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Sariska Tiger Reserve: बाघों के घर में परिंदों की परवाज, मेहमान पक्षी भी पर्यटकों के आकर्षण का बने केंद्र

Sariska Tiger Reserve : सरिस्का टाइगर रिजर्व यूं तो बाघों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन 1203 वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके में परिंदों की चहचहाहट भी यहां पहुंचने वाले हजारों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। यहां पर्यटन से सालाना 12 से 13 करोड़ रुपए की कमाई होती है। बाघों के कुनबे में तरह-तरह के पक्षी अतिथियों की तरह आकर डेरा डालते हैं और रिजर्व को गुलजार कर देते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से हरमिंदर लूथरा की रिपोर्ट पढ़ते हैं।
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Aug 22, 2026
Sariska Tiger Project
सरिस्का में पक्षी भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र (Photo: स्वतंत्र मिश्र/संग्राम सिंह कटियार)

Sariska Tiger Reserve : सरिस्का टाइगर रिजर्व अब केवल बाघों का घर नहीं रहा। यहां पर्यटक सिर्फ बाघों को देखने नहीं आते, बल्कि मेहमान परिंदों की चहचहाहट भी उन्हें यहां खींच लाती है। हर साल सर्दियों में कई देशों से यहां परिंदे आते हैं। अभी सरिस्का में 56 बाघ-बाघिन हैं। यहां हर साल 90 हजार से ज्यादा पर्यटक आते हैं। सरकार को पर्यटन से सालाना 12 से 13 करोड़ रुपए की कमाई होती है।

सरिस्का में तीन पर्यटक जोन हैं। सरिस्का के 29 गांवों में से 24 गांव विस्थापित नहीं हुए हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व का कुल 1203 वर्ग किमी एरिया है, जिसमें 322.23 वर्ग किमी का बफर क्षेत्र है। इसे बढ़ाने के लिए 607 वर्ग किमी के एक नए क्षेत्र को बफर में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार ने बनाया है। राजगढ़, जयपुर और दौसा के जंगल को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि ये जंगल शामिल होता है, तो नए पर्यटक जोन बन सकते हैं।

Photo Courtesy : संग्राम सिंह कटियार, निदेशक, सरिस्का टाइगर रिजर्व।

ऐसी है परिंदों की दुनिया

  • बार हेडेड गूज सरिस्का में लगातार बढ़ रहे हैं। यहां इनको अनुकूल वातावरण मिल रहा है। पर्याप्त भोजन मिल रहा है। यह मध्य एशिया में प्रजनन करता है और शीत ऋतु में भारतीय उपमहाद्वीप में निवास करता है।
  • परिवर्तनीय बाज को कलगीदार बाज भी कहते हैं, जो सरिस्का में पाए जाते हैं। यह फुर्तीला वनवासी शिकारी पक्षी है। अपने शिकार का चयन समय-समय पर बदलता रहता है। दूर तक देखने में सक्षम है। आंखें चमकदार होती हैं।
  • जंगली उल्लू को धारीदार जंगली उल्लू भी कहते हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है । यह प्रजाति अक्सर अकेले रहना पसंद करती है। छोटे समूह होते हैं।
  • क्रेस्टेड लार्क की एक विशिष्ट चोटी वाली चिडि़या हर साल यहां आती है, जो आमतौर पर धारीदार और हल्के भूरे रंग की होती है। इसकी पूंछ छोटी होती है और पंखों के नीचे का भाग जंग के रंग का होता है, जो उड़ते समय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एशिया, अफ्रीका व यूरोप में पाई जाती है। सरिस्का में भी यह मौजूद है।
  • देशभर में तोते की कई प्रजातियां हैं, लेकिन सरिस्का में रोज रिंग्ड पैराकीट नाम से एक तोते की प्रजाति है, जो जोड़े के साथ रहता है। इसका रंग सबसे आकर्षक होता है। इसकी आवाज भी अन्य तोते से भिन्न होती है। यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप और अफ्रीका में पाई जाती है।
  • सफ़ेद गिद्ध पुरानी दुनिया का गिद्ध है, जो पहले पश्चिमी अफ़्रीका से लेकर उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में काफी तादाद में पाया जाता था, लेकिन अब काफी कम हो गए। सरिस्का में यह प्रजाति लगातार बढ़ रही है।
Photo Courtesy: संग्राम सिंह कटियार, निदेशक, सरिस्का टाइगर रिजर्व

सरिस्का के बारे में यह भी जानिए

रणथंभौर से कब-कब लाए गए बाघ-बाघिन

  • 28 जून 2008 को पहला बाघ, नाम रखा एसटी-1
  • 04 जुलाई 2008 को एसटी-2
  • 25 फरवरी 2009 को एसटी-3
  • 20 जुलाई 2010 को एसटी-4
  • 28 जुलाई 2010 को एसटी-5
  • 23 मार्च 2011 को एसटी-6
  • 22 जनवरी 2013 को एसटी-9
  • 23 जनवरी 2013 को एसटी-10
  • 15 अप्रैल 2019 को एसटी-16
  • 16 अक्टूबर 2022 को एसटी-29
  • 09 मार्च 2023 को एसटी-30

यों बढ़ा हमारा कुनबा

  • बाघिन एसटी-2 ने साल 2012 में दो मादा शावकों को जन्म दिया। नाम एसटी-7 व एसटी-8 रखा गया। एसटी-2 ने साल 2014 में एसटी-13 बाघ और एसटी-14 बाघिन को जन्म दिया। हालांकि जनवरी 2022 में एसटी-13 लापता हो गया।
  • एसटी-2 की बेटी एसटी-14 ने 2018 में एसटी-17 बाघिन व एसटी-18 बाघ शावक को जन्म दिया। एसटी-14 ने साल 2020 में 3 शावक जन्मे। एसटी-26, एसटी-27 व 28 को जन्म दिया। एसटी-14 ने साल 2022 में दो शावक जन्मे। एसटी-17 ने साल 2022 में एसटी-2304 और 2305 को जन्म दिया।
  • एसटी-19 ने वर्ष 2023 में 3 शावक, एसटी-12 ने मार्च 2024 में 4 शावकों को जन्म दिया। एसटी-22 ने मई 2024 में 4 शावकों को जन्म दिया। एसटी-17 ने जून 2024 में तीन शावक जन्मे। एसटी-27 ने मई 2024 में दो शावकों को जन्म दिया। वर्ष 2025 व इस भी 8 शावक जन्में हैं।
Updated on:
22 Aug 2026 01:12 pm
Published on:
22 Aug 2026 01:12 pm