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भारतीय MSME के लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा: जानिए क्या हैं नए अवसर?

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश के छोटे व्यवसाय वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं? जानिए कैसे MSME अपने संघर्षों को पार करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमकने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 29, 2026

Indian MSMEs Global Economy

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

भारत के MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। कुछ क्षेत्रों में उन्होंने सफलता हासिल की है, लेकिन कई मोर्चों पर संघर्ष अभी भी जारी है। आइए समझते हैं कि भारत के भारत के MSME सेक्टर कहां मजबूत हैं और कहां कमजोर हैं?

MSME का वैश्विक योगदान


आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, MSME भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कुल उत्पादन का लगभग 35.4%, निर्यात का 48.56%, और GDP का 30.5% हिस्सा हैं। यह स्पष्ट करता है कि MSME न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

क्रेडिट और वित्तीय पहुंच में सुधार


नीति आयोग की रिपोर्ट (मई 2025) के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच सूक्ष्म और लघु उद्यमों की बैंक से औपचारिक क्रेडिट प्राप्ति 14% से बढ़कर 20% हुई, जबकि मध्यम उद्यमों में यह 4% से 9% तक पहुंची। हालांकि, वित्तीय मांग का केवल 19% ही औपचारिक रूप से पूरा हुआ, जिससे लगभग ₹80 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप बना हुआ है।

नए वित्तीय उपाय और प्रोत्साहन


20 फरवरी 2026 को वाणिज्य मंत्री ने Export Promotion Mission के तहत निर्यात प्रोत्साहन पहल के सात नए उपायों की घोषणा की। इनमें निर्यात फैक्टरिंग के लिए 2.75% ब्याज सब्सिडी (₹50 लाख तक प्रति MSME) और ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए 90% गारंटी के साथ ₹50 लाख तक की क्रेडिट सुविधा शामिल है। ये कदम MSME को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में मदद देने की दिशा में हैं।

बजट में नई पहलें


2026–27 के बजट में ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और ₹2,000 करोड़ का Self-Reliant India (SRI) Fund घोषित किया गया, जिससे MSME को क्रेडिट और जोखिम पूंजी तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही DX‑EDGE, GeM, TReDS और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म MSME को बाजार तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं।

निर्यात चुनौतियां और मार्केटिंग की कमी


Exim Bank के सर्वे (जून 2025) में सामने आया कि 51.4% MSME निर्यातकों को विदेशों में अवसरों की जानकारी नहीं है, 49.5% को विदेशी वितरकों से संबंध बनाने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही 44.9% को अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग में समस्या आती है। इसके अलावा, 43% को वित्तीय सहायता, और 28% को नियमों का पालन करने में मुश्किल होती है। MSME निर्यात में 2023–24 में लगभग 29.2% हिस्सा था।

तकनीकी, कौशल और चुनौतियां


नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि MSME में कौशल की कमी, R&D और नवाचार में निवेश की कमी, पुरानी तकनीक, बिजली और इंटरनेट की अनियमितता जैसी समस्याएं हैं। OECD और अन्य अध्ययनों ने भी तकनीकी अपनाने और प्रबंधन कौशल की कमी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बाधा बताया है।

विशिष्ट क्षेत्रीय चुनौतियां


रत्न और आभूषण क्षेत्र में MSME आधारित उद्योग संरचना कमजोर है। यह असंगठित है, मूल्य संवर्धन कम है, और डिजाइन व ब्रांडिंग पर ध्यान नहीं है। इसके अलावा, कच्चे माल की महंगी उपलब्धता, FTA में असंगतियां, और ड्यूटी रिफंड में देरी जैसी समस्याएं भी हैं।

MSME की ताकत: विविधता और रोजगार


MSME लगभग 6.3 करोड़ उद्यम हैं, जो GDP का एक तिहाई हिस्सा और 11 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। यह संख्या और रोजगार क्षमता भारत की अर्थव्यवस्था में उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाती है। MSME ने वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाने की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए हैं। क्रेडिट में सुधार, बजट में नई पहलें, डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता और निर्यात प्रोत्साहन।

MSME सेक्टर के लिए आवश्यक सुझाव

  • डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग में निवेश बढ़ाना चाहिए।
  • निर्यात संवर्धन मिशन और बजट फंड का पूरा लाभ उठाएं।
  • क्लस्टर‑आधारित नीति और राज्य‑स्तरीय निगरानी को मजबूत करें।
  • कौशल विकास और तकनीकी उन्नयन पर ध्यान दें।
  • निर्यातकों को विदेशी बाजार की जानकारी और नेटवर्किंग में सहायता मिल सके, इसके लिए संस्थागत सहयोग बढ़ाएं।