
शहरों में रहने वाले लोग अक्सर इलाज के लिए लंबी कतारों, ट्रैफिक और समय की कमी से जूझते हैं। अब सरकार ने डिजिटल और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करके इस परेशानी को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यदि आपके इलाके में नया आरोग्य मंदिर या डिजिटल सेवा शुरू हुई है तो उसका उपयोग करें। आसपास के लोगों को भी इसके बारे में बताएं। आइए जानते हैं सरकार की नई योजनाएं क्या हैं और यह कैसे काम करेंगी?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में 'एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफेस' लॉन्च किया। यह एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क है, जो विभिन्न स्वास्थ्य ऐप और प्लेटफॉर्म को जोड़ता है। इससे आप लैब टेस्ट, टीकाकरण केंद्र, फार्मेसी और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं तक एक ही नेटवर्क से पहुंच सकते हैं।
अन्य डिजिटल पहलें भी शुरू की गईं हैं। जिनमें आरोग्य सेतु 2.0, आयुष्मान सारथी चैटबॉट, आयुष्मान ऐप, ई-सुश्रुत क्लिनिक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय और स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं। इनसे स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता, पहुंच और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ने की उम्मीद है।
शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 13,736 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने का प्रावधान है। ये केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, जांच और परामर्श जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराएंगे। दिल्ली में हाल ही में 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर खोले गए, जिससे राजधानी में इन केंद्रों की संख्या 415 से अधिक हो गई है। दिल्ली सरकार का लक्ष्य ऐसे 1,100 केंद्र स्थापित करना है, ताकि लोगों को घर के पास ही मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
ये केंद्र सामान्य जांच, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वास्थ्य परामर्श और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं देते हैं। देशभर में 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं, जहां 12 तरह की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं और अब तक 540 करोड़ से अधिक लोगों ने इन सेवाओं का लाभ लिया है।
डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत अब तक 96.43 करोड़ आभा हेल्थ आईडी बनाई जा चुकी हैं और 110 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड आभा से जुड़े हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 5.46 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और 10.50 लाख से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हैं।
इसके अलावा, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म पर 11 अगस्त 2026 तक 49 करोड़ से अधिक परामर्श हो चुके हैं, और 2.4 लाख से अधिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता जुड़े हुए हैं। टेली-मानस सेवा, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए है, 20 भाषाओं में उपलब्ध है और अब तक 43.64 लाख कॉल प्राप्त हो चुकी हैं।
जन औषधि केंद्रों की संख्या फरवरी 2026 तक 18,646 से अधिक हो चुकी है। यहां दवाएं ब्रांडेड की तुलना में 50 से 80% तक सस्ती मिलती हैं। अमृत फार्मेसी के माध्यम से जीवन रक्षक दवाओं पर 50 से 90% तक छूट दी जाती है, जिससे अब तक 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं और लगभग 8,400 करोड़ रुपये की बचत हुई है।