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Collar One Elephant : बांधवगढ़ का ‘कॉलर वन’ पहुंचा यूपी, हथिनी के साथ मिर्जापुर-प्रयागराज के जंगलों में डेरा

कॉलर वन के नाम से मशहूर एक हाथी बांधवगढ़ से शहडोल-सीधी-रीवा होते हुए 7 महीने में मध्य प्रदेश की सीमा पार कर चुका है। उसके साथ एक हथिनी भी है और वह उत्तर प्रदेश के जंगलों में डेरा जमाए हुए है। रेडियो कॉलर के जरिए वन विभाग दोनों पर नजर रख रहा है। आइए पढ़ते हैं बृजेश कुमार तिवारी की रिपोर्ट।
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Sep 11, 2026
Elephant Collar One
बांधवगढ़ का हाथी सात महीने में यूपी पहुंच चुका है। (Photo: Rajasthan Patrika)

Collar One Elephant : बांधवगढ़ के जंगलों से निकला एक हाथी इन दिनों उत्तर प्रदेश के जंगलों में विचरण कर रहा है। रेडियो कॉलर वाला यह हाथी करीब सात महीने से जारी अपने सफर में शहडोल, सीधी और रीवा के जंगलों को पार करते हुए अब उत्तर प्रदेश पहुंच चुका है। खास बात यह है कि वह अकेला नहीं है, उसके साथ एक हथिनी भी लगातार चल रही है। दोनों फिलहाल मिर्जापुर और प्रयागराज के जंगलों में डेरा जमाए हुए हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 'कॉलर वन' के नाम से पहचाने जाने वाले इस हाथी की हर गतिविधि पर वन विभाग रेडियो कॉलर के जरिए नजर रख रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अगस्त के अंतिम सप्ताह में दोनों हाथियों ने मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश में प्रवेश किया था।

फरवरी में बांधवगढ़ से निकला था

'कॉलर वन' का यह सफर फरवरी 2026 में शुरू हुआ। बांधवगढ़ से निकलकर वह शहडोल के जंगलों में पहुंचा। यहां से सीधी और फिर रीवा की ओर बढ़ता गया। रीवा के जंगलों में उसने काफी समय बिताया। इसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में उसने मध्यप्रदेश की सीमा पार की और उत्तर प्रदेश के जंगलों में प्रवेश कर गया। वन विभाग के लिए यह सफर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हाथियों के प्राकृतिक आवागमन और उनके बढ़ते दायरे को समझने में मदद मिल रही है। जंगल में हाथियों की आवाजाही प्रदेशों की प्रशासनिक सीमाओं से बंधी नहीं होती। भोजन, पानी, सुरक्षित आवास और मौसम के अनुसार वे लंबी दूरी तय करते हैं।

बांधवगढ़ में बढ़ रहा हाथियों का कुनबा

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि हाथियों के बढ़ते कुनबे के लिए भी पहचाना जाने लगा है। वर्तमान में यहां करीब 70 से 80 हाथियों की मौजूदगी बताई जा रही है। वर्ष 2018 के आसपास हाथियों ने बांधवगढ़ में स्थायी रूप से रहना शुरू किया था। इसके बाद इनकी संख्या और गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ता गया। पहले हाथियों की आवाजाही बांधवगढ़ और आसपास के जंगलों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब उनके लंबे सफर के मामले सामने आ रहे हैं। 'कॉलर वन' का उत्तर प्रदेश पहुंचना इस बदलाव का दिलचस्प उदाहरण है।

बांधवगढ़ का पहला रेडियो कॉलर हाथी

'कॉलर वन' बांधवगढ़ में रेडियो कॉलर लगाए जाने वाला पहला हाथी है। नवंबर 2024 में उसे रेडियो कॉलर लगाया गया था। इसके बाद ताला क्षेत्र में छोड़ा गया। कॉलर से मिली लोकेशन के आधार पर वन विभाग ने उसके ताला, खतौली और मगधी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण को ट्रैक किया। हाथियों की गतिविधियों को और बेहतर ढंग से समझने के लिए दिसंबर 2024 में एक दूसरे हाथी को रेडियो कॉलर लगाया गया, जिसे 'कॉलर टू' नाम दिया गया। इसके बाद 2 सितंबर 2025 को तीसरे हाथी को भी रेडियो कॉलर किया गया। कई मौकों पर ये हाथी एक साथ भी देखे गए हैं।

रीवा के बाद यूपी में निगरानी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि 'कॉलर वन' लंबे समय तक रीवा क्षेत्र में रहा तो उसकी निगरानी के लिए रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग उपकरण रीवा में ही उपलब्ध कराया गया था। इससे वहां से उसकी गतिविधियों पर नजर रखना आसान हुआ। अब उसके उत्तर प्रदेश पहुंचने के बाद प्रयागराज क्षेत्र में भी उसकी मॉनिटरिंग की जा रही है।

Updated on:
11 Sept 2026 11:38 am
Published on:
11 Sept 2026 11:38 am