
Eco Tourism: बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड पलारी में चित्रोत्पला महानदी के किनारे बसा ग्राम धमनी आज पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी का एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। यह गांव केवल हरियाली से घिरा एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र नहीं है, बल्कि यहां के लोगों ने जंगल को अपनी पहचान, अपनी विरासत और अपने भविष्य के रूप में संरक्षित करने का संकल्प लिया है। गांव की यही सामूहिक सोच आज धमनी को पूरे क्षेत्र में एक अलग पहचान दिला रही है। यहां महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की सजगता ने न केवल जंगल को सुरक्षित रखा है, बल्कि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
धमनी में वन संरक्षण की यह कहानी आज की नहीं है। इसकी नींव वर्ष 1997-98 में रखी गई थी, जब तत्कालीन वन अधिकारियों की उपस्थिति में स्थानीय समिति का गठन किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद इस समिति ने वन प्रबंधन समिति के रूप में कार्य करना शुरू किया और तब से लेकर आज तक जंगल की सुरक्षा का दायित्व पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है। समिति ने समय के साथ स्वयं को मजबूत किया और ग्रामीणों को संरक्षण कार्यों से जोड़ते हुए सामुदायिक भागीदारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
धमनी गांव की सबसे बड़ी विशेषता यहां सक्रिय महिला कमांडो दल है। ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि जिम्मेदारी और संकल्प मजबूत हो तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। महिला कमांडो दल नियमित रूप से जंगल की निगरानी करता है। जंगल में अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ आग लगने जैसी घटनाओं को रोकने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यही कारण है कि पिछले पांच वर्षों से इस जंगल में आग लगने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि गांव की महिलाओं की सतर्कता, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
वन संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए गांव में आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। जंगल से जुड़े किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल साझा करने के लिए मोबाइल सूचना तंत्र विकसित किया गया है। इसके साथ ही महिला कमांडो दल और नवयुवकों द्वारा नियमित गश्त की जाती है। वन मार्गों से गुजरने वाले ग्रामीण भी जंगल पर निरंतर नजर बनाए रखते हैं। इस सामुदायिक निगरानी व्यवस्था ने जंगल को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
धमनी, सलौनी, खैरी और जोराडबरी जैसे आसपास के गांवों में जलाऊ लकड़ी के लिए जंगल पर निर्भरता पहले अधिक थी। लेकिन अब ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए जंगल में अनियंत्रित प्रवेश पर रोक लगाने की दिशा में काम किया है। महिलाओं की सक्रिय भूमिका के कारण जंगल में होने वाली अनावश्यक आवाजाही नियंत्रित हुई है। इससे वन क्षेत्र को पुनर्जीवित होने का अवसर मिला और जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद मिली है।
लगातार संरक्षण और निगरानी के कारण जंगल का प्राकृतिक स्वरूप बेहतर हुआ है। वन क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी वन क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और संरक्षण गतिविधियां मजबूत होती हैं, तब वहां की जैव विविधता स्वतः समृद्ध होने लगती है। धमनी का जंगल इसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
वन संरक्षण के साथ-साथ अब गांव में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। समिति के पास आय का स्थायी स्रोत नहीं होने के कारण वन विभाग ने यहां प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके तहत प्राकृतिक आलय (नेचर हट) का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाना और स्थानीय लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।
चित्रोत्पला महानदी के तट पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षित नौकायन पर्यटन विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। इसके अलावा यहां छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन शैली को प्रदर्शित करने की भी योजना है। इससे पर्यटकों को प्रकृति के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
वन संरक्षण के इस अभियान में बलौदाबाजार वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील के मार्गदर्शन और वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. एकता कर के नेतृत्व में संरक्षण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही वन परिसर रक्षी मनबोधन टंडन, समिति अध्यक्ष रामनारायण यादव, जनपद सदस्य चंद्र कुमार पैकरा, सरपंच हरदयाल पैकरा, उपसरपंच मिनेंद्र कुमार यादव और पूर्व सैनिक टी.आर. ध्रुव सहित अनेक लोगों का योगदान उल्लेखनीय है।
गांव में सक्रिय 10 महिला समूह केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन महिला समूहों ने यह साबित कर दिया है कि विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और जिम्मेदारी से संभव होता है।
धमनी गांव का यह प्रयास छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है। यहां लोगों ने दिखाया है कि यदि समुदाय स्वयं जिम्मेदारी ले तो जंगलों को बचाया जा सकता है, वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सकता है और संरक्षण को विकास से भी जोड़ा जा सकता है।
धमनी गांव की कहानी केवल जंगल बचाने की कहानी नहीं है। यह सामूहिक संकल्प, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास का जीवंत उदाहरण है। जहां एक ओर महिला कमांडो दल जंगल की रक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का सहयोग और प्रशासन का मार्गदर्शन इस क्षेत्र को संरक्षण और पर्यटन के नए मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है। आज धमनी यह संदेश दे रहा है कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है। जब पूरा गांव एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेता है, तब विकास और प्रकृति दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।