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फसल की पैदावार बढ़ानी है तो खरपतवार पर रखें नियंत्रण, अपनाएं ये 5 कारगर तरीके

आपके खेतों में खरपतवार फसल की पैदावार को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आपकी आय प्रभावित होती है। जानिए कैसे कुछ स्मार्ट उपायों से आप अपनी फसल को खरपतवार से बचाकर उपज बढ़ा सकते हैं और आर्थिक लाभ भी उठा सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 25, 2026

Weed Management

खरपतवार से फसल को कैसे बचाएं? (फोटोः एआई)

खरपतवार खेतों में फसल की पैदावार और गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। यदि समय पर और सही तरीके से नियंत्रण न किया जाए, तो फसल की उपज में भारी गिरावट आ सकती है। आइए जानते हैं वे प्रभावी उपाय, जिन्हें अपनाकर आप खरपतवार से निजात पा सकते हैं।

पहला उपाय: एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (IWM)

कोई एक तरीका, चाहे रासायनिक हो या यांत्रिक, खरपतवारों को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं कर सकता। इसलिए एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (IWM) अपनाना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है, जिसमें सांस्कृतिक, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक सभी उपाय शामिल होते हैं। यह विधि फसलों को खरपतवारों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।

दूसरा उपाय: सांस्कृतिक विधियां

खेत में फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन), इंटरक्रॉपिंग, मल्चिंग, ग्रीन मैन्यूरिंग और समय पर बुवाई जैसी सांस्कृतिक तकनीकें फसल को खरपतवारों से आगे रखती हैं। ये तरीके फसल की वृद्धि को बढ़ाते हैं और खरपतवारों की संख्या को कम करते हैं। मल्चिंग और मिट्टी की सोलराइजेशन (सूर्य की गर्मी से मिट्टी को गर्म करना) जैसे उपाय विशेष रूप से वार्षिक खरपतवारों को दबाने में सहायक होते हैं।

तीसरा उपाय: यांत्रिक और शारीरिक नियंत्रण

हाथ से निराई-गुड़ाई, जुताई, फ्लडिंग (पानी भरकर खरपतवारों को दबाना) जैसे पारंपरिक तरीके आज भी प्रभावी हैं। ये उपाय विशेष रूप से रोपाई के तुरंत बाद या शुरुआती चरणों में उपयोगी होते हैं। हालांकि, यांत्रिक विधियां श्रम-गहन होती हैं और कठोर मिट्टी या सीमित पानी की स्थिति में चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

चौथा उपाय: सावधानीपूर्वक रासायनिक नियंत्रण

जब खरपतवार बहुत अधिक फैल जाएं, तब रासायनिक नियंत्रण एक विकल्प हो सकता है। हालांकि इसे अकेले नहीं, बल्कि IWM के हिस्से के रूप में ही उपयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, धान में रोपाई के 20–25 दिन बाद, जब खरपतवार 2–4 पत्तियों की अवस्था में हों, तब मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल और क्लोरीम्यूरॉन इथाइल का मिश्रण 8 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव प्रभावी हो सकता है। इसी प्रकार, बिसपाइरीबैक सोडियम 10% एसएल को 250 मिली/हेक्टेयर की दर से 15–25 दिन बाद छिड़कने से मिश्रित खरपतवारों पर नियंत्रण मिलता है।

पांचवां उपाय: IWM से आर्थिक लाभ

ICAR-Directorate of Weed Research, जबलपुर के अध्ययन के अनुसार, भारत में IWM अपनाने से लगभग 125 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त 96.6 मिलियन टन फसल उत्पादन संभव है, जिससे लगभग ₹1.89 ट्रिलियन का आर्थिक लाभ हो सकता है। यह आंकड़ा दिखाता है कि समय पर और सही तरीके से IWM लागू करने से किसान की आमदनी और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों मजबूत हो सकती हैं।

उपाय और लाभ

उपायविवरणलाभ
एकीकृत खरपतवार प्रबंधन (IWM)सांस्कृतिक, यांत्रिक, जैविक, रासायनिक उपायों का संयोजनस्थायी और प्रभावी नियंत्रण
सांस्कृतिक विधियांफसल चक्र, इंटरक्रॉपिंग, मल्चिंग आदिफसल प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है
यांत्रिक नियंत्रणहाथ से निराई, जुताई, फ्लडिंगशुरुआती चरण में प्रभावी, रासायनिक निर्भरता कम
रासायनिक नियंत्रणचयनित समय पर सही मात्रा में छिड़कावजब खरपतवार अधिक हों तब प्रभावी
आर्थिक लाभIWM से उत्पादन और मुनाफा बढ़ता हैकिसानों की आमदनी में सुधार, खाद्य सुरक्षा मजबूत

इन पांच उपायों को अपनाकर किसान खरपतवारों को नियंत्रित कर सकते हैं, साथ ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार ला सकते हैं। वहीं पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम होती है।