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आप अधिक समय तक कुर्सी पर बैठते हैं? यह आदत बन सकती है कैंसर की वजह, आसान उपाय से कम कर सकते हैं खतरा

अगर आप भी दफ्तर या घर में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, लगातार लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहना कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 05, 2026

cancer risk cause

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

अगर आप भी दफ्तर या घर में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। स्कॉटलैंड की ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने ताजा अध्ययन में पाया है कि लगातार, बिना रुके लंबे समय तक बैठे रहना कैंसर से मौत के खतरे को बढ़ा देता है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल पीएलओएस मेडिसिन (PLOS Medicine) में प्रकाशित हुआ है और डॉ. फ्रेडरिक हो की अगुआई में किया गया।

कैसे हुआ अध्ययन?

शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक से जुड़े 91,292 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया। इन सभी प्रतिभागियों ने एक हफ्ते तक शरीर पर एक्सेलेरोमीटर (गतिविधि मापने वाला उपकरण) पहना, जिससे यह रिकॉर्ड हुआ कि वे दिनभर में कितनी देर बैठे रहते हैं और कितनी देर सक्रिय रहते हैं। इसके बाद शोधकर्ताओं ने इन लोगों की सेहत पर औसतन करीब 12 साल तक नजर रखी।

अध्ययन में बैठने की आदत को दो हिस्सों में बांटा गया। पहली श्रेणी में लगातार कुर्सी पर बैठने वालों (कम से कम 30 मिनट तक बिना रुके बैठना) और दूसरी श्रेणी में बीच-बीच में उठकर बैठने (30 मिनट से कम के अंतराल में बैठना, जिसमें बीच में हलचल शामिल हो) वालों को शामिल किया गया।

अध्ययन के अनुसार, लगातार बैठे रहने के हर अतिरिक्त 1 घंटे पर कैंसर से मौत का खतरा 9 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बीच-बीच में उठकर टहलने या हरकत करने वाले लोगों में कैंसर से जुड़े सभी नतीजों का जोखिम कम होता है।

किन कैंसर का खतरा ज्यादा?

अध्ययन में पाया गया कि लगातार बैठे रहने का संबंध खासतौर पर मोटापे से जुड़े कैंसर से है, जिनमें भोजन-नली (इसोफेगस), यकृत (लिवर), गुर्दे (किडनी), अग्न्याशय (पैंक्रियाज), बड़ी आंत (कोलोरेक्टल), स्तन, अंडाशय और थायरॉयड कैंसर शामिल हैं। इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े कैंसर का जोखिम भी बढ़ा हुआ पाया गया।

हल्की गतिविधि से मिलता है फायदा

अध्ययन की सबसे उम्मीद जगाने वाली बात यह रही कि बड़े बदलाव के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। डॉ. हो के मुताबिक अगर रोजाना 30 मिनट की निष्क्रियता (बैठे रहने) को 30 मिनट की मध्यम गति की गतिविधि जैसे सामान्य चाल से टहलने से बदल दिया जाए, तो कैंसर से मौत का खतरा 8 प्रतिशत तक घट जाता है। इससे भी दिलचस्प यह है कि अगर रोजाना सिर्फ 5 मिनट की निष्क्रियता को 5 मिनट की तेज (जोरदार) गतिविधि से बदला जाए, जैसे- तेज सीढ़ी चढ़ना तो कैंसर से मौत का खतरा 22 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

डॉ. हो ने कहा कि 30 मिनट से अधिक समय तक लगातार बैठे रहना खासतौर पर कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया और थोड़ी देर की सैर जैसी छोटी हरकत भी सुरक्षा कवच का काम कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा स्वास्थ्य दिशा-निर्देश ज्यादातर मध्यम या तेज व्यायाम पर ही केंद्रित रहते हैं, जबकि हल्की गतिविधि को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

शोध की खासियत

ग्लासगो यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन की खासियत यही है कि इसने पहली बार बड़े पैमाने पर यह दिखाया है कि बैठने के "पैटर्न" यानी लगातार बनाम रुक-रुक कर बैठना भी सेहत पर उतना ही असर डालता है, जितना कुल समय। पहले के शोधों में लंबे समय तक बैठे रहने को हृदय रोग और कुछ तरह के कैंसर के बढ़े जोखिम से जोड़ा जा चुका है, लेकिन इस अध्ययन ने बैठक के टूटने-जुड़ने के पैटर्न को केंद्र में रखकर एक नई दिशा दी है।

यह अध्ययन एक अवलोकन-आधारित (ऑब्जर्वेशनल) कोहॉर्ट अध्ययन है, यानी यह सीधे कारण-प्रभाव साबित नहीं करता, बल्कि आपस में जुड़ाव (एसोसिएशन) दिखाता है। शोधकर्ताओं ने खुद माना है कि यूके बायोबैंक के प्रतिभागी आमतौर पर सामान्य ब्रिटिश आबादी से ज्यादा सेहतमंद और सक्रिय होते हैं। इसलिए नतीजों को पूरी आबादी पर सीधे लागू करने में सावधानी जरूरी है।