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किताबों पर गंभीर संकट; AI को ट्रेंड करने के लिए किताबों को नष्ट कर रही कंपनियां, जानें कैसे चलता है ये खेल

तेजी से बढ़ते AI के इस्तेमाल से किताबों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। कई कंपनियां AI मॉडल्स को ट्रेंड करने के लिए किताबों को नष्ट कर रही हैं। आइए जानते हैं कि किस प्रकार AI मॉडल्स को ट्रेंड करने के लिए किताबों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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Aug 25, 2026
AI models
सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

तेजी से बढ़ते AI के इस्तेमाल से किताबों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। कई कंपनियां AI मॉडल्स को ट्रेंड करने के लिए किताबों को नष्ट कर रही हैं। आइए जानते हैं कि किस प्रकार AI मॉडल्स को ट्रेंड करने के लिए किताबों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल्स को और ज्यादा बुद्धिमान और सटीक बनाने की अंधी दौड़ में टेक कंपनियों ने एक ऐसा रास्ता अपना लिया है।

AI कंपनियों के इस निर्णय ने दुनिया भर के इतिहासकारों, लेखकों और शोधकर्ताओं को स्तब्ध कर दिया है। टेक दिग्गजों ने AI डेटा ट्रेनिंग के लिए दुर्लभ और दुर्लभतम किताबों को भारी मात्रा में खरीदना, उनकी जिल्द काटकर उन्हें स्कैन करना और फिर नष्ट करना शुरू कर दिया है। अमेरिका के एक मीडिया आउटलेट '404 मीडिया' की एक हालिया खोजी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। आशंका है कि एआइ कंपनियां दुनिया की हर छपी किताब को स्कैन करने के लिए हर ISBN कोड को ट्रैक कर रही हैं।

ट्रैकर ने खोली अमेजन की पोल

जब एक दुर्लभ किताबों के विक्रेता को लगभग 1,000 अस्पष्ट किताबों के गुमनाम बड़े ऑर्डर पर शक हुआ, तो उसने 404 मीडिया के सहयोग से एक किताब में एप्पल एयरटैग छिपाकर भेज दिया। रिपोर्टर इमैनुएल माइबर्ग ने ट्रैकर की यात्रा को पूरे अमेरिका में ट्रैक किया, जो अंततः लास वेगास स्थित अमेजन के एक गोदाम में जाकर रुका, जहां कर्मचारियों के मुताबिक उनका काम छपी किताबों की जिल्द निकालकर पन्नों को स्कैन करना है। इसके बाद असली किताब नष्ट हो जाती है।

यह ऑर्डर बिब्लियो नाम के एक दुर्लभ व पुरानी किताबों के मार्केटप्लेस के जरिए दिया गया था, जो खरीदारों की पहचान गुमनाम रखता है। जिस गोदाम में किताबों को नष्ट करने का पूरा खेल चल रहा था, उसका नाम 'LAS8' बताया गया। गोदाम के अंदर किताब-स्कैनिंग करने वाली यूनिट को VGT3 कहा जाता है, जिसके प्रवेश द्वार पर एक टायरानोसॉरस रेक्स का लोगो लगा है। इस पर अमेजन ने 404 मीडिया को दिए बयान में कहा कि वह ग्राहकों के इस्तेमाल के प्रोडक्ट्स व सर्विसेज को बेहतर बनाने के लिए कमर्शियल चैनलों से किताबें खरीदती है। हालांकि, कंपनी ने किसी खास AI मॉडल का नाम नहीं लिया।

क्यों जरूरी हैं पुरानी किताबें?

इंटरनेट पर मौजूद ब्लॉग्स और सोशल मीडिया पोस्ट जैसा इंसानी लिखा डेटा अब सीमित होता जा रहा है, जबकि एआइ को उसी के जनरेट डेटा पर ट्रेन करने से 'मॉडल कोलैप्स' यानी आउटपुट की गुणवत्ता गिरने का खतरा रहता है। 2022 से पहले छपा टेक्स्ट फिलहाल AI की दुनिया में सबसे दुर्लभ प्रशिक्षण संसाधन है, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा कभी डिजिटल नहीं हुआ और इंटरनेट स्क्रैपिंग से बच गया। इसके साथ ही 2022 से पहले छपी किसी भी किताब में AI-जनरेटेड टेक्स्ट होने की गुंजाइश नहीं है। यही वजह है कि कंपनियां पुरानी, दुर्लभ और ऑफलाइन किताबों की ओर भाग रही हैं।

एंथ्रोपिक का 'प्रोजेक्ट पनामा'

