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Mining Dues : खान विभाग के 3421 करोड़ कोर्ट में अटके, इनमें 804 करोड़ पर रोक नहीं फिर वसूली में सुस्ती

Mining Dues : राजस्थान के खान विभाग में 804 करोड़ रुपए की वसूली अटकने पर उच्च स्तर पर जवाब-तलब हुआ है। एसीएस ने बिना रोक वाले आठ मामलों में वसूली नहीं होने पर अल्टीमेटम देते हुए हर महीने प्रगति रिपोर्ट मांगी है। इनमें हिंदुस्तान जिंक के दो मामलों में ही 668 करोड़ रुपए बकाया हैं। इस बारे में पढ़िए सु​नील सिंह सिसोदिया की स्पेशल रिपोर्ट।
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Oct 09, 2026
Mining Dues
हिंदुस्तान जिंक के दो प्रकरणों में ही 668 करोड़ रुपए बकाया (ChatGpt)

Mining Dues : राजस्थान में खान विभाग को सालाना 9 से 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा है, लेकिन न्यायालयीन मामलों में 3420.97 करोड़ रुपए का राजस्व अटक गया है। इनमें आठ मामले ऐसे हैं, जिनमें न्यायालय की कोई रोक नहीं होने के बावजूद 804.25 करोड़ रुपए की राशि नहीं वूसली जा रही। जबकि राज्य सरकार की फिलहाल वित्तीय स्थिति भी ज्यादा ठीक नहीं है।

अब 804.25 करोड़ रुपए के बकाया राजस्व की जल्द वसूली को लेकर खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा को विभाग के निदेशक को पत्र लिखना पड़ा। 6 अक्टूबर को जारी निर्देश में संबंधित अधिकारियों को वसूली करने और हर महीने प्रगति रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इन आठ मामलों में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के दो प्रकरणों में ही 668 करोड़ रुपए की राशि बकाया का जिक्र है। सवाल है कि जब वसूली पर न्यायालय की रोक नहीं, तो कार्रवाई अब तक कहां अटकी रही, जिम्मेदार कौन।

दो मामलों में 668 करोड़, कुल राशि का 83 फीसदी

राजसमंद के खनिज अभियंता कार्यालय से जुड़े हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के दो प्रकरणों में 334-334 करोड़ रुपए बकाया हैं। दोनों की राशि 668 करोड़ रुपए है, जो आठ मामलों की कुल राशि का करीब 83 प्रतिशत है। राजस्थान में बड़े स्तर पर खनन गतिविधियों से जुड़ी इस कंपनी के मामलों में अब वसूली के लिए क्या कार्रवाई की जाती है। पत्र में राशि की जल्द वसूली के लिए कहा गया है। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए गए हैं।

46 मामले, 3421 करोड़, 38 में न्यायिक अड़चन

खान विभाग के 46 न्यायालयीन प्रकरणों में कुल 3420.97 करोड़ रुपए खनन उद्यमियों पर बकाया हैं। इनमें आठ मामलों में 804.25 करोड़ रुपए की राशि का विवरण देकर वसूली के निर्देश दिए गए हैं। शेष 38 मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के चलते वसूली नहीं हो पाने के लिए कहा गया है। इन मामलों में तेजी से पैरवी करने और जहां संभव हो, स्थगन आदेश हटवाने पर जोर दिया गया है।

राजस्व 10 हजार करोड़ पार, वसूली पर निगरानी कितनी?

खान विभाग का राजस्व पांच साल में 6394.89 करोड़ रुपए से बढ़कर 10394.94 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। ऐसे में न्यायालयीन मामलों में निहित राशि की वसूली और उसकी निगरानी महत्वपूर्ण है।

अब हर महीने हिसाब देना होगा

अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित करने के साथ हर महीने प्रगति रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में वसूली गई राशि, जारी नोटिस, कार्रवाई की स्थिति और देरी के कारणों का ब्योरा महत्वपूर्ण होगा। अब निगाह इस पर रहेगी कि निर्देशों के बाद वास्तव में कितनी राशि सरकारी खजाने में आती है और देरी के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

वसूली बढ़े तो विकास कार्यों को सहारा

वसूली योग्य राशि सरकारी खजाने में आने से सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जनसुविधाओं के लिए उपलब्ध संसाधन बढ़ सकते हैं। राज्य सरकार ने बजट 2025-26 में करीब 21 हजार किलोमीटर क्षतिग्रस्त सड़कों के सुधार के लिए लगभग 6000 करोड़ रुपए के कार्य प्रस्तावित किए थे। हालांकि, खान विभाग के मामलों में निहित पूरी राशि को तत्काल उपलब्ध धन नहीं माना जा सकता। वसूली के बाद उसका उपयोग बजट और सरकारी प्राथमिकताओं के अनुसार तय होगा।

अवैध खनन को लेकर भी विभाग के सैकड़ों करोड़ बकाया

सूत्रों के मुताबिक खान विभाग के अवैध खनन को लेकर दर्ज होने वाले प्रकरणों में भी प्रदेशभऱ में सैकड़ों करोड़ रुपए की राशि बकाया चल रही है। प्रदेशभर में रोजाना अवैध खनन को लेकर बड़े स्तर पर पेनल्टी लगाई जा रही है। लेकिन इसकी वसूली नाममात्र की हो रही है। इसमें भी सख्ती की जाए तो सरकारी खजाने में करोड़ रुपए आ सकते हैं।

Updated on:
09 Oct 2026 04:41 pm
Published on:
09 Oct 2026 04:41 pm