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जवान और एक्टिव होने के बावजूद घुटनों में होता है दर्द? जानिए समस्या के कारण और विशेषज्ञों की सलाह

आज के दौर में बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों के बीच सेहत पर नजर रखना बेहद जरूरी है। युवा और एक्टिव लोगों को भी पैदल चलने के दौरान घुटनों में दर्द की समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Updated: 24 Oct 2026, 5:23 PM IST

young people knee pain

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

आज के दौर में बदलती जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों के बीच सेहत पर नजर रखना बेहद जरूरी है। युवा और एक्टिव लोगों को भी पैदल चलने के दौरान घुटनों में दर्द की समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। त्योहारी सीजन में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में लोग बहुत ज्यादा पैदल चलते हैं और घंटों तक अपने पैरों पर खड़े रहते हैं। ऐसे में पैरों में हल्का दर्द या थकान होना आम बात है। लेकिन युवा और एक्टिव लोगों को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कम उम्र और एक्टिव होने के बावजूद घुटनों में दर्द क्यों होता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि पंडालों में घूमने के बाद घुटने में दर्द होने का एक आम कारण 'अत्यधिक इस्तेमाल' (ओवरयूज) है। अचानक बहुत ज्यादा पैदल चलने से घुटने के आस-पास की मांसपेशियों, टेंडन और अन्य हिस्सों पर खिंचाव आ सकता है। जो लोग हफ्तों के ज्यादातर दिन डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान अचानक बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, उन्हें यह समस्या होने का खतरा ज्यादा होता है। जांघ की कमजोर मांसपेशियां, शारीरिक तैयारी की कमी और गलत जूते पहनने से भी जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव बढ़ सकता है।

संभावित कारण 'पैटेलोफेमोरल पेन सिंड्रोम'

घुटनों में दर्द का संभावित कारण 'पैटेलोफेमोरल पेन सिंड्रोम' है, जिसमें आमतौर पर घुटने की चक्की (नी-कैप) के आसपास या पीछे दर्द होता है। यह अक्सर उन युवाओं को प्रभावित करता है जो शारीरिक रूप से काफी एक्टिव रहते हैं। सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय, उकड़ू बैठने पर, या घुटनों को मोड़कर लंबे समय तक बैठे रहने पर यह दर्द बढ़ सकता है। बार-बार पड़ने वाले दबाव से जोड़ में जलन या बेचैनी हो सकती है, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है।

घुटनों में दर्द के अन्य कारण

घुटने में दर्द टेंडन में सूजन, मेनिस्कस की चोट या लिगामेंट में मोच जैसी समस्याओं के कारण हो सकता है। अचानक मुड़ने, पैर गलत तरीके से रखने या मामूली रूप से गिर जाने (जैसे कि किसी भीड़-भाड़ वाले पंडाल में) से भी चोट लग सकती है। जिन लोगों को पहले से घुटने की समस्या रही है, उनमें लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि करने के बाद दर्द फिर से उभर सकता है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस आम हो जाती है, लेकिन युवाओं में लगातार होने वाले घुटने के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके असली कारण का सही पता लगाना बहुत जरूरी है।

डॉक्टरों का कहना है कि अपने शरीर के संकेतों को समझना और यह स्वीकार करना कि आपको आराम की जरूरत है, बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है।

शारीरिक थकान को नजरअंदाज करने से दर्द और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसके अलावा। ऐसी गतिविधियों को कम करें जिनसे दर्द बढ़ता हो।

दर्द से राहत पाने के उपाय

  • 15–20 मिनट तक 'कोल्ड पैक' (तौलिए में लपेटकर) से सिकाई करें।
  • आराम करते समय अपने पैर को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें। इससे लक्षणों से राहत मिल सकती है।
  • एक बार जब दर्द कम हो जाए, तो अचानक लंबी सैर पर जाने के बजाय धीरे-धीरे अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस आना बेहतर है।
  • आरामदायक और अच्छा सपोर्ट देने वाले जूते पहनें। साथ ही, अपनी जांघ की मांसपेशियों (क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग) और कूल्हे की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम करें। इससे घुटने की स्थिरता बेहतर हो सकती है।
  • तेज दर्द होने पर जोर-शोर वाली गतिविधियां न करें, और डॉक्टर की सलाह के बिना बार-बार दर्द निवारक दवाएं (पेनकिलर्स) न लें।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • सूजन, तेज दर्द, वजन उठाने में कठिनाई, घुटने का लॉक हो जाना या अटक जाना और घुटने में कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • अगर परेशानी बनी रहती है, बार-बार होती है, या रोजमर्रा के कामों में रुकावट डालती है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

सही इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द का असली कारण क्या है। इसमें फिजियोथेरेपी, शारीरिक गतिविधियों में बदलाव, दवाइयां (अगर जरूरत हो), या कुछ मामलों में, आगे की जांच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) शामिल हो सकते हैं।

नी रिप्लेसमेंट आखिरी उपाय

जवान और एक्टिव लोगों के लिए, नी रिप्लेसमेंट पहला विकल्प नहीं, बल्कि आखिरी उपाय माना जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में, मुख्य लक्ष्य मरीज के प्राकृतिक घुटने के जोड़ को यथासंभव लंबे समय तक बचाए रखना होता है।

जिन लोगों को सर्जरी की आवश्यकता होती है, उनके लिए 'रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट' एक फायदेमंद तरीका हो सकता है। इसकी मदद से सर्जन, मरीज के जोड़ की विशेष शारीरिक बनावट को ध्यान में रखते हुए, बहुत सटीकता से यह तय कर सकते हैं कि हड्डी को कहां से काटना है और इम्प्लांट को कहां लगाना है।

हालांकि, यह तकनीक सर्जरी से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह खत्म नहीं करती है, और न ही किसी निश्चित परिणाम की गारंटी देती है। सर्जरी करानी है या नहीं, यह मरीज की स्थिति, लक्षणों और शारीरिक उपयुक्तता पर निर्भर करता है।

डॉक्टर्स की राय

त्योहारों का आनंद लेते समय आपको अपने जोड़ों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करना, पैदल चलते समय एक स्थिर गति बनाए रखना और लगातार होने वाले दर्द पर तुरंत ध्यान देना।

ये कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप अपने घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना त्योहारों (जैसे पंडालों में जाना) का मजा ले सकते हैं। एक थका देने वाले दिन के बाद घुटनों में थोड़ी परेशानी होना आम बात है, लेकिन अगर दर्द बना रहता है या बहुत तेज होता है, तो इसे त्योहारों का एक सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बल्कि, इसे एक गंभीर मेडिकल स्थिति माना जाना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)