
सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)
बारिश के मौसम में स्वाइन फ्लू (H1N1) और अन्य इन्फ्लूएंजा वायरस जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वाइन फ्लू की आशंका के चलते एंटीवायरल दवाओं की मांग में तेजी से वृद्धि हुई है।
देशभर में H1N1 और H3N2 जैसे इन्फ्लूएंजा वायरस के मामलों में इस मानसून सीजन में तेजी आई है। स्वाइन फ्लू की खतरे की वजह से दवाओं की मांग बढ़ गई है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में एंटी-इंफेक्टिव दवाओं की बिक्री 2,326 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,469 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.14% की वृद्धि दर्शाती है। विशेष रूप से एंटीवायरल दवाओं की बिक्री में 25.5% की बढ़ोतरी हुई है। जुलाई 2025 में 87 करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई 2026 में 109.2 करोड़ रुपये हो गई।
एंटी-इंफेक्टिव दवाओं के साथ ही पेनकिलर दवाओं की बिक्री में भी 11.37% की वृद्धि हुई, जो 1,633 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में इन्फ्लूएंजा के मामलों में तेजी देखी गई है। दिल्ली में लगभग 3,000 मामलों में से 2,300 से अधिक स्वाइन फ्लू (H1N1) के थे, जबकि कर्नाटक में लगभग 4,000 मामले दर्ज किए गए।
ICMR के लैब नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह रिपोर्ट किए गए श्वसन संक्रमणों में लगभग 70% H1N1 वायरस के कारण थे। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने स्थिति की समीक्षा की और तैयारियों को बढ़ाने के निर्देश दिए। दिल्ली और अन्य राज्यों में स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी तंत्र, दवाओं और परीक्षण सुविधाओं की उपलब्धता की समीक्षा की है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की मीनाक्षी जैन ने बताया कि इस मौसमी उभार में स्वाइन फ्लू एक मुख्य कारण रहा है। जिसकी वजह से कुछ मरीजों में निमोनिया और श्वसन संबंधी जटिलताएं उत्पन्न की हैं। स्पर्श अस्पताल, बेंगलुरु की संजना राय के अनुसार, जिन मरीजों में श्वसन समस्या, निमोनिया, ऑक्सीजन स्तर में कमी या अन्य जटिलताएं होती हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है। अधिकांश मरीजों का इलाज घर पर ही हो रहा है। दिल्ली के CK बिरला अस्पताल के विकास मित्तल ने बताया कि OPD में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अस्पतालों में भर्ती की संख्या सीमित है। लगभग हर 10 में से एक मरीज को ही भर्ती की आवश्यकता पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान फ्लू का प्रसार बढ़ जाता है। स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक परिवहन में भीड़ के कारण वायरस का फैलाव तेज होता है। विशेषज्ञों ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि एंटीवायरल दवाएं मुख्यतः गर्भवती महिलाओं या अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए आवश्यक होती हैं। अन्य मामलों में पैरासिटामोल और सहायक देखभाल पर्याप्त है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारें निगरानी बढ़ा रही हैं। अस्पतालों में बेड और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। ICMR और अन्य संस्थाएं वायरस की निगरानी और परीक्षण क्षमता बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में मौसम और वायरस की प्रवृत्ति के आधार पर और सख्त निर्देश या एडवाइजरी जारी हो सकती है। हालांकि, अस्पतालों में दबाव अभी सीमित है, लेकिन सतर्कता और समय पर इलाज की अहमियत बढ़ गई है। सावधानी, स्वच्छता और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं का उपयोग इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।
Updated on:
25 Aug 2026 08:12 pm
Published on:
25 Aug 2026 08:12 pm
