
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) की स्थापना को मंजूरी दे दी। दरअसल, देश में सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डे अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाओं में बंटे हैं। केंद्र सरकार अब इन्हें एक राष्ट्रीय ढांचे में जोड़ना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) की स्थापना को मंजूरी दी। यह एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) होगा।
सरकारी बयान के मुताबिक ITLA का काम परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुसंधान, योजना, परियोजना मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मजबूत करना है। यह कदम कई परिवहन मंत्रालयों और एजेंसियों में बिखरी योजना और क्रियान्वयन से पैदा हुई पुरानी चुनौतियों को दूर करने के लिए है। यह राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था के रूप में काम करेगी और नीतिगत सहयोग व डेटा एनालिटिक्स भी देगी। कैबिनेट के फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। यह प्राधिकरण केंद्र और राज्य सरकारों को एक साझा परिवहन योजना ढांचे में जोड़ेगा। उनके अनुसार यह 10, 15 या 30 साल तक के दीर्घकालिक मास्टर प्लान बनाएगा।
राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान
ITLA की प्रमुख जिम्मेदारी एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करना होगी, जिसकी योजना अवधि 10 साल या उससे अधिक होगी। इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स शामिल होंगे। प्राधिकरण विभिन्न मंत्रालयों की अल्पकालिक क्षेत्रीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं की भी समीक्षा करेगा। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ये दीर्घकालिक राष्ट्रीय रणनीति से मेल खाएं। एक रिपोर्ट के अनुसार अल्पकालिक योजनाएं करीब 5 साल की होती हैं।
परियोजनाओं पर निगरानी
आधिकारिक विवरण के अनुसार ITLA केंद्र सरकार की ₹500 करोड़ या उससे अधिक अनुमानित लागत वाली परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगी। ऐसी परियोजनाओं का वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा तंत्र से ही होता रहेगा। प्राधिकरण ₹500 करोड़ से ऊपर की परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी करेगा। परियोजना के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए वह एक समन्वित मंच देगा। इसके अलावा वह लागू होने के बाद परियोजनाओं के नतीजों और असर का भी आकलन करेगा।
गति शक्ति से रिश्ता
विभागों की दीवारें तोड़ने की कोशिश नई नहीं है। अक्टूबर 2021 में कैबिनेट ने पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान को मंजूरी दी थी। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसका उद्देश्य विभागीय अलगाव खत्म कर परियोजनाओं की समग्र और एकीकृत योजना बनाना बताया था।
इसे ₹100 लाख करोड़ की मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी योजना के रूप में 13 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था। उसकी निगरानी के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त सचिव समूह (EGoS) बना। गति शक्ति GIS-आधारित मंच है जो केंद्र और राज्यों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को जोड़ता है। ITLA का फोकस इससे ऊपर के स्तर पर राष्ट्रीय परिवहन योजना, मूल्यांकन और निगरानी पर है।