
Ajmer-Pushkar : किशनगढ़ स्टेशन भविष्य में रेलवे के लिए हब बन सकता है। मेड़ता रेल लाइन का काम पूरा होने के बाद पुष्कर सीधा उत्तर भारत से जुड़ जाएगा। माल ढुलाई से साथ बड़ा यार्ड विकसित हो सकेगा। इससे मार्बल, मिर्ची, कपास, सीमेंट, ग्रेनाइट, रेडिमेड गारमेंट, मिनरल्स के कारोबार में फायदा मिलेगा वहीं कनेक्विटी बढऩे पर सामरिक महत्ता के साथ आर्थिक एवं धार्मिक पर्यटन में बूम आएगा।
800 करोड़ रुपए की राशि से निर्मित अजमेर-पुष्कर रेल लाइन अब तकअनुपयोगी साबित हुई है। इस इलेक्टि्रक लाइन पर पुष्कर-अजमेर-ब्यावर-मारवाड़ जाने वाला शटल संचालित है। बीते 15 साल में करीब 75 लाख की कमाई हुई है, जबकि खर्चा 780 लाख रुपए से ज्यादा का हो चुका है। सड़क मार्ग से 50 लाख से ज्यादा पर्यटकों की आवाजाही वाले पुष्कर रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहता है।
पुष्कर-मेड़ता लाइन के लिए 52 हेक्टेयर भूमि अवाप्त की गई है। 51.34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर करीब 799.64 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अवाप्ति सहित अन्य कार्य में काफी विलंब हो चुका है। मेड़ता से कनेक्टिविटी होने के बाद पुष्कर और किशनगढ़ स्टेशन की महत्ता बढ़ जाएगी। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, बीकानेर, पंजाब एवं हरियाणा तक आवाजाही बढ़ेगी।
मौजूदा वक्त मारवाड़-अजमेर-पुष्कर शटल संचालित है। कम यात्रियों की आवाजाही से सालाना करीब 5 लाख रुपए आय मिलती है। यानि 15 साल में करीब 75 लाख रुपए कमाई हुई है। जबकि पायलट, सहायक पायलट, टीटी, रनिंग स्टाफ, प्वाइंट मेन, रेलवे फाटक का स्टाफ आदि के वेतन का खर्च प्रतिमाह है। पुष्कर रेलवे स्टेशन के रखरखाव, बिजली सहित स्टाफ अन्य पर 780 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।
2050 तक इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार बढऩे के साथ अजमेर, पुष्कर, मेड़ता- किशनगढ़ स्टेशन भी एयरपोर्ट जैसे आधुनिक मल्टी-मोडल हब बन जाएंगे। यहां मेट्रो, बस और रेल की निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।
पुष्कर-मेड़ता लाइन का जुड़ाव बहुत जरूरी है। इस रेल लाइन से जुडऩे पर देश के अन्य हिस्सों से जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, बीकानेर बॉर्डर तक सेना की पहुंच आसान होगी। पंजाब एवं हरियाणा तक आवाजाही बढ़ेगी। नसीराबाद छावनी से बॉर्डर तक सेना की पहुंच आसान होगी।
अजमेर के धार्मिक स्थलों के साथ पुष्कर- मीरां नगरी मेड़ता, जोधपुर, नागौर, देशनोक बीकानेर, बाड़मेर का किराड़ू, जैसलमेर का रामदेवरा भी इससे जुड़ जाएगा। यही नहीं खाटूश्यामजी व अन्य धार्मिक स्थल भी इससे जुड़ सकेंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। यही नहीं पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, गुजरात से सीधा सम्पर्क हो जाएगा।
200 करोड़ रुपए की मार्बल की मंडी
2 से 5 करोड़ की पावरलूम यूनिट
100 करोड़ रुपए का मूंग-चना का कारोबार
50 से 100 करोड़ रुपए का पुष्कर रेडिमेड गारमेंट
300 करोड़ रुपए ब्यावर मिनरल कारोबार
150 करोड़ रुपए मिर्ची-कपास और अन्य सब्जियां
जवाहर लाल नेहरू पोर्ट मुम्बई से दादरी के बीच पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर 1534 किलोमीटर लंबा है। यह ट्रेक वाया दादरी, रेवाड़ी, अजमेर, अहमदाबाद, बड़ोदरा होता हुआ मुम्बई तक जा रहा है। ट्रेक पर डबल डेकर मालगाड़ी दौड़ रही है। । इस परियोजना के लिए जापानी कंपनी जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी की ओर से वित्तीय सहायता दी गई है।
डीएफसीसी ट्रेक पर एक ही डबल डेकर मालगाड़ी में 13 हजार टन माल लदान हो रहा है। यह 325 ट्रकों के माल के बराबर है। मालगाड़ी अधिकतम 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है। शुरुआत में मालगाड़ी की लंबाई लगभग 750 मीटर थी। बाद में आवश्यकतानुसार इसे 1500 मीटर तक लंबी की गई है। अजमेर-मेड़ता लाइन का नया डीएफसीसी कॉरिडोर बना तो 10 से 12 हजार टन क्षमता और बढ़ जाएगी।
वेस्टर्न डीएफसी पर मदार (राजस्थान) से किशनगढ़ बालावास (हरियाणा) सेक्शन में मालगाड़ी संचालित हो रही है। इस 306 किलोमीटर सेक्शन में 6 क्रॉसिंग स्टेशन हैं। इसमें डबला, भगेगा, श्रीमाधोपुर, पचार, मलिकपुर, शखुन और किशनगढ़ सहित 9 नए फ्रेड स्टेशन और तीन जंक्शन स्टेशन (रेवाड़ी, अटेली और फुलेरा) बनाए गए हैं। नया कॉरिडोर बनने पर पुष्कर और मेड़ता के अलावा माकड़वाली और मदार स्टेशन को विशेष महत्व मिल सकता है।
-1 हजार किमी प्रति घंटा रफ्तार वाली मैग्लेव-हाइपर लूप ट्रेन
300 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन
190 से 200 किमी प्रतिघंटा रफ्तार वाली राजधानी एक्सप्रेस
-170 से 180 किमी रफ्तार वाली वंदे भारत एक्सप्रेस
-शताब्दी और गतिमान एक्सप्रेस
-देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए पैलेस ऑन व्हील्स
-सुपरफास्ट दूरन्तो एक्सप्रेस
एर्गोनॉमिक सीटिंग, मनोरंजन प्रणाली और ऑनबोर्ड सुविधाएं मिलेंगी। मोबाइल ऐप और संपर्क रहित भुगतान सहित उन्नत टिकटिंग सिस्टम बुकिंग प्रक्रिया होगी। हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल मनोरंजन प्लेटफॉर्म का एकीकरण ऑनबोर्ड अनुभव को बेहतर बनाएगा