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शहरी जलापूर्ति का डिजिटल कायाकल्प: भूमिगत सेंसर और AI से थमी ‘नॉन-रेवेन्यू वाटर’ की बर्बादी

Smart Water Grid: अकॉस्टिक और प्रेशर सेंसर्स के ज़रिए भूमिगत पाइपलाइन रिसाव की रीयल-टाइम पहचान संभव हुई है। परीक्षण में 35 प्रतिशत नॉन-रेवेन्यू वाटर की बर्बादी रुकी है और टेल-एंड तक आपूर्ति बेहतर हुई है।
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Aug 29, 2026
Smart Water Supply News
AI की स्मार्ट निगरानी से अब ज़मीन के नीचे छिपे पानी के रिसाव पर भी लगेगी तुरंत रोक। (फोटो:AI. )

भारतीय महानगरों में शोधित पेयजल का एक बड़ा हिस्सा उपभोक्ताओं के नलों तक पहुँचने से पहले ही ज़मीन के भीतर समा जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शहरी विकास से जुड़े नीतिगत अध्ययनों के अनुसार, कई बड़े शहरों में कुल आपूर्ति का 40 से 50 प्रतिशत पानी 'नॉन-रेवेन्यू वाटर' (NRW),यानी रिसाव, पाइपलाइन टूटने या अनधिकृत कनेक्शन—के कारण व्यर्थ बह जाता है। इस गंभीर संकट से निपटने के लिए नगर निगमों और जल बोर्डों ने अब पारंपरिक मैन्युअल निगरानी को पीछे छोड़ते हुए भूमिगत पाइपलाइनों में अकॉस्टिक और प्रेशर-सेंसिटिव AI सेंसर का जाल बिछाना शुरू किया है।

जल प्रबंधन का पारंपरिक बनाम आधुनिक मॉडल

पारंपरिक व्यवस्था में जल रिसाव की पहचान तब होती थी, जब पानी सतह पर आकर सड़कों को जलमग्न कर देता था या संबंधित क्षेत्र में पानी का दबाव शून्य हो जाता था। इस प्रक्रिया में लीकेज की सटीक जगह ढूँढने के लिए कई दिनों तक खुदाई करनी पड़ती थी, जिससे लाखों लीटर साफ़ पानी बर्बाद होता था।

नई प्रणाली में पाइपलाइन नेटवर्क के भीतर स्थापित 'हाइड्रोफोनिक अकॉस्टिक सेंसर्स' पाइप में पानी के प्रवाह से पैदा होने वाली सूक्ष्म ध्वनियों (Acoustic Signatures) को लगातार रिकॉर्ड करते हैं। जब किसी पाइप में बारीक दरार या जंग के कारण रिसाव होता है, तो पानी के निकलने की आवाज़ की आवृत्ति (Frequency) बदल जाती है। मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म इस ध्वनि विचलन और दबाव में आने वाले अंतर का तुरंत विश्लेषण करता है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के कंट्रोल रूम को सटीक जीपीएस (GPS) निर्देशांक प्रेषित कर देता है।

AI वॉटर ग्रिड और स्मार्ट लीकेज डिटेक्शन : एक नजर

सेंसर व तकनीककार्यप्रणालीप्रत्यक्ष प्रभाव
अकॉस्टिक AI सेंसरपाइप में जल प्रवाह की सूक्ष्म ध्वनि आवृत्तियों की रीयल-टाइम ट्रैकिंगसतह पर पानी आने से पहले ही आंतरिक रिसाव की पहचान
प्रेशर-ट्रांसड्यूसरपाइपलाइन ग्रिड में दबाव के उतार-चढ़ाव का निरंतर मापनटेल-एंड तक एकसमान दबाव और बूस्टर पंपों की बचत
जीपीएस इंटीग्रेशनखराबी वाले स्थान का पिन-पॉइंट डिजिटल मानचित्रणअनावश्यक खुदाई पर रोक और मरम्मत समय में 70% तक की कमी

पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे और वित्तीय लाभ

देश के पांच प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों में चलाए गए प्रायोगिक परीक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि इस तकनीक से पानी की बर्बादी में 35 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।

टेल-एंड तक जलापूर्ति: पाइपलाइन के अंतिम छोर पर स्थित बस्तियों में अक्सर पानी का दबाव कम रहता था। रिसाव रुकने से प्राकृतिक दबाव बना रहता है, जिससे अतिरिक्त बूस्टर पंपों की आवश्यकता घटी है।

सड़क क्षति में कमी: ज़मीन के नीचे पानी भरने से होने वाले सड़क धंसाव और गड्ढों की समस्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

राजस्व संवर्धन: बचा हुआ पानी वैध वितरण नेटवर्क में शामिल होने से जल संस्थानों की बिलिंग दक्षता और परिचालन आय में सुधार हुआ है।

शहरी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल जल स्रोतों का संरक्षण पर्याप्त नहीं है; वितरण प्रणाली की अदृश्य बर्बादी को रोकना भी उतना ही अनिवार्य है। AI-सेंसर्स का यह नेटवर्क भविष्य के 'स्मार्ट वॉटर ग्रिड' की ठोस बुनियाद तैयार कर रहा है।

Updated on:
29 Aug 2026 07:22 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:46 pm