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AI-आधारित ‘क्रैफ्टी फाल्कन’ के साइबर हमले बढ़े, CERT-In ने वित्तीय कंपनियों को दी चेतावनी

AI-आधारित 'क्रैफ्टी फाल्कन' के साइबर हमले बढ़े हैं। इसको लेकर CERT-In ने चेतावनी जारी की है।
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Updated: 7 Nov 2026, 7:08 PM IST
cyber attacks
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), फिनटेक फर्मों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए एक नई चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी अनधिकृत फंड ट्रांसफर से जुड़े साइबर हमलों में हुई बढ़ोतरी के मद्देनजर दी गई है।

इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), फिनटेक फर्मों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए एक नई चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी अनधिकृत फंड ट्रांसफर से जुड़े साइबर हमलों में हुई बढ़ोतरी के मद्देनजर दी गई है।

CERT-In ने चेतावनी दी

CERT-In ने बताया कि उसने 'क्रैफ्टी फाल्कन' नामक एक चल रहे साइबर अभियान में काफी तेजी देखी है। यह अभियान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित टूल्स का इस्तेमाल करता है, ताकि हमलों को ऑटोमेट किया जा सके और वित्तीय प्रणालियों की कमजोरियों का तेजी से फायदा उठाया जा सके।

यह एडवाइजरी अक्टूबर में जारी की गई, एक पिछली चेतावनी के बाद आई है, जिसमें पेमेंट और डिस्बर्समेंट एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) के दुरुपयोग के जरिए धोखाधड़ी से फंड ट्रांसफर किए जाने के बारे में बताया गया था।

CERT-In के अनुसार, बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों से सफल घुसपैठ की रिपोर्टें लगातार मिल रही हैं। इनमें कुछ ऐसे संस्थान भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछली चेतावनियों के बाद सुधारात्मक कदम उठाए थे। कई मामलों में, हमलावर उन संस्थानों को फिर से निशाना बनाने आए, जहां पहचानी गई कमियों को पूरी तरह से दूर नहीं किया गया था।

कब अधिक सक्रिय होते हैं साइबर अपराधी?

निगरानी संस्था ने कहा कि हमलावर अब अक्सर सप्ताहांत, छुट्टियों और ऐसे अन्य समय पर हमले करते हैं, जब सुरक्षा निगरानी कम होती है, जिससे इन हमलों का पता लगाना और उन पर प्रतिक्रिया देना और भी मुश्किल हो जाता है।

CERT-In की जांच में पाया गया है कि हमलावर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध, AI-आधारित 'ऑफेंसिव सिक्योरिटी' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म कस्टमाइज्ड अटैक स्क्रिप्ट बनाने, सिस्टम की प्रतिक्रियाओं के आधार पर मैलवेयर को ढालने और इंसानी दखल के बिना ही हमले की प्रक्रिया के बड़े हिस्से को अंजाम देने में सक्षम हैं।

इसके अलावा, हमलावर महत्वपूर्ण सिस्टम तक पहुंच प्राप्त करने के लिए इंटरनेट से जुड़े टेस्टिंग एनवायरनमेंट, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एप्लिकेशन की कमजोरियों और हैक किए गए क्रेडेंशियल्स का फायदा उठा रहे हैं। धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन शुरू करने के लिए मॉडिफाई किए गए मोबाइल एप्लिकेशन और अनधिकृत API कॉल का इस्तेमाल किया गया है।

इस एडवाइजरी में कुछ ऐसे तरीकों का भी जिक्र किया गया है, जिनका इस्तेमाल करके हमलावर सुरक्षा उपायों को चकमा देते हैं। इनमें भरोसेमंद थर्ड-पार्टी सर्विस के जरिए हानिकारक ट्रैफिक को रूट करना और बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले सिस्टम की कमियों को परखने के लिए छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करना शामिल है। इससे पहले अक्टूबर में, कई वित्तीय संस्थानों को साइबर हमलों का सामना करना पड़ा था। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और माइक्रोफाइनेंस कंपनी स्पंदना स्फूर्ति जैसी प्रमुख बैंकिंग संस्थाएं शामिल थीं।

Updated on:
7 Nov 2026, 7:08 PM IST
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