
इमेजः ChatGPT
आजकल लोग पढ़ाई, नौकरी, लिखने और जानकारी हासिल करने के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी सुविधा के कारण कुछ लोग अपने ईमेल, सोशल मीडिया या बैंकिंग अकाउंट के लिए पासवर्ड भी AI से बनवाने लगे हैं। देखने में ये पासवर्ड मुश्किल और मजबूत लगते हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी है कि ऐसा करना हमेशा सुरक्षित नहीं है। एक हालिया रिसर्च में ChatGPT, Google Gemini और Claude जैसे AI टूल्स से बनाए गए पासवर्ड में ऐसे पैटर्न मिले, जिन्हें हमलावर आसानी से पहचान सकते हैं।
साइबर सुरक्षा कंपनी Irregular ने AI से पासवर्ड बनवाने के तरीके की जांच की। रिसर्च में पाया गया कि कई AI मॉडल ऐसे पासवर्ड बनाते हैं, जो अलग दिखने के बावजूद एक जैसे पैटर्न पर आधारित होते हैं। कुछ पासवर्ड बार बार दोहराए गए, जबकि कई में अक्षरों, अंकों और विशेष चिन्हों का इस्तेमाल एक जैसी शैली में किया गया था।
उदाहरण के लिए, AI किसी पासवर्ड में पहला अक्षर बड़ा, उसके बाद कुछ छोटे अक्षर और अंत में अंक या विशेष चिन्ह जोड़ सकता है। यह पासवर्ड देखने में जटिल लग सकता है, लेकिन अगर यही तरीका बार बार इस्तेमाल हो रहा है, तो हमलावरों के लिए अनुमान लगाना आसान हो जाता है।
कई लोग मानते हैं कि 16 या 20 अक्षरों का पासवर्ड अपने आप मजबूत होता है। लेकिन पासवर्ड की सुरक्षा केवल उसकी लंबाई पर निर्भर नहीं करती। यह भी जरूरी है कि वह वास्तव में कितना अनियमित है और उसमें कोई पहचाना जा सकने वाला पैटर्न तो नहीं है।
AI मॉडल भाषा के पैटर्न सीखकर जवाब तैयार करते हैं। इसलिए वे ऐसे शब्दों और अक्षरों के संयोजन को प्राथमिकता दे सकते हैं, जो सामान्य तौर पर इस्तेमाल होते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यही वजह है कि AI से बनाए गए पासवर्ड हमेशा सच्चे अर्थों में रैंडम नहीं होते।
Malwarebytes की रिपोर्ट के अनुसार, Irregular ने ChatGPT, Claude और Gemini से पासवर्ड बनवाकर उनकी तुलना की। जांच में कुछ पासवर्ड दोहराए गए और कई में एक जैसी संरचना दिखाई दी। रिपोर्ट में बताया गया कि Claude से 50 बार पासवर्ड बनवाने पर केवल 23 अलग पासवर्ड मिले। इसका मतलब है कि AI का जवाब हर बार पूरी तरह नया और अप्रत्याशित नहीं था।
Sky News की रिपोर्ट में भी इस रिसर्च का हवाला देते हुए बताया गया कि AI से बनाए गए पासवर्ड देखने में मजबूत लग सकते हैं, लेकिन उनमें अनुमान लगाने योग्य पैटर्न हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने ऐसे पासवर्ड इस्तेमाल करने वाले लोगों को उन्हें बदलने की सलाह दी है।
अगर किसी व्यक्ति ने AI से पासवर्ड बनवाकर उसे अपने बैंकिंग, ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट में इस्तेमाल किया, तो वह पासवर्ड कमजोर होने की स्थिति में हमलावरों के लिए आसान निशाना बन सकता है। खासकर तब, जब वही पासवर्ड कई अकाउंट में इस्तेमाल किया गया हो।
साइबर अपराधी अक्सर पहले से उपलब्ध पासवर्ड लिस्ट और आम पैटर्न का इस्तेमाल करके अकाउंट में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। इसे डिक्शनरी अटैक कहा जाता है। ऐसे हमलों में हर संभव पासवर्ड आजमाने के बजाय पहले से अनुमानित शब्दों और संयोजनों को जांचा जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि पासवर्ड बनाने के लिए समर्पित पासवर्ड मैनेजर या सुरक्षित रैंडम पासवर्ड जनरेटर का इस्तेमाल करें। ऐसे टूल्स विशेष रूप से मजबूत और अलग पासवर्ड बनाने के लिए तैयार किए जाते हैं।
हर महत्वपूर्ण अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखना भी जरूरी है। अगर एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल किया गया है और किसी एक वेबसाइट से वह लीक हो जाता है, तो दूसरे अकाउंट भी खतरे में पड़ सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि AI टूल्स का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। AI पढ़ाई, लेखन, जानकारी समझने और कई दूसरे कामों में उपयोगी हो सकता है। लेकिन पासवर्ड जैसी संवेदनशील चीजों के लिए ऐसे टूल्स पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है।
AI से पासवर्ड सुरक्षा के बारे में सामान्य जानकारी ली जा सकती है, लेकिन वास्तविक पासवर्ड बनाने और सुरक्षित रखने के लिए ऐसे साधनों का इस्तेमाल करना बेहतर है, जो इसी काम के लिए बनाए गए हों।
अगर आपने पहले AI से पासवर्ड बनवाकर किसी अकाउंट में इस्तेमाल किया है, तो उसे बदलने पर विचार करें। खासकर अगर वही पासवर्ड दूसरे अकाउंट में भी इस्तेमाल हो रहा है। नया पासवर्ड अलग रखें और जहां संभव हो, वहां टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी चालू करें।
साइबर सुरक्षा का सबसे जरूरी नियम यही है कि पासवर्ड जितना निजी और अलग होगा, अकाउंट उतना सुरक्षित रहेगा। AI से बना पासवर्ड भले ही देखने में मजबूत लगे, लेकिन सुरक्षा के मामले में केवल दिखावे पर भरोसा करना ठीक नहीं है।
Updated on:
06 Sept 2026 01:51 pm
Published on:
06 Sept 2026 01:51 pm
