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घर खरीदते समय कौन से दस्तावेज मांगना जरूरी? जानिए जरूरी बातें और सावधानियां

क्या आप जानते हैं कि एक गलत दस्तावेज आपके सपनों का घर छीन सकता है? घर खरीदने से पहले कुछ नियम-कानून और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में जानना जरूरी है। दस्तावेजों की पूरी जांच आपको कानूनी सुरक्षा, वित्तीय स्पष्टता और मानसिक शांति देती है।
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Updated: 23 Oct 2026, 8:00 PM IST
Necessary documents for home
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

घर खरीदना जीवन का एक बड़ा और भावनात्मक निवेश होता है, लेकिन इसके साथ ही कानूनी और वित्तीय जोखिम भी जुड़े होते हैं। इसलिए बिल्डर से घर खरीदने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच, यानी 'लीगल ड्यू डिलिजेंस' करना बेहद आवश्यक है। सही दस्तावेजों की पहचान और जांच से आप भविष्य में विवाद, वित्तीय बोझ और धोखाधड़ी से बच सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि बिल्डर से कौन-कौन से दस्तावेज मांगने चाहिए, उन्हें क्यों देखना जरूरी है, और इस प्रक्रिया से जुड़े नियम क्या हैं?

संपत्ति का स्वामित्व और कानूनी स्थिति

घर खरीदने से सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि बिल्डर या विक्रेता ही संपत्ति का वास्तविक और वैध मालिक है। इसके लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज देख सकते हैं-

सेल डीड (Sale Deed) या टाइटल डीड : यह दस्तावेज बताता है कि संपत्ति किससे किसे हस्तांतरित हुई है। पिछले 20-30 वर्षों की ओनरशिप चेन की जांच करें, ताकि कोई कानूनी बाधा या गड़बड़ी न हो।

मदर डीड (Mother Deed) : यह संपत्ति के इतिहास को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि ट्रांसफर कानूनी रूप से हुआ है।

एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate) : यह बताता है कि संपत्ति पर कोई बंधक, ऋण या कानूनी दावा तो नहीं है। आमतौर पर पिछले 30 वर्षों के लिए जांच करना सुरक्षित माना जाता है।

सरकारी स्वीकृति और नियामक दस्तावेज

यदि आप नया फ्लैट या निर्माणाधीन प्रोजेक्ट खरीद रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच अवश्य करें-


RERA रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट : यह सुनिश्चित करता है कि प्रोजेक्ट रियल एस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम 2016 के तहत पंजीकृत है और कानूनी रूप से बेचा जा सकता है।

स्वीकृत भवन योजना और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (Commencement Certificate) : यह दर्शाता है कि निर्माण स्थानीय प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत योजना के अनुसार शुरू हुआ है।

कंप्लीशन (Completion) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) : CC, यह प्रमाणित करता है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार पूरा हुआ है। वहीं, OC बताता है कि भवन कानूनी रूप से रहने योग्य है।

कर, राजस्व और उपयोगिता रिकॉर्ड

प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें : पिछले कुछ वर्षों की टैक्स रसीदें, यह सुनिश्चित करती हैं कि कोई बकाया नहीं है।

म्यूटेशन रिकॉर्ड (Mutation/Khata/Patta) : यह सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करता है, जिससे आगे की बिक्री या कर भुगतान में आसानी होती है।

उपयोगिता बिल (बिजली, पानी) : यह पुष्टि करता है कि संपत्ति पहले से उपयोग में है और बिल विक्रेता के नाम पर हैं।

अन्य कानूनी और वित्तीय दस्तावेज

अलॉटमेंट लेटर और पोजेशन लेटर : यह बिल्डर द्वारा फ्लैट आवंटित होने और कब्जा मिलने की पुष्टि करता है।

NOC (बैंक, फायर, बिजली आदि) : यदि संपत्ति पर पहले से बैंक लोन था, तो बैंक से NOC और लोन चुकाने का प्रमाण आवश्यक है। साथ ही, अग्नि सुरक्षा, बिजली, पानी आदि के लिए स्थानीय एनओसी भी देखें।

मुकदमेबाजी या कानूनी विवाद की जांच : जिला या उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में संपत्ति या विक्रेता के खिलाफ कोई मामला तो नहीं है, यह जांचना महत्वपूर्ण है।

पावर ऑफ अटॉर्नी (यदि लागू हो) : यदि विक्रेता POA के माध्यम से बेच रहा है तो यह पंजीकृत, विशिष्ट और वैध होना चाहिए।

Updated on:
23 Oct 2026, 8:00 PM IST
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