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वैश्विक हलचल के बीच मास्टरस्ट्रोक: रूस के फाइटर जेट से लेकर चीन से उड़ानों तक, ब्रिक्स में भारत का बड़ा एजेंडा

राजधानी दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन होगा। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक हलचल के बीच भारत बड़ा मास्टरस्ट्रोक कर सकता है। शिखर सम्मेलन में भारत आर्थिक रणनीति, कूटनीतिक संतुलन और व्यापार को लेकर प्रस्ताव पेश कर सकता है।
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Sep 10, 2026
India proposal in BRICS summit
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। राजधानी दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन में इस बार भारत का मुख्य मुद्दा राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा सीमा-पार कारोबार और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने पर रहेगा। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और टैरिफ को लेकर अमेरिका से आई तल्खी के बीच भारत की कोशिश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, डिजिटल भुगतान, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और आपूर्ति शृंखला का ऐसा तंत्र विकसित करने की है, जिसमें उसकी अहम भूमिका हो। इससे न केवल आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि डॉलर पर निर्भरता घटाने का रास्ता भी खुलेगा।

रूस, चीन और ईरान तक कई मुद्दों पर भारत की तैयारी

भारत सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इसी के तहत चीन से सीधी उड़ानों और व्यापार विस्तार, रूस से SU-57 लड़ाकू विमान और रक्षा सहयोग, खाड़ी देशों से ऊर्जा व स्थानीय मुद्रा में भुगतान तथा ईरान से चाबहार बंदरगाह और व्यापार गलियारे जैसे मुद्दों पर अलग-अलग बातचीत की तैयारी है। भारत ने ब्रिक्स व अन्य साझेदार देशों के साथ प्राथमिकता के अनुसार द्विपक्षीय एजेंडा तैयार किया है।

चीन से सीधी उड़ान और व्यापार विस्तार

वर्ष 2020 के सीमा संघर्ष के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी। प्रत्यक्ष उड़ान और सीमा-पार व्यापार फिर शुरू हो चुके हैं। अब उड़ानों को 2020 से पहले के स्तर तक बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार पिछले वर्ष करीब 155 अरब डॉलर था। लेकिन भुगतान व्यवस्था में सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को लेकर भारत सतर्क है। अलीपे-प्लस को यूपीआइ से जोडऩे का प्रस्ताव भी इसी कारण अटका हुआ है।

रूस से सुखोई फाइटर जेट, तेल और रक्षा सहयोग

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भारत की बातचीत में सुखाई एसयू-57 फाइटर जेट की खरीद, तेल, ऊर्जा, रक्षा, भुगतान व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। रूस से तेल का मुद्दा भी अमरीका की टेढ़ी नजर के चलते जटिल हो गया है। इसलिए भारत सोच-समझकर कदम उठा रहा है। वहीं सीमापार भुगतान मुद्रा में रूस कदम आगे बढ़ा सकता है।

ब्राजील से कृषि और खाद्य सुरक्षा सहयोग

ब्राजील के साथ भारत का जोर कृषि तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, जैव ईंधन, उर्वरक और जलवायु-अनुकूल खेती पर रहेगा। ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया के करीब एक-तिहाई खाद्य उत्पादन से जुड़े हैं। इसलिए कृषि आपूर्ति शृंखला और खाद्य सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

UAE से रुपया-दिरहम और निवेश

संयुक्त अरब अमीरात भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर आसानी है। ब्रिक्स के मंच पर भारत इसे दूसरे देशों तक बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

सऊदी अरब से तेल, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा

सऊदी अरब के साथ बातचीत का केंद्र कच्चा तेल, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और पेट्रो-रसायन रहेगा। इसमें भारत के लिए प्राथमिकता में यह मुद्दे होंगे।

ईरान से चाबहार से व्यापार गलियारे तक

ईरान से बातचीत में भारत के लिए चाबहार बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, मध्य एशिया और रूस तक व्यापार संपर्क, ऊर्जा और स्थानीय मुद्रा में व्यापार अहम होंगे।

इंडोनेशिया से समुद्री व्यापार और खनिज सहयोग

इंडोनेशिया के साथ रुपया-रुपियाह में व्यापार, कोयला, ऊर्जा, पाम तेल, डिजिटल भुगतान, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत सहयोग पर जोर दिया जा सकता है।

मिस्र, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका से सहयोग

मिस्र के साथ स्वेज नहर, समुद्री व्यापार, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक और अफ्रीकी बाजार अहम होंगे। इथियोपिया के साथ कृषि, दवा, स्वास्थ्य, डिजिटल ढांचा, शिक्षा और कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने की तैयारी है। दक्षिण अफ्रीका के साथ संयुक्त राष्ट्र सुधार और व्यापार के मुद्दे उठेंगे।

  • ब्रिक्स में भारत के संभावित मुद्दे
  • तेल और ऊर्जा भुगतान
  • रुपया-रूबल व्यापार
  • रक्षा उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण
  • लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य सहयोग
  • परमाणु ऊर्जा और उर्वरक
  • परिवहन का विस्तार
Updated on:
10 Sept 2026 03:09 pm
Published on:
10 Sept 2026 03:09 pm