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UN का नया वर्ल्ड मैप: अफ्रीका बड़ा, अमेरिका-यूरोप छोटे क्यों दिखेंगे? जानिए भारत पर असर

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने Equal Earth Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसमें अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीप अपने वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देंगे, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। आइए जानते हैं, भारत पर इसका क्या असर होगा?
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भारत

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Adarsh Thakur

Sep 06, 2026

Equal Earth Map

सांकेतिक इमेजः Gemini

दुनिया का नक्शा देखकर हमें लगता है कि महाद्वीपों का आकार वही है, जो कागज पर दिखाई देता है; लेकिन नक्शे पर दिखने वाला आकार हमेशा धरती के असली आकार के बराबर नहीं होता। अब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसी फर्क को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 4 सितंबर 2026 को महासभा ने Equal Earth Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। इसमें अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीप अपने वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देंगे, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका पहले की तुलना में छोटे नजर आएंगे।

पुराने नक्शे में अफ्रीका छोटा क्यों दिखता है?

स्कूलों और इंटरनेट पर लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला नक्शा Mercator Projection कहलाता है। इसे 1569 में कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने समुद्री यात्राओं के लिए तैयार किया था। इस नक्शे में दिशा और समुद्री मार्गों को समझना आसान होता है, लेकिन धरती के अलग-अलग हिस्सों का क्षेत्रफल सही अनुपात में नहीं दिखता।

इसका सबसे चर्चित उदाहरण अफ्रीका और ग्रीनलैंड हैं। पुराने नक्शे में दोनों लगभग एक जैसे बड़े दिखाई दे सकते हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना ज्यादा है। ध्रुवों के पास के इलाके बड़े और भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके छोटे दिखने लगते हैं। यही वजह है कि अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों का आकार अक्सर उनकी वास्तविक विशालता से कम नजर आता है।

Equal Earth Map में क्या बदलेगा?

Equal Earth Projection को 2018 में विकसित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के महाद्वीपों का क्षेत्रफल एक-दूसरे के मुकाबले ज्यादा सही अनुपात में दिखाना है। नए नक्शे में अफ्रीका बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप, अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे उत्तरी क्षेत्रों का आकार पहले की तुलना में कम नजर आएगा। हालांकि, कोई भी सपाट नक्शा गोल धरती को पूरी तरह सही नहीं दिखा सकता। इसलिए Equal Earth में भी कुछ आकार और दूरी से जुड़ी सीमाएं बनी रहेंगी।

इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि धरती का आकार बदल गया है या देशों की सीमाएं बदल दी गई हैं। बदलाव सिर्फ इस बात में है कि धरती को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाता है।

अमेरिका ने विरोध क्यों किया?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया और छह देश मतदान से अलग रहे। अमेरिकी पक्ष ने इसे जरूरी वैश्विक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया। वहीं, प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी नहीं देते, दुनिया को देखने का नजरिया भी बनाते हैं।

यह पहल अफ्रीकी देशों के लंबे समय से चले आ रहे अभियान Correct the Map से जुड़ी है। अफ्रीकी संघ और कई समर्थक संगठनों का तर्क है कि पुराने नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखना ऐतिहासिक असंतुलन को बढ़ावा देता है। उनके अनुसार, सही क्षेत्रफल दिखाने वाला नक्शा दुनिया के सभी क्षेत्रों को ज्यादा संतुलित तरीके से प्रस्तुत कर सकता है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा असर शिक्षा और वैश्विक समझ के स्तर पर हो सकता है। नए नक्शे में भारत और एशिया के दूसरे हिस्से अपने वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देंगे। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि दुनिया का भूगोल केवल यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक सीमित नहीं है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा या देश की भौगोलिक सीमाएं बदल जाएंगी। भारत का वास्तविक क्षेत्रफल पहले भी वही था और आगे भी वही रहेगा। बदलाव केवल उसके दृश्य प्रतिनिधित्व में होगा।

क्या हर जगह पुराना नक्शा बंद हो जाएगा?

नहीं। संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसका उद्देश्य सरकारों, स्कूलों, मीडिया संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को ज्यादा संतुलित नक्शों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है। Mercator Projection का इस्तेमाल समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अब भी उपयोगी है, इसलिए वहां इसका उपयोग जारी रह सकता है।

इस बदलाव का असर धीरे-धीरे देखने को मिल सकता है। स्कूलों की किताबों, डिजिटल मैप्स और शैक्षणिक सामग्री में नए प्रक्षेपण का इस्तेमाल बढ़ सकता है; लेकिन दुनिया का नक्शा एक दिन में हर जगह नहीं बदलेगा।

नक्शा बदलने से क्या बदलेगा?

यह फैसला भूगोल से ज्यादा दुनिया को देखने के नजरिए से जुड़ा है। नक्शा किसी जगह का आकार ही नहीं दिखाता, बल्कि यह भी प्रभावित करता है कि हम किस क्षेत्र को कितना बड़ा, महत्वपूर्ण या प्रभावशाली मानते हैं। Equal Earth Map का उद्देश्य इस दृश्य असंतुलन को कम करना है।

भारत के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों की वास्तविक भौगोलिक विशालता को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह किसी देश की आर्थिक, राजनीतिक या सैन्य ताकत को नहीं बदलता। यह सिर्फ दुनिया को देखने का एक ज्यादा संतुलित तरीका है।