
भारत में इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी TRAI के अगस्त 2026 के टेलीकॉम सब्सक्रिप्शन डेटा के मुताबिक, देश में ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या जुलाई के 1,094.48 मिलियन से बढ़कर अगस्त के अंत में 1,101.21 मिलियन हो गई। यानी एक महीने में करीब 6.73 मिलियन नए ब्रॉडबैंड कनेक्शन जुड़े और मासिक वृद्धि दर 0.61 प्रतिशत रही। TRAI ने ये आंकड़े 28 सितंबर को जारी किए।
ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 1.10 अरब के पार पहुंचना भारत में बढ़ती डेटा खपत, मोबाइल इंटरनेट और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के विस्तार की ओर संकेत करता है। टेलीकॉम सेक्टर की रिपोर्टिंग करने वाले TelecomTalk के मुताबिक, अगस्त के अंत में ग्राहकों की संख्या 1,052.58 मिलियन थी। इसमें रिलायंस जियो के करीब 523.22 मिलियन, भारती एयरटेल के 374.96 मिलियन, वोडाफोन आइडिया के 130.87 मिलियन और बीएसएनएल के करीब 23.26 मिलियन ग्राहक थे।
अगस्त में कुल वायरलेस ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी। मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस को मिलाकर वायरलेस सब्सक्राइबर बेस जुलाई के 1,306.27 मिलियन से बढ़कर अगस्त में 1,312.25 मिलियन हो गया। इसकी मासिक वृद्धि दर 0.46 प्रतिशत रही। केवल मोबाइल ग्राहकों की संख्या 1,287.92 मिलियन से बढ़कर 1,293.43 मिलियन पहुंच गई। वायरलेस टेली-डेंसिटी भी 91.33 प्रतिशत से बढ़कर 91.69 प्रतिशत हो गई।
अगस्त में पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर यानी VLR के आधार पर 1,207.59 मिलियन मोबाइल ग्राहक सक्रिय पाए गए। यह कुल मोबाइल ग्राहक आधार का करीब 93.36 प्रतिशत है। एयरटेल का पीक VLR अनुपात 99.01 प्रतिशत और जियो का 98.80 प्रतिशत रहा, जबकि वोडाफोन आइडिया का आंकड़ा 83.84 प्रतिशत और बीएसएनएल का 54.37 प्रतिशत रहा।
अगस्त के दौरान करीब 1.583 करोड़ ग्राहकों द्वारा मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी MNP के लिए आवेदन किए जाने का आंकड़ा भी रिपोर्ट किया गया है। MNP उपभोक्ताओं को अपना मोबाइल नंबर बदले बिना एक टेलीकॉम ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर पर जाने की सुविधा देता है।
फिक्स्ड या वायरलाइन टेलीफोन और ब्रॉडबैंड नेटवर्क में भी सुधार दर्ज हुआ। वायरलाइन ग्राहकों की संख्या जुलाई के अंत में 48.01 मिलियन थी, जो अगस्त में बढ़कर 48.45 मिलियन हो गई। यानी एक महीने में करीब 4.4 लाख ग्राहक जुड़े। मासिक वृद्धि दर 0.93 प्रतिशत रही।वायरलाइन टेली-डेंसिटी 3.36 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत हो गई। हालांकि, शहर और गांव के बीच बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है। अगस्त में शहरी वायरलाइन टेली-डेंसिटी 8.34 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह महज 0.58 प्रतिशत रही।
कुल वायरलाइन ग्राहकों में शहरों की हिस्सेदारी 89.08 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों की 10.92 प्रतिशत रही। यह बताता है कि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड और वायरलाइन ढांचे का ग्रामीण विस्तार अभी बड़ी चुनौती है। ऑपरेटर स्तर पर रिलायंस जियो की वायरलाइन बाजार में हिस्सेदारी करीब 32.98 प्रतिशत और एयरटेल की 25.35 प्रतिशत थी। जियो के करीब 15.98 मिलियन और एयरटेल के 12.28 मिलियन वायरलाइन ग्राहक थे। बीएसएनएल की हिस्सेदारी करीब 13.72 प्रतिशत दर्ज की गई।
भारत में 5G आधारित फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA का विस्तार भी जारी है। अगस्त के अंत तक 5G FWA ग्राहकों की संख्या 13.45 मिलियन हो गई, जो जुलाई में 13.21 मिलियन थी। खास बात यह है कि इसके करीब 51.9 प्रतिशत ग्राहक ग्रामीण क्षेत्रों में थे। इससे उन इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने का नया विकल्प बन रहा है, जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना कठिन या महंगा है।
इसी बीच TRAI ने 25 सितंबर को Digital Connectivity Rating यानी DCR प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके जरिए उपभोक्ता किसी रेटेड घर, ऑफिस या दूसरी प्रॉपर्टी की डिजिटल कनेक्टिविटी स्थिति जांच सकेंगे। प्रॉपर्टी को फाइबर की उपलब्धता, इमारत के भीतर मोबाइल नेटवर्क, इन-बिल्डिंग समाधान और वाई-फाई इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मानकों पर आंका जाएगा।
उपभोक्ता प्रॉपर्टी के नाम, सर्टिफिकेट आईडी या लोकेशन के जरिए उसकी रेटिंग खोज सकेंगे। डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र को QR कोड से सत्यापित करने की सुविधा भी होगी। प्लेटफॉर्म के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी टेस्ट करने के लिए मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराया गया है। TRAI के अनुसार, यह व्यवस्था घर या ऑफिस खरीदने अथवा किराये पर लेने से पहले नेटवर्क गुणवत्ता को भी निर्णय का हिस्सा बनाने में मदद करेगी।
TRAI चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी के अनुसार, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और सत्यापन योग्य रेटिंग से उपभोक्ताओं को मजबूत और भरोसेमंद डिजिटल कनेक्टिविटी वाली प्रॉपर्टी चुनने के लिए तुलनीय जानकारी मिलेगी। Business Standard ने भी रिपोर्ट किया है कि देश में मोबाइल डेटा की लगभग 70-80 प्रतिशत खपत इमारतों के भीतर होती है। ऐसे में इन-बिल्डिंग नेटवर्क की गुणवत्ता तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कुल मिलाकर अगस्त के आंकड़े मोबाइल, ब्रॉडबैंड, वायरलाइन और 5G FWA—चारों स्तरों पर कनेक्टिविटी के विस्तार की तस्वीर दिखाते हैं। हालांकि, वायरलाइन सेवाओं में शहरी-ग्रामीण अंतर यह भी बताता है कि अगले चरण की चुनौती सिर्फ ग्राहकों की संख्या बढ़ाना नहीं है। अब जरूरत गांवों और कम सेवा वाले इलाकों तक उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने की है। ऐसे में आने वाले समय में भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी का अगला बड़ा पैमाना केवल नए ग्राहकों की संख्या नहीं, बल्कि नेटवर्क की गुणवत्ता और उसकी पहुंच भी होगी।