
महाराष्ट्र सरकार के ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले से राज्य में नया सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के विरोध में सोमवार से मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने 3 दिन की हड़ताल शुरू कर दी, जिससे शहर के कई हिस्सों में यात्रियों को भारी परेशानी हुई।
कांदिवली लिंक रोड पर हड़ताली चालकों ने अपने वाहन रोककर प्रदर्शन किया, जिससे करीब 20 मिनट तक ट्रैफिक जाम रहा। प्रदर्शन के दौरान एक मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा चालक के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई, हालांकि ट्रैफिक पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति सामान्य हो गई।
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के जरिए 1989 के मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर मीटर वाले रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित मोटर कैब चलाने वाले व्यावसायिक चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी की शर्त को स्पष्ट किया है। इसके तहत आरटीओ और पुलिस सड़कों पर चालकों की मौखिक मराठी दक्षता की जांच कर सकते हैं।
नियम तोड़ने पर तय प्रक्रिया के अनुसार पहले नोटिस दिया जाएगा, समय सीमा में मराठी न सीखने पर बैज व लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा और लगातार इनकार करने पर बैज व परमिट स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। नए बैज या परमिट के आवेदकों की भी अब लाइव मौखिक मराठी जांच होगी, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी।
नियमों के तहत 15 अगस्त तक दी गई राहत की समयसीमा खत्म होने के बाद परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू किया, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। अभियान के पहले ही दिन राज्यभर में 8,217 चालकों की जांच हुई, जिनमें से 1,268 को मराठी का पर्याप्त ज्ञान न होने पर नोटिस थमाया गया। अगले कुछ दिनों में जांच का दायरा बढ़कर 5,211 चालकों तक पहुंच गया, जिनमें से 777 चालक मराठी के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें भी नोटिस जारी किए गए। इनमें बड़ी संख्या मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के चालकों की है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 19 अगस्त को कहा था कि नोटिस मिलने के बाद चालकों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा, लेकिन तय अवधि बीतने के बाद भी नियम न मानने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सोमवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठी सीखने के लिए दी गई एक महीने की समयसीमा खत्म होने से पहले अगर कोई आरटीओ अधिकारी गलत तरीके से जुर्माना लगाता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले शिवसेना नेता संजय निरुपम ने मंत्री से मुलाकात कर एक महीने का नोटिस दिए बिना चालकों पर 25,000 रुपए तक का जुर्माना लगाने की कार्रवाई रोकने की मांग की थी।
परिवहन विभाग के मुताबिक, राज्यभर में अब तक करीब 9.65 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट व बैज जारी किए जा चुके हैं और यह जांच व्यवस्था इन सभी पर लागू होगी। मुंबई में बड़ी संख्या उन चालकों की है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य हिंदी भाषी राज्यों से आकर वर्षों से यहां ऑटो-टैक्सी चला रहे हैं, लेकिन मराठी में सहज नहीं हैं। हड़ताल पर बैठे कई उम्रदराज चालकों ने कहा कि 55-60 साल की उम्र में, बिना औपचारिक स्कूली शिक्षा के, अचानक नई भाषा सीखना उनके लिए बेहद मुश्किल है और इससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
सरकार का कहना है कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया, बल्कि चालकों को तैयार करने के लिए कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसी संस्थाओं के जरिए पिछले करीब 105 दिनों से मराठी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य करीब 6 लाख प्रवासी चालकों को इस भाषा-प्रशिक्षण से जोड़ना है। मंत्री सरनाईक के मुताबिक अब तक करीब 1.4 लाख से ज्यादा चालक प्रशिक्षण और मराठी दक्षता परीक्षा पूरी कर प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं, जबकि साढ़े सात हजार से अधिक चालक परीक्षा में असफल रहे और हजारों का प्रशिक्षण अभी अधूरा है।
कुछ वाहन चालक संगठनों ने इस नियम के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करने की बात भी कही है। उनका तर्क है कि भाषा की अनिवार्यता से पहले उनकी उम्र, शिक्षा और रोजगार की मौजूदा स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह विवाद महाराष्ट्र की दशकों पुरानी भाषाई अस्मिता की राजनीति से भी जुड़ गया है, जहां मराठी बनाम प्रवासी हिंदी भाषी चालकों का सवाल पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुका है। सरकार का कहना है कि उसका मकसद किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है, जबकि हड़ताली चालकों का कहना है कि इतनी सख्त समयसीमा में भाषा सीख पाना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है।