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अटलांटा में क्वाड का बड़ा दांव: कचरे से निकलेंगे दुर्लभ खनिज, AI के लिए 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और तकनीकी सहयोग मजबूत करने के लिए क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण रणनीति बनाई है। रणनीति के तहत क्वाड देश महत्वपूर्ण खनिजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देंगे।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 1 Nov 2026, 6:34 PM IST

Quad countries strategy

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

हिंद-प्रशांत में आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाने की कोशिशों को क्वाड देशों ने रफ्तार दी है। अटलांटा में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिजों, AI, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया। इस साल क्वाड विदेश मंत्रियों की यह तीसरी बैठक थी। इससे पहले मई (नई दिल्ली) और जुलाई में बैठकें हो चुकी हैं।

बैठक में कौन से देश शामिल?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं। बैठक जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई।

कचरे से खनिज, 10 मिलियन डॉलर

अमरीकी विदेश विभाग की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार मई 2026 में घोषित क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क के तहत चारों देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और स्क्रैप से खनिज निकालने पर काम कर रहे हैं, ताकि किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता घटे।

अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में कचरे से खनिज निकालने वाली सुविधाओं के लिए 10 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री की सीमा-पार आवाजाही के नियम सरल बनाने की संभावना भी तलाशी जाएगी।

AI पर 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा की सहायता

चारों देश भरोसेमंद AI तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा रखते हैं। यह सहायता 'क्वाड सुपर इंटेलिजेंस एक्सेलरेटर' समेत अन्य पहलों के जरिए दी जाएगी। क्वाड के बयान में 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द है, जिसकी फुटनोट में ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के रूप में व्याख्या की गई है।

मंत्रियों ने सेमीकंडक्टर और एआइ हार्डवेयर की आपूर्ति शृंखला में 'चोकपॉइंट' पहले से पहचानने की नई पहल का भी ऐलान किया। 5जी, 6जी और ओपन रैन जैसी भरोसेमंद संचार तकनीकों पर सहयोग का फैसला भी हुआ।

निर्यात पाबंदियों पर चिंता

रॉयटर्स के अनुसार, क्वाड देशों की बैठक में शामिल मंत्रियों ने मनमानी निर्यात पाबंदियों और बाजार-विरोधी नीतियों से पैदा होने वाले 'आर्थिक दबाव' पर गहरी चिंता जताई, लेकिन चीन का नाम नहीं लिया।

बयान में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, लाल सागर और बाब अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता और बिना टोल के आवाजाही की बात कही गई। साइबर ठगी के संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की प्रतिबद्धता भी जताई गई।

बंदरगाह, समुद्री अभ्यास और आगे की राह

संयुक्त बयान के मुताबिक क्वाड देश फिजी के सुवा, लौतोका और रोकोबिली बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहे हैं। पहला क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम होगा और क्वाड निर्यात ऋण एजेंसियां 18 नवंबर को टोक्यो में बैठेंगी।

समुद्री निगरानी का पहला अभ्यास 'सी ड्रैगन 2027' में होगा। रॉयटर्स के अनुसार अगले महीने मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली औपचारिक क्वाड नेताओं की बैठक की योजना बन रही है। बयान में भी क्वाड नेताओं के सम्मेलन का इंतजार जताया गया है।

द्विपक्षीय मुलाकातें

जयशंकर इस दौरे में जी-20 की बैठक के किनारे कई देशों के विदेश मंत्रियों से मिले। रुबियो इसी महीने 20 अक्टूबर को मुंबई में जयशंकर से मिल चुके हैं। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक भारत-अमेरिका रिश्तों में खिंचाव के बीच क्वाड की यह बैठक समूह की एकजुटता की परीक्षा भी है, और कई एजेंडे द्विपक्षीय स्तर पर तय हो रहे हैं। जयशंकर अब राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए एंटीगुआ और बारबुडा रवाना होंगे।