगा, जिनकी पढ़ाई और रोजगार इंटरनेट से जुड़ा है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारी के लिए कमजोर नेटवर्क सीधे उत्पादकता पर असर डालता है। ऑनलाइन क्लास लेने वाले विद्यार्थी के लिए वीडियो का बार-बार रुकना परेशानी है। ऑनलाइन इंटरव्यू के दौरान नेटवर्क कमजोर होना नौकरी के अवसर तक प्रभावित कर सकता है। फ्रीलांसर, डिजिटल मार्केटर, कंटेंट क्रिएटर और ऑनलाइन कारोबार करने वाले लोगों के लिए तो इंटरनेट खुद काम का आधार है। ऐसे में फ्लैट की लोकेशन और आकार के साथ नेटवर्क की गुणवत्ता भी खरीद का फैसला प्रभावित कर सकती है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। अभी कनेक्टिविटी रेटिंग को सीधे फ्लैट की कीमत तय करने का आधिकारिक पैमाना नहीं बनाया गया है। लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की बिक्री और खरीदार की पसंद को प्रभावित कर सकती है। रियल एस्टेट में बेहतर लोकेशन, बेहतर व्यू, पार्किंग, क्लब और अन्य सुविधाएं प्रॉपर्टी को प्रीमियम बनाती हैं। भविष्य में डिजिटल कनेक्टिविटी भी ऐसा ही फीचर बन सकती है। एक ही इलाके में दो समान प्रोजेक्ट हों और एक में इंडोर नेटवर्क बेहतर हो तो बिल्डर उसे अतिरिक्त सुविधा के तौर पर पेश कर सकता है। इस तरह नेटवर्क कीमत तय करने वाला अकेला पैमाना नहीं होगा, लेकिन प्रॉपर्टी की बाजार वैल्यू प्रभावित करने वाला नया फैक्टर जरूर बन सकता है।
इंडोर कनेक्टिविटी का प्रभाव केवल घर खरीदने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। इंडोर कनेक्टिविटी की जरूरत सिर्फ घरों में नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टर, मरीज और परिजन मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हैं। ऑफिस में वीडियो कॉन्फ्रेंस, क्लाउड सिस्टम और डिजिटल कम्युनिकेशन सामान्य हो चुके हैं। शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन लर्निंग बढ़ रही है। स्टेडियम और स्पोर्ट्स एरिना में एक साथ हजारों लोगों के मोबाइल इस्तेमाल करने से नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव आता है। ऐसे स्थानों पर बेहतर इंडोर कनेक्टिविटी उपयोगकर्ता अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
भवन निर्माण की मौजूदा प्रक्रिया में बिल्डर को जमीन, नक्शा, पार्किंग, फायर सेफ्टी, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं पर ध्यान देना पड़ता है। अब डिजिटल कनेक्टिविटी भी इसी चेकलिस्ट में तेजी से जगह बना रही है। यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं है। यह बताता है कि शहरों में बुनियादी सुविधा की परिभाषा बदल रही है। एक समय बिजली और पानी पर्याप्त माने जाते थे। फिर इंटरनेट जरूरी हुआ। अब तेज और भरोसेमंद मोबाइल कनेक्टिविटी भी उसी श्रेणी में पहुंच रही है।
आज किसी फ्लैट की बुकिंग करने से पहले ग्राहक कई बार साइट पर जाकर लोकेशन देखता है। लेकिन नेटवर्क की जांच कितने लोग करते हैं? आने वाले समय में यह बदलेगा। ग्राहक फ्लैट देखने पहुंचे तो वह अलग-अलग कमरों में नेटवर्क चेक कर सकता है। बिल्डिंग की रेटिंग पूछ सकता है। बेसमेंट और पार्किंग में नेटवर्क की स्थिति जान सकता है। अलग-अलग ऑपरेटरों की कनेक्टिविटी के बारे में जानकारी मांग सकता है। इससे प्रॉपर्टी खरीदने में डिजिटल सुविधा भी एक मापने योग्य पैरामीटर बनेगी।
इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नेटवर्क ऑडिट कितना वास्तविक और पारदर्शी होता है। सिर्फ बिल्डिंग के बाहर सिग्नल मिलने के आधार पर रेटिंग देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। बेसमेंट, पार्किंग, लिफ्ट, कॉरिडोर, फ्लैट के अंदर, कॉन्फ्रेंस रूम और ऊपरी मंजिलों तक नेटवर्क की वास्तविक स्थिति जांचनी होगी। डेटा स्पीड के साथ कॉल क्वालिटी और अलग-अलग ऑपरेटरों की स्थिति भी देखनी होगी। तभी पांच स्टार रेटिंग का वास्तविक मतलब होगा।
मोबाइल नेटवर्क को लेकर यह बदलाव एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत हो सकता है। जिस तरह लोग आज फ्लैट खरीदते समय स्कूल, अस्पताल, मॉल और सड़क की दूरी देखते हैं, वैसे ही भविष्य में डिजिटल कनेक्टिविटी को भी लोकेशन की गुणवत्ता का हिस्सा माना जा सकता है। जिस तरह बेहतर सड़क किसी इलाके की प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ाती है, उसी तरह बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी किसी प्रोजेक्ट को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकता है। इसलिए राजस्थान में ऊंची इमारतों का अगला दौर केवल 'कितनी मंजिल' का नहीं होगा। सवाल यह भी होगा कि उन मंजिलों तक नेटवर्क कितनी मजबूती से पहुंचता है।