
देश में घर और बहुमंजिला इमारतें बनाने का तकनीकी ढांचा बदल गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2016 के राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) की जगह राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक 2026 (NBCS, SP 7:2026) जारी किया है। बीआईएस के रिकॉर्ड में यह पुराने एसपी 7:2016 को हटाकर आया है। इसमें इमारत की सामग्री, संरचना, सेवाओं, प्लंबिंग और अग्नि सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं।
भारत के राजपत्र की अधिसूचना के अनुसार यह नया मानक 30 अप्रैल 2026 से लागू है। इसे बीआईएस नियम 2018 के नियम 15(1) के तहत अधिसूचित किया गया। बीआरजी बिल्डिंग सॉल्यूशंस के मुताबिक पुरानी संहिता बिना किसी संक्रमण अवधि के वापस ली गई। यानी अक्टूबर 2026 से लागू होने की बात सही नहीं है। अक्टूबर में बीआईएस ने इसकी जानकारी देने के लिए चंडीगढ़ जैसे शहरों में क्षमता-निर्माण कार्यक्रम किए हैं।
नए मानक में संरचना भी बदली है। अब इसमें परिचय, भवन सामग्री, संरचनात्मक डिजाइन, भवन सेवाएं, प्लंबिंग और अग्नि एवं जीवन सुरक्षा के अलग-अलग भाग हैं। इसमें नई और वैकल्पिक सामग्री, नई लकड़ी प्रजातियों के मानक और संरचनात्मक स्टील व कंपोजिट निर्माण के प्रावधान जोड़े गए हैं।
सुरक्षा के लिहाज से कांच और खिड़कियों पर खास ध्यान है। अग्नि सुरक्षा भाग के अनुसार कांच की पूरी ग्लेजिंग असेंबली को इमारत के निर्माण प्रकार के अनुरूप रेटिंग वाला होना चाहिए और निकास मार्गों के घेरे में कांच के उपयोग की अनुमति नहीं है।
दरवाजों के लिए निर्माता की पहचान, बैच नंबर और निर्माण तिथि जैसी जानकारी वाले प्रमाणित असेंबली की बात कही गई है। सेफ सिक्योर मैगजीन में छपे विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार बिना इंसुलेशन वाले फायर डोर चरणबद्ध तरीके से हटाए जा रहे हैं और निकास के अग्निरोधी दरवाजों में कम से कम 30 मिनट का इंसुलेशन जरूरी माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्नि और जीवन सुरक्षा के नियम अब आवासीय इमारतों पर 24 मीटर या उससे ऊंची इमारतों पर लागू होंगे, जबकि पहले यह सीमा 15 मीटर थी। फ्लेमकाइट के विश्लेषण में भी ऊंची इमारत की परिभाषा किसी भी उपयोग के लिए 24 मीटर बताई गई है। यानी नियम कई मामलों में कड़े हुए हैं तो कुछ मामलों में ढील भी दी गई है। इसलिए सभी नियम 'सख्त' होने का दावा पूरी तरह सही नहीं बैठता।
यह मानक अपने आप में कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसे केंद्र के डिरेगुलेशन प्रकोष्ठ की सिफारिश पर 'कोड' से 'स्टैंडर्ड' किया गया, क्योंकि 'कोड' शब्द से मुकदमेबाजी की गुंजाइश बनती थी।
BIS की अग्नि सुरक्षा समिति के प्रमुख के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि यह मार्गदर्शक ढांचा है। संरचनात्मक व रहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्यों और नगर निकायों की जिम्मेदारी है। इसलिए अलग से केंद्रीय जुर्माने का प्रावधान इसमें नहीं मिलता। पालन भवन उपनियमों और स्थानीय प्राधिकरणों की मंजूरी के जरिये ही कराया जाएगा।
इमारतों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री (कांच, पेंट, प्लास्टिक, स्टील) के अलग-अलग भारतीय मानक भी हैं। मसलन, इस्पात उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश में 2026 में संशोधन हुआ है। पर “30 से ज्यादा बीआईएस श्रेणियों में संशोधन” का दावा मुझे सरकारी दस्तावेजों में पुष्ट नहीं मिला। BIS के अनुसार इसके मानक आमतौर पर स्वैच्छिक हैं, जब तक सरकार किसी उत्पाद के लिए अनिवार्य न करें।