CG News: नया रायपुर की रिसर्चर प्रियंका गुप्ता ने भविष्य की कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी शोध किया है, जो डेटा ट्रांसफर की दुनिया को पूरी तरह बदल सकता है। प्रि
CG News: @ताबीर हुसैन। भारत में इंटरनेट क्रांति का अगला अध्याय अब बिजली के तारों से नहीं, बल्कि शुद्ध प्रकाश की किरणों से लिखा जाएगा। अब अंधेरे में धीमी रफ्तार से चलने वाला इंटरनेट अतीत की बात बनने जा रहा है। तकनीक के नए दौर में रोशनी की रफ्तार से डेटा ट्रांसफर करने वाली फाइबर ऑप्टिक तकनीक तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ेगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी पहले से ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद होगी। अब गांव से शहर तक डिजिटल क्रांति की रफ्तार तेज होगी, जहां हर क्लिक पर जानकारी पलक झपकते ही उपलब्ध होगी।
अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) नया रायपुर की रिसर्चर प्रियंका गुप्ता ने भविष्य की कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी शोध किया है, जो डेटा ट्रांसफर की दुनिया को पूरी तरह बदल सकता है। प्रियंका की यह रिसर्च ऑल-ऑप्टिकल डिवाइसेज पर आधारित है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट को न केवल कई गुना तेज बनाना है, बल्कि उसे ऊर्जा-कुशल और सस्ता बनाना भी है।
यह शोध आने वाले समय में 5जी और भविष्य की 6जी नेटवर्क की रीढ़ बनेगा। प्रकाश की गति के कारण इंटरनेट की लैटेंसी (डेटा पहुंचने में लगने वाली देरी) लगभग शून्य हो जाएगी। बड़े डेटा सेंटर्स, जहां ऊर्जा की खपत और बढ़ता तापमान बड़ी चुनौती है, वहां यह तकनीक बिजली की भारी बचत करेगी। प्रियंका का अनुमान है कि अगले 5 से 10 वर्षों में यह तकनीक प्रयोगशाला से निकलकर आम उपयोग के लिए उपलब्ध होगी। प्रियंका गुप्ता अपनी सफलता का श्रेय मेहनत और जिज्ञासा को देती हैं। उनका मानना है कि किसी छोटे शहर से होना आपकी प्रतिभा में बाधक नहीं है। वे युवाओं को सलाह देती हैं कि रिसर्च के क्षेत्र में धैर्य रखें, क्योंकि इसके परिणाम दूरगामी और समाज के हित में होते हैं।
वर्तमान संचार प्रणालियों में डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए उसे बार-बार इलेक्ट्रिकल सिग्नल से ऑप्टिकल सिग्नल (प्रकाश) में और फिर वापस बदलना पड़ता है। इस कन्वर्जन की प्रक्रिया में समय की हानि होती है और भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है। प्रियंका गुप्ता का शोध इसी बाधा को दूर करता है। उनकी विकसित तकनीक में डेटा की प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन पूरी तरह केवल रोशनी के माध्यम से होता है।
इस शोध का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा फोटोनिक क्रिस्टल रिंग रेज़ोनेटर है। यह एक ऐसा सूक्ष्म नैनो-स्ट्रक्चर ढांचा है जो प्रकाश को नियंत्रित करने का काम करता है। यह रेज़ोनेटर सटीक रूप से तय करता है कि प्रकाश की कौन सी किरण (सिग्नल) को आगे बढ़ना है और किसे रोकना है। इस सूक्ष्म इंजीनियरिंग की वजह से डिवाइस की सटीकता और डेटा ट्रांसफर की गति दोनों में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
इस तकनीक का सबसे मानवीय पहलू इसका दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचना है। प्रियंका के अनुसार, ऑल-ऑप्टिकल सिस्टम बेहद स्थिर होता है, जो इसे बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों के लिए आदर्श बनाता है। इस तकनीक के लागू होने से सुदूर वनांचलों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होगा।