
आजकल शरीर में कोई नया लक्षण महसूस होते ही बहुत से लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले इंटरनेट या AI चैटबॉट से उसका मतलब पूछ लेते हैं। सिरदर्द, पेट दर्द, चक्कर या थकान जैसी सामान्य परेशानियों के बारे में जानकारी लेना आसान हो गया है; लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब ऑनलाइन जवाब को बीमारी का पक्का निदान या इलाज मान लिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI और इंटरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
AI चैटबॉट बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी के आधार पर जवाब तैयार करते हैं। वे किसी व्यक्ति की जांच, मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और शारीरिक स्थिति को डॉक्टर की तरह पूरी तरह समझ नहीं सकते। कई बार जवाब सुनने में बहुत भरोसेमंद लगता है, लेकिन उसमें जरूरी संदर्भ छूट सकता है या गलत जानकारी शामिल हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी AI के स्वास्थ्य संबंधी इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह दी है। संगठन के अनुसार, AI में गलत सलाह, पक्षपात, पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही से जुड़े जोखिम हो सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी फैसलों में मानव विशेषज्ञ की निगरानी जरूरी है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को सीने में दर्द हो रहा है। यह मांसपेशियों में खिंचाव, गैस या किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से जुड़ा हो सकता है। केवल लक्षण पढ़कर इन कारणों में अंतर करना आसान नहीं है। इसी तरह सिरदर्द कई सामान्य कारणों से हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
यही कारण है कि AI का जवाब पढ़कर खुद को स्वस्थ मान लेना या बिना सलाह दवा शुरू कर देना जोखिम भरा हो सकता है। दूसरी ओर, हर सामान्य लक्षण को गंभीर बीमारी समझ लेना भी अनावश्यक डर पैदा कर सकता है।
इंटरनेट पर लगातार बीमारी के लक्षण खोजने की आदत कुछ लोगों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा सकती है। NHS के अनुसार, हेल्थ एंग्जायटी यानी स्वास्थ्य संबंधी चिंता में व्यक्ति बार-बार अपने शरीर को जांचता है, दूसरों से आश्वासन मांगता है और इंटरनेट पर बीमारी की जानकारी खोजता रहता है। चिंता के कारण होने वाले लक्षणों को भी वह किसी गंभीर बीमारी का संकेत समझ सकता है।
ऐसे में एक लक्षण की खोज के बाद दूसरा लक्षण दिखाई देना, फिर नई बीमारी की आशंका होना और दोबारा जानकारी खोजना एक चक्र बन सकता है। इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।
AI या ऑनलाइन सर्च से मिली गलत जानकारी का सबसे बड़ा नुकसान यह हो सकता है कि व्यक्ति जरूरी इलाज में देरी कर दे। उदाहरण के लिए, अगर कोई गंभीर लक्षण को केवल गैस या थकान समझकर घर पर ही इलाज करता रहे, तो डॉक्टर तक पहुंचने में देर हो सकती है।
WHO के अनुसार, AI सिस्टम में गलत या अधूरी सलाह मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का इस्तेमाल सावधानी से करना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
AI को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने के लिए एक शुरुआती साधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, डॉक्टर की बताई गई मेडिकल टर्म का आसान अर्थ समझना, किसी जांच की सामान्य जानकारी लेना या डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल तैयार करना उपयोगी हो सकता है।
लेकिन AI से मिली जानकारी के आधार पर खुद दवा शुरू करना, दवा बंद करना या डॉक्टर की सलाह बदलना सही तरीका नहीं है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
अगर लक्षण अचानक बहुत तेज हो जाएं, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में गंभीर दर्द हो, बेहोशी आए, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी हो या कोई अन्य गंभीर संकेत दिखाई दे, तो ऑनलाइन जवाब खोजने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
सामान्य लक्षणों के लिए भी अगर परेशानी बनी रहती है, बार-बार होती है या रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
AI और इंटरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को आसान बना सकते हैं, लेकिन वे हर व्यक्ति की स्थिति का सही आकलन नहीं कर सकते। इसलिए ऑनलाइन जानकारी को अंतिम सच मानने के बजाय उसे केवल शुरुआती समझ तक सीमित रखना चाहिए। सही निदान और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।