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क्रिटिकल मिनरल्स की दौड़, विकास की जरूरत या पर्यावरण के लिए नया खतरा?

Critical Minerals in India : भारत क्लीन एनर्जी और EV क्रांति को गति देने के लिए 4 क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बना रहा है। जानिए आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए यह कदम क्यों जरूरी है और इसके पर्यावरणीय जोखिम क्या हैं।
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Aug 21, 2026
Critical Minerals in India
Critical Minerals in India : क्या मिनरल निकालने पर हो रहा पर्यावरण को नुकसान, PC- Chatgpt

भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। लेकिन इस बदलाव की नींव कुछ खास खनिजों पर टिकी है जिन्हें क्रिटिकल मिनरल्स कहा जाता है। इनमें लिथियम (Lithium), निकेल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt), ग्रेफाइट (Graphite) और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) शामिल हैं।

यही वजह है कि केंद्र सरकार देश में चार नए क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। लक्ष्य सिर्फ खनिज निकालना नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की घरेलू क्षमता बढ़ाना भी है।

आखिर क्रिटिकल मिनरल्स होते क्या हैं?

क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं जो आधुनिक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति सीमित देशों पर निर्भर है।

खनिजमुख्य उपयोग
लिथियमEV बैटरी
निकेलबैटरी और स्टेनलेस स्टील
कोबाल्टहाई-परफॉर्मेंस बैटरी
ग्रेफाइटबैटरी एनोड
रेयर अर्थ एलिमेंट्सइलेक्ट्रिक मोटर, विंड टर्बाइन, रक्षा उपकरण

आज भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे आपूर्ति और कीमत दोनों का जोखिम बना रहता है।

सरकार 4 प्रोसेसिंग पार्क क्यों बना रही है?

भारत में कई खनिजों के भंडार मौजूद हैं, लेकिन बड़ी चुनौती प्रोसेसिंग क्षमता की है। खनिज निकालने के बाद उन्हें बैटरी-ग्रेड या इंडस्ट्रियल-ग्रेड सामग्री में बदलने के लिए विशेष रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग सुविधाएं चाहिए।

सरकार के प्रस्तावित प्रोसेसिंग पार्कों के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:

  • आयात पर निर्भरता कम करना
  • EV और बैटरी उद्योग को कच्चा माल उपलब्ध कराना
  • चीन पर वैश्विक निर्भरता का विकल्प बनाना
  • घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना
  • निवेश और रोजगार पैदा करना

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा उपकरण उतने ही महत्वपूर्ण होंगे जितना कभी तेल और गैस थे।

EV और सोलर सेक्टर को क्या फायदा होगा?

बैटरी की लागत घट सकती है : आज EV की कीमत में बैटरी का हिस्सा 30-40% तक होता है। यदि भारत में प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन विकसित होती है तो लागत कम हो सकती है।

सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित होगी : वैश्विक संकट, युद्ध या निर्यात प्रतिबंध की स्थिति में भी घरेलू उद्योग को कच्चा माल मिल सकेगा।

सौर ऊर्जा विस्तार को गति : रेयर अर्थ और अन्य खनिज सौर ऊर्जा उपकरणों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और ग्रिड टेक्नोलॉजी में उपयोग होते हैं।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा : बैटरी सेल, इलेक्ट्रिक मोटर, ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में निवेश बढ़ सकता है।

लेकिन पर्यावरणीय जोखिम भी कम नहीं : क्रिटिकल मिनरल्स को "ग्रीन ट्रांजिशन" का आधार माना जाता है, लेकिन उनका खनन खुद पर्यावरण पर दबाव डाल सकता है।

जल संसाधनों पर असर : लिथियम और अन्य खनिजों की प्रोसेसिंग में भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इससे स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है।

जंगल और जैव विविधता को नुकसान : कई खनिज भंडार वन क्षेत्रों या पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों में पाए जाते हैं। खनन से वन कटान और वन्यजीवों पर असर पड़ सकता है।

रासायनिक प्रदूषण : खनिज प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले रसायन और अपशिष्ट मिट्टी तथा जल प्रदूषण का कारण बन सकते हैं।

स्थानीय समुदायों पर प्रभाव : खनन परियोजनाओं के कारण भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और आजीविका से जुड़े विवाद भी सामने आ सकते हैं।

विकास बनाम पर्यावरण, संतुलन कैसे बने? : विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को 'खनन या पर्यावरण' की बहस से आगे बढ़कर 'जिम्मेदार खनन' (Responsible Mining) मॉडल अपनाना होगा। इसके लिए यह कदम जरूरी होंगे।

  • कड़े पर्यावरणीय आकलन
  • जल उपयोग की निगरानी
  • खनन के बाद भूमि पुनर्वास
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी
  • रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा
Updated on:
21 Aug 2026 04:15 pm
Published on:
21 Aug 2026 04:15 pm