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रोहतासगढ़ से शेरगढ़ तक, बिहार के इन किलों के पास लें कैंपिंग का अनुभव

क्या आपने कभी सोचा है कि प्राचीन किलों की दीवारों के साए में टेंट लगाकर रात बिताना कैसा होगा? आइए, जानें कि कैसे आप इतिहास के संग एक रोमांचक अनुभव ले सकते हैं।
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Aug 26, 2026
Bihar Camping
बिहार के किलों का सफर। (फोटोः एआई)

बिहार के प्राचीन किलों में टेंट कैंपिंग का विचार सुनते ही एक रोमांचक, ऐतिहासिक और ऑफबीट अनुभव की कल्पना मन में उभर आती है।यदि आप भी इस तरह की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आइए जानते हैं आपके लिए क्या विकल्प मौजूद हैं और कैसे आप शानदार अनुभव ले सकते हैं।

किले और उनकी मौजूदा स्थिति

बिहार में कई ऐतिहासिक किले हैं, जैसे रोहतासगढ़, शेरगढ़, राजा विशाल का गढ़ और देव किला। रोहतासगढ़ किला एक विशाल किला है, जो लगभग 26 मील के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें कई महल, मंदिर, द्वार और अन्य संरचनाएं हैं। शेरगढ़ किला, जो रोहतास से लगभग 32 किलोमीटर दूर है, जंगलों और घाटियों से घिरा हुआ एक रहस्यमयी स्थल है, लेकिन यह लंबे समय से खंडहर पड़ा है। राजा विशाल का गढ़ वैशाली में स्थित है, जहां एक किलोमीटर चौड़ा मंच और दो मीटर ऊंची दीवारें हैं, यह स्थल प्राचीन लोकतंत्र वज्जि गणराज्य से जुड़ा है। देव किला, देव मंदिर परिसर का हिस्सा है, लेकिन यह संरक्षित नहीं है और ज्यादातर खंडहर है।

क्या इनमें टेंट कैंपिंग संभव है?

सरकारी या पर्यटन विभाग की ओर से इन किलों में टेंट कैंपिंग की कोई सुविधा या आधिकारिक योजना फिलहाल उपलब्ध नहीं है। श्रावणी मेला जैसे धार्मिक आयोजनों में बिहार पर्यटन विभाग ने टेंट सिटी बनाई है, जैसे सुल्तानगंज में 500 बिस्तरों की क्षमता, धौरी/डौरी में 200, वीर में 200, मोरियाडीह रोड पर 250 बिस्तरों की व्यवस्था। हालांकि ये टेंट कैंपिंग नहीं, तीर्थयात्रियों के लिए अस्थायी आवास हैं।

कुछ निजी कैंपिंग ऑपरेटर जैसे “GoCamping” ने रोहतास किले के आसपास के क्षेत्र जैसे काइमूर पठार, जलप्रपात और पठार में कैंपिंग विकल्प सुझाए हैं। ये विकल्प आमतौर पर ₹400–₹1,200 प्रति व्यक्ति प्रति रात के हिसाब से उपलब्ध हैं और अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

अगर आप इन किलों में टेंट कैंपिंग का अनुभव चाहते हैं, तो यह पूरी तरह से निजी प्रयास होगा। इसके लिए कुछ सुझाव हैं:

स्थान और मौसम का चयन

रोहतासगढ़ और शेरगढ़ किले के आसपास का क्षेत्र सितंबर–अप्रैल के बीच सबसे अनुकूल माना जाता है। इस समय मौसम ठंडा और सुखद होता है, जिससे रात में टेंट में रहना आरामदायक हो सकता है।

अनुमति और सुरक्षा

क्योंकि ये स्थल संरक्षित नहीं हैं और कई जगहों पर खंडहर में पड़े हैं, स्थानीय प्रशासन या पर्यटन विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है। साथ ही, सुरक्षा का ध्यान रखें। जंगल, जंगली जानवर, अस्थिर संरचनाएं (Unstable Structures) और रात में अंधेरा जोखिम बढ़ा सकते हैं।

साज-सज्जा और सुविधाएं

स्वयं टेंट, गद्दे, रसोई का साधन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा किट साथ ले जाएं। किले के भीतर बिजली या पानी की सुविधा नहीं होगी, इसलिए पूरी तैयारी जरूरी है।

स्थानीय गाइड और मार्गदर्शन

विशेषकर शेरगढ़ जैसे दूरस्थ और कठिन रास्तों वाले किलों में स्थानीय गाइड की मदद से जाना सुरक्षित और आसान होता है।

विकल्प और तैयारी

पहलूविवरण
उपलब्धतासरकारी टेंट सिटी नहीं, निजी कैंपिंग आसपास संभव
मौसमसितंबर–अप्रैल सबसे अच्छा समय
अनुमतिस्थानीय प्रशासन से अनुमति जरूरी
सुरक्षाजंगल, खंडहर, अंधेरा—सावधानी जरूरी
तैयारीटेंट, पानी, खाना, प्राथमिक चिकित्सा साथ ले जाएं
गाइडस्थानीय गाइड से मार्गदर्शन लाभदायक

बिहार के प्राचीन किलों में टेंट कैंपिंग फिलहाल कोई आधिकारिक सुविधा नहीं है, लेकिन निजी रूप से यह एक रोमांचक और यादगार अनुभव हो सकता है, अगर आप अच्छी तैयारी करें, मौसम का ध्यान रखें, अनुमति लें और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।

स्थानीय संस्कृति और परंपराएं

बिहार के किले स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक हैं। इन स्थलों पर जाकर आप स्थानीय लोगों से उनकी कहानियां और परंपराएं जान सकते हैं, जो आपके अनुभव को और भी समृद्ध बना सकती हैं। स्थानीय हस्तशिल्प और व्यंजन भी इस यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण का ध्यान

कैंपिंग के दौरान पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग और स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान न पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। यह सुनिश्चित करें कि आप अपने पीछे कोई निशान न छोड़ें और प्रकृति की सुंदरता को बनाए रखें।

Updated on:
26 Aug 2026 05:36 pm
Published on:
26 Aug 2026 05:36 pm