
सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)
भारत में मानसूनी बारिश की कमी बड़ी चिंता का विषय है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में बारिश की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 26 अगस्त 2026 तक देश में सामान्य औसत 664.7 मिमी की तुलना में सिर्फ 577.8 मिमी बारिश हुई है। इसका मतलब है कि यह बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम है। देश के 14 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस समय 'न्यून वर्षा' यानी बारिश की कमी वाली श्रेणी में दर्ज हैं।
IMD के 1 जून से 25 अगस्त तक के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 310 जिले 'न्यून वर्षा' (डेफिशिएंट) और 38 जिले 'अत्यधिक न्यून वर्षा' (लार्ज डेफिशिएंट) श्रेणी में हैं। यानी कुल मिलाकर 348 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। इसके उलट 287 जिलों में सामान्य, 80 में अधिक और 19 में बेहद अधिक बारिश हुई, जबकि 7 जिलों का डेटा उपलब्ध नहीं है। यह आंकड़ा दिखाता है कि मानसून की कुल राष्ट्रीय कमी भले ही 13 प्रतिशत जैसी लगे, लेकिन जिला स्तर पर स्थिति कहीं ज्यादा असमान और गंभीर है।
बारिश की सबसे बड़ी कमी पूर्वोत्तर के मेघालय में दर्ज हुई, जहां सामान्य से 58 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद मणिपुर (43%), बिहार (42%), अरुणाचल प्रदेश (40%) और आंध्र प्रदेश (39%) का नंबर आता है। पंजाब में 34 प्रतिशत, गोवा और पुडुचेरी में 33-33 प्रतिशत, असम में 25 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 24 प्रतिशत, मिजोरम और कर्नाटक में 22-22 प्रतिशत, राजस्थान में 21 प्रतिशत तथा केरल में 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।
बिहार में 38 में से 35 जिले (32 न्यून व 3 अत्यधिक न्यून), असम में 19, कर्नाटक में 20, आंध्र प्रदेश में 25, पंजाब में 18 और राजस्थान में 19 जिले बारिश की कमी झेल रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि हाल में आई बाढ़ के बावजूद असम जैसे राज्य में भी बड़ी संख्या में जिले सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में हैं, जो मानसून के असमान वितरण की ओर इशारा करता है। हालांकि हर जगह कमी नहीं है। ओडिशा में सामान्य से 28 प्रतिशत ज्यादा (1,098 मिमी बनाम 856.7 मिमी सामान्य) और दिल्ली में 20 प्रतिशत ज्यादा (498.7 मिमी बनाम 415.8 मिमी सामान्य) बारिश दर्ज हुई है, जबकि मध्य प्रदेश सामान्य श्रेणी में बना हुआ है। यानी देश में एक साथ बाढ़ और सूखे जैसी दोनों स्थितियां मौजूद हैं।
बारिश की इस असमानता का सीधा असर खेती पर पड़ने की आशंका है। खरीफ फसलों में नमी की कमी से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं बांधों, जलाशयों और भूजल स्तर की रिचार्जिंग पर भी असर पड़ सकता है। अगर सितंबर में भी अच्छी बारिश नहीं हुई, तो मिट्टी में नमी की कमी से आगामी रबी सीजन की बुआई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने की उम्मीद है और 31 अगस्त तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। लेकिन विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगस्त-सितंबर के दौरान देश के बड़े हिस्से में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से कम ही रहने की आशंका है।
ऐसे में मानसून की कुल राष्ट्रीय कमी की भरपाई हो पाने की गुंजाइश फिलहाल सीमित नजर आ रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मानसून के इस असमान और अनिश्चित रुख के पीछे प्रशांत महासागर में मजबूत होते अल नीनो प्रभाव और पश्चिमी विक्षोभों की बढ़ी सक्रियता जैसे कारण भी बताए जा रहे हैं, जिनकी वजह से देश में कहीं भारी बाढ़ तो कहीं लंबे सूखे के दौर एक साथ देखने को मिल रहे हैं।
Updated on:
29 Aug 2026 08:12 pm
Published on:
29 Aug 2026 08:11 pm
