
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रथ यात्रा शुरू की। रायबरेली में विधानसभा की 5 सीटें हैं, जिनमें से हरचंदपुर, बछरावां और सरेनी फिलहाल सपा के पास हैं। सपा की नजर ऊंचाहार सीट पर भी बताई जा रही है।
यात्रा की शुरुआत के लिए कांग्रेस के गढ़ को चुनने को राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। हालांकि, सपा ने इसे कांग्रेस के खिलाफ अभियान के रूप में पेश नहीं किया है और अखिलेश ने गठबंधन को मजबूत बताते हुए साथ चुनाव लड़ने की बात कही है। यात्रा शुरू करते समय उन्होंने कहा कि सीटों का फैसला "जीत की क्षमता" के आधार पर होगा। दूसरी ओर कांग्रेस भी जमीनी हिसाब जुटा रही है। खबरों के अनुसार पार्टी ने संभावित सीटों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर अपनी मजबूत सीटों की पहचान शुरू की है।
2022 का हिसाब: कांग्रेस कमजोर
403 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए। 2022 में भाजपा ने 255 सीटें और 41.29% वोट पाए, जबकि सपा ने 111 सीटें और 32.06% वोट हासिल किए। सहयोगियों को मिलाकर सपा गठबंधन के पास 125 सीटें थीं। इस चुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटें जीत सकी। पार्टी ने 399 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उसका वोट शेयर करीब 2.33% रहा।
2024 का लोकसभा चुनाव में तस्वीर बदली
सपा और कांग्रेस के साथ आने पर 2024 में यूपी की तस्वीर बदल गई। राज्य की 80 लोकसभा सीटों के नतीजे इस तरह रहे:
| दल | सीटें |
|---|---|
| समाजवादी पार्टी | 37 |
| भाजपा | 33 |
| कांग्रेस | 6 |
| रालोद (एनडीए) | 2 |
| अपना दल (एस) (एनडीए) | 1 |
| आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) | 1 |
इस तरह सपा-कांग्रेस के इंडिया गठबंधन को 43 और भाजपा नीत एनडीए को 36 सीटें मिलीं। दोनों गठबंधनों के वोट शेयर में बहुत कम अंतर रहा: इंडिया गठबंधन को 43.52% और एनडीए को 43.69%। अलग-अलग दलों में भाजपा को करीब 41.37%, सपा को करीब 33.5% और कांग्रेस को करीब 9.5% वोट मिले।
2019 की तुलना में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं, सपा की 5 से बढ़कर 37 हो गईं और कांग्रेस की एक से बढ़कर 6 हो गईं। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को 240 और एनडीए को 293 सीटें मिली थीं। सपा ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 जीतीं। कांग्रेस ने 17 सीटों पर लड़कर 6 जीतीं, जिनमें रायबरेली और अमेठी भी शामिल हैं। एक सीट सहयोगी टीएमसी के हिस्से में गई थी।
दोनों दलों के दावे
सपा का तर्क है कि उसका लोकसभा वोट शेयर और सीटों का आधार कहीं बड़ा है। पार्टी के आकलन के अनुसार जिन 62 लोकसभा क्षेत्रों में वह लड़ी, वहां के करीब 310 विधानसभा क्षेत्रों में से 184 में उसे बढ़त मिली। कांग्रेस के लिए 2024 का प्रदर्शन ही दावे का आधार है। उन 17 लोकसभा क्षेत्रों के करीब 85 विधानसभा क्षेत्रों में से 39 में कांग्रेस आगे रही। इस आकलन में दोनों की बढ़त मिलाकर लगभग 223 विधानसभा सीटें बनती हैं।
'लोकसभा फॉर्मूला' भी विकल्प
एक विकल्प लोकसभा वाला अनुपात बनाए रखने का है। 2024 में 80 में से करीब 79% सीटें (टीएमसी वाली सीट समेत) सपा खेमे को और करीब 21% कांग्रेस को लड़ने के लिए मिली थीं। इसे विधानसभा में लागू करने पर 403 में से सपा के हिस्से में 315 से 320 और कांग्रेस के हिस्से में 85 से 90 सीटें आ सकती हैं। अब तक दोनों दलों ने किसी फॉर्मूले पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में रथ यात्रा के रास्ते और दोनों दलों की बातचीत पर सबकी नजर रहेगी।
Updated on:
28 Sept 2026 07:07 pm
Published on:
28 Sept 2026 07:06 pm
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