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Patrika Interview: प्रमुख सचिव निहारिका बारिक पत्रिका से बोलीं- हाईटेक व्यवस्था से महिला जनप्रतिनिधियों के बदले काम करने वाले पुरुषों का दखल हुआ कम

Patrika Interview: पंचायती राज व्यवस्था के विकास को लेकर पत्रिका ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारीक से चर्चा की

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Apr 27, 2026
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक ( Photo - Patrika )

Patrika Interview: छत्तीसगढ़ में त्रि-स्तरीय पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है। इसके बाद यह देखने में आता था कि महिला जनप्रतिनिधि के भाई, पति या भी पिता कामकाज में दखल देते थे। यहां तक की सरकारी बैठकों में शामिल होते थे। अब हाईटेक व्यवस्था की वजह से इस पर लगाम कसी है। पंचायती राज व्यवस्था के विकास को लेकर पत्रिका ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक से चर्चा की। उन्होंने नई व्यवस्था, व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ी और विभाग की रणनीति पर विस्तार से जवाब दिया। पेश है बातचीत के अंश-

सवाल: पंचायतों के जरिए महिला सशक्तिकरण पर ज्यादा जोर दिया गया है, लेकिन अभी उनके घर के पुरुष ही कामकाज का संचालन करते पाए जाते हैं, किस तरह के प्रयासों से महिला केंद्रित किया जा सकता है।

जवाब: पंचायतों में 'सरपंच-पति' या 'पंचायत-पति' की प्रथा एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती है। इसे केवल कागजी नियमों से नहीं, बल्कि एक व्यापक 'व्यवहार परिवर्तन और 'संस्थागत सुदृढ़ीकरण' के माध्यम से ही बदला जा सकता है। विभाग इस दिशा में बहु-आयामी प्रयास कर रहा है: जैसे की अनिवार्य उपस्थिति और सख्त प्रशासनिक निर्देश दिए गए हैं। पंचायतों की किसी भी आधिकारिक बैठक में निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है।

महिला प्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति, पिता या पुत्र द्वारा बैठक में भाग लेने या कार्यवाही रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने को अवैध माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित सचिव पर कार्रवाई और जनप्रतिनिधि को पद से पृथक करने के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। ग्राम सभाओं निर्णय ऐप और सभा सार ऐप के माध्यम से वीडियो रिकॉर्डिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। विभाग द्वारा सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान चला रहे हैं। इसमें उन्हें केवल योजनाएं नहीं, बल्कि पब्लिक स्पीकिंग, फाइल मैनेजमेंट और वित्तीय नियमों का व्यावहारिक प्रशिक्षण किया जा रहा है। ताकि वे तकनीकी कार्यों के लिए किसी और पर निर्भर न रहें।

सवाल: कई पंचायत प्रतिनिधियों के पास प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन का अनुभव नहीं होता। उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए क्या ट्रेनिंग सिस्टम या संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है?

जवाब: पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशासनिक और वित्तीय कौशल को निखारने के लिए विभाग ने एक त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचा तैयार किया है। राज्य से विकाखंड स्तर पर ट्रेनिंग सेंटर है। विभाग ने आईआईएम रायपुर के साथ मिल कर लीडरशिप डेवलपमेंट पंचायत के प्रतिनिधयो को पर 5 दिवसीय ट्रेनिंग भी प्रदान किया गया है।

सवाल: डिजिटल इंडिया के तहत पंचायतों को ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इंटरनेट, बिजली और तकनीकी ज्ञान की कमी बड़ी बाधा है। इसे कैसे दूर किया जा रहा है?

जवाब: छत्तीसगढ़ की भौगोलिक चुनौतियों, विशेषकर बस्तर और सरगुजा के दुर्गम क्षेत्रों को देखते हुए, विभाग इन बाधाओं को दूर करने के लिए 'हाइब्रिड और सस्टेनेबल' मॉडल पर काम कर रहा है। भारत नेट फेज-2 के माध्यम से राज्य की अधिकांश पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा रहा है। साथ ही ग्राम पंचायतो में कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन सेवाए और कार्य किये जा रहा है। बिहान के माध्यम से स्थानीय युवतियों को प्रशिक्षित कर 'डिजिटल सखी'/बैंक सखी के रूप में तैयार किया जा रहा है। पंचायतों में स्थित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र को पंचायत भवन के साथ एकीकृत किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सभी सेवाएं मिलें।

सवाल: 10. आने वाले 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ की पंचायतों को “आत्मनिर्भर और मॉडल पंचायत” बनाने के लिए विभाग का विजन क्या है? क्या इसके लिए कोई मापने योग्य लक्ष्य तय किए गए हैं?

जवाब: छत्तीसगढ़ के पंचायत विभाग का आगामी 5 वर्षों का विजन केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं, बल्कि पंचायतों को 'सशक्त, स्वावलंबी और समावेशी' संस्थानों के रूप में स्थापित करना है। वर्ष 2031 के लिए मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर, डिजिटल रूप से सक्षम और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शत-प्रतिशत पंचायतों की अपनी आय उनके कुल वार्षिक बजट का कम से कम 20% हिस्सा हो। पर्यावरण और स्वच्छता के क्षेत्र में, 50 फीसदी पंचायतों को 'जीरो वेस्ट' और 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही सभी पंचायत भवनों को पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। आजीविका और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में ग्रामीण औद्योगिक केंद्रों की स्थापना की जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार मिल सके।

Updated on:
27 Apr 2026 02:03 pm
Published on:
27 Apr 2026 02:01 pm
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