
केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को 10,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिबद्धता के साथ SME ग्रोथ फंड (SGF) की स्थापना को मंजूरी दे दी। अब इसकी जानकारी सामने आई है। सरकार की इस पहल का मकसद छोटे और मझोले उद्यमों को दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कारोबार बनाना है। यह घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 का हिस्सा थी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था।
सरकार SGF ढांचे के तहत बनने वाले एक वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) में कुल 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता देगी। यह कोष संभावनाओं वाले एसएमई में सीधे इक्विटी निवेश करेगा, जिनका कारोबारी मॉडल स्थापित हो और जिनमें आगे बढ़ने की क्षमता हो। सरकार इसे "पेशेंट ग्रोथ इक्विटी कैपिटल" बता रही है। बजट के बाद आई रिपोर्टों में कहा गया था कि फंड का संचालन पेशेवर फंड मैनेजर करेंगे और शासन के ऊंचे मानकों वाले उद्यमों पर ध्यान रहेगा।
सरकार का कहना है कि मौजूदा इक्विटी फंड मुख्य रूप से शुरुआती चरण के उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमों पर केंद्रित हैं, जिससे छोटे और मझोले उद्यमों के लिए ग्रोथ-स्टेज पूंजी की कमी बनी रही है। एसजीएफ इसी अंतर को भरने के लिए है। आवंटन का बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित एसएमई को जाएगा, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों पर भी विचार होगा। पूंजी का उपयोग क्षमता विस्तार, तकनीक में निवेश, अंतरराष्ट्रीय विस्तार, वैश्विक वैल्यू चेन में प्रवेश और अधिग्रहण जैसे रणनीतिक निवेशों में किया जा सकेगा।
सरकार के अनुसार यह MSME के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और पेशेवर सहयोग देने वाले व्यापक उपायों का हिस्सा है। मडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त मंत्री ने इसका तीन-सूत्री दृष्टिकोण रखा था- इक्विटी सहयोग, ट्रेड्स के जरिए तरलता सहयोग और अनुपालन में पेशेवर मदद। इसी के साथ सूक्ष्म उद्यमों के लिए सेल्फ-रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड में 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान भी घोषित हुआ था।
उद्योग संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है। PHDCCI के महासचिव रणजीत मेहता ने इसे बड़ा कदम बताया और कहा कि इससे छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या, यानी आसान फंडिंग तक पहुंच, का समाधान होगा। उनके मुताबिक सरकार की इक्विटी भागीदारी से निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) के उपाध्यक्ष के. सतीश नागराज ने कहा कि यह बहुत अच्छा कदम है। यह टियर-2 व टियर-3 शहरों पर फोकस खास तौर पर अहम है, क्योंकि निजी बैंक अक्सर वहां नहीं पहुंचते हैं।