
Shafali Verma Interview: क्रिकेट के मैदान पर जब कोई युवा खिलाड़ी अपनी तूफानी बल्लेबाजी से रातों-रात सुपरस्टार बन जाए और अचानक एक दिन उसे खराब फॉर्म के चलते टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए, तो टूटना बहुत आसान होता है। लेकिन असली चैंपियन वही होता है जो इस झटके को अपनी नई शुरुआत बना ले। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विस्फोटक ओपनर और अब उपकप्तान बन चुकीं शेफाली वर्मा की कहानी भी इसी जुझारूपन की मिसाल है।
रायपुर में भारत-जिम्बाब्वे टी-20 सीरीज के दौरान 'खास बातचीत' में शेफाली ने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर, अपनी तकनीकी कमियों और एक आक्रामक बल्लेबाज से जिम्मेदार उपकप्तान बनने के सफर को बेबाकी से साझा किया।
साल 2025 में टीम से ड्रॉप होना शेफाली के लिए किसी सदमे से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे आत्ममंथन का जरिया बनाया। शेफाली कहती हैं, "जब आप बाहर होते हैं, तब आपको समझ आता है कि केवल टैलेंट से लंबे समय तक नहीं खेला जा सकता। मैंने अपने खेल का बारीकी से विश्लेषण किया और तीन सबसे अहम मोर्चों—निरंतरता, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर दिन-रात पसीना बहाया। आज मुझे खुशी है कि मेरी वह खामोश मेहनत मैदान पर रंग ला रही है।"
सीनियर टीम की उपकप्तानी मिलने पर शेफाली ने बेहद संजीदा सोच जाहिर की। अंडर-19 विश्व कप विजेता कप्तान रहीं शेफाली ने कहा, "सीनियर टीम में यह भूमिका पद से ज्यादा एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लीडरशिप का मतलब सिर्फ मैदान पर फील्डिंग लगाना या फैसले लेना नहीं होता, बल्कि ड्रेसिंग रूम में हर युवा साथी को सहज महसूस कराना और मुश्किल वक्त में उसके साथ खड़े रहना है। कप्तान को हर कदम पर सहयोग देना मेरी प्राथमिकता है।" उन्होंने पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट को आक्रामक तेवर देने में उनका रोल हमेशा प्रेरणादायी रहेगा।
शेफाली हमेशा अपनी बेखौफ हिटिंग के लिए जानी जाती रही हैं, लेकिन विरोधी गेंदबाज अक्सर उनके खिलाफ शॉर्ट पिच या कसी हुई स्पिन गेंदबाजी का जाल बुनते थे। शेफाली ने नेट्स पर घंटों पसीना बहाकर इसे सुधारा। उन्होंने बताया, "मैंने पुल शॉट और शॉर्ट गेंदों पर टाइमिंग सुधारने के लिए अलग ड्रिल्स कीं। स्पिनरों के खिलाफ बैकफुट पर जाकर गैप तलाशने पर काम किया। जब आप अपनी कमजोरियों से भागने के बजाय उन पर वार करते हैं, तो मैच का डर अपने आप खत्म हो जाता है।"
दूसरी बार 'आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ' का खिताब जीतने वाली शेफाली के लिए रायपुर बेहद खास है। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि सीनियर स्तर पर राज्य की ओर से उन्होंने अपना पहला पदार्पण मुकाबला इसी शहर में खेला था। यहां का माहौल, सुविधाएं और दर्शकों का उत्साह उन्हें घरेलू ऊर्जा से भर देता है।