यह मामला सबसे पहले AI कंपनी एंथ्रोपिक (क्लॉड चैटबॉट की निर्माता) के खिलाफ चले मुकदमे 'बार्ट्ज बनाम एंथ्रोपिक' में सामने आया था। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, एंथ्रोपिक ने 'प्रोजेक्ट पनामा' नाम से एक गुप्त अभियान चलाया था। जिसमें कानूनी रूप से खरीदी गई लाखों किताबों की बाइंडिंग काटकर उन्हें स्कैन कर नष्ट किया गया, जबकि इससे पहले सह-संस्थापक बेन मान ने 2021 में लिबजेन और बुक्स3 जैसे- पायरेटेड स्रोतों से लाखों किताबें डाउनलोड की थीं। कोर्ट ने कुल मिलाकर 70 लाख से ज्यादा किताबों की पायरेसी की पुष्टि की। इस परियोजना का नेतृत्व गूगल बुक्स में काम कर चुके टॉम टर्वी ने किया था। अदालती आदेश के मुताबिक मकसद 'दुनिया की सभी किताबों' की एक केंद्रीय लाइब्रेरी 'हमेशा के लिए' बनाना था।

जून 2025 में न्यायाधीश विलियम अल्सप ने फैसला सुनाया कि कानूनी रूप से खरीदी गई छपी किताबों को डिजिटाइज कर एआइ मॉडल प्रशिक्षण में इस्तेमाल करना 'फेयर यूज़' के दायरे में आता है, क्योंकि इस प्रक्रिया में छपी प्रति की जगह डिजिटल संस्करण ने ली, न कि नई प्रतियां बनाई गईं या वितरित की गईं। लेकिन पायरेसी वाले हिस्से पर कंपनी को राहत नहीं मिली, और पिछले महीने एंथ्रोपिक ने करीब 5 लाख कृतियों को कवर करते हुए इस मामले को निपटाने के लिए 1.5 अरब डॉलर (करीब 1.3 अरब यूरो) का भुगतान करने पर सहमति जताई, जिसे लेखकों के वकील जस्टिन नेल्सन ने 'इतिहास की सबसे बड़ी कॉपीराइट वसूली' बताया।

सिर्फ एंथ्रोपिक और अमेजन तक सीमित नहीं

यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता। मेटा, OpenAI, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी लेखकों की ओर से इसी तरह की पायरेसी संबंधी कॉपीराइट मुकदमों का सामना कर रहे हैं। एंथ्रोपिक का मामला ऐसे निपटे पहले बड़े मामलों में से एक है। इससे स्पष्ट होता है कि यह किसी एक कंपनी की नीति नहीं, बल्कि पूरे एआइ उद्योग का चलन बनता जा रहा है।

इतिहास और संस्कृति पर मंडराता खतरा

विशेषज्ञ इसे केवल कॉपीराइट उल्लंघन नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत पर हमला मानते हैं। पुस्तक-विक्रेताओं ने चिंता जताई है कि सीमित प्रतियों वाले असामान्य संस्करण प्रचलन से बाहर होते जा रहे हैं। कुछ लोगों ने इस बड़े पैमाने पर हो रही खरीद, डिजिटाइजेशन व विनाश की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास '1984' से की है, जिसमें सरकार ऐतिहासिक अभिलेखों को व्यवस्थित रूप से मिटाती और फिर से लिखती है।

ऐसे चलता है विनाश का चक्र

  1. बेतुकी थोक खरीदारी: बिना किसी एक विषय के सैकड़ों दुर्लभ और पुरानी किताबों के बेतुके व गुमनाम ऑर्डर देना।
  2. क्रूर स्कैनिंग प्रक्रिया: पन्नों को तेजी से स्कैन करने के लिए किताबों की बाइंडिंग-जिल्द काटकर अलग कर देना।
  3. डेटा एक्सट्रैक्शन: 'मॉडल कोलैप्स' की समस्या से बचने के लिए किताबों से इंसान रचित शुद्ध डेटा निकालना।
  4. विनाश: स्कैनिंग पूरी होने के बाद पन्नों और किताबों की वापस जिल्द बांधकर रखने के बजाय नष्ट कर देना।

ज्ञान की अनमोल विरासत पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं, बल्कि इंसानी इतिहास व संस्कृति पर हमला है। 'दुर्लभ किताब' का मतलब केवल प्रथम संस्करण जैसी चर्चित पुस्तकें नहीं हैं, बल्कि इसमें विषय-विशेष पुस्तकें भी हैं, जिनकी बहुत कम प्रतियां छपी थीं। पुरानी लोकल गाइड्स, दुर्लभ मैनुअल भी इनमें शामिल हैं। एआइ कंपनियों को इन पुस्तकों के ऐतिहासिक या बौद्धिक मूल्य से कोई सरोकार नहीं है, वे सिर्फ डेटा और शब्दों के संग्रह के लिए इन्हें नष्ट कर रही हैं।

Updated on:
25 Aug 2026 09:52 pm
Published on:
25 Aug 2026 09:52 pm