
फास्टैग एनुअल पास ने लॉन्च के करीब 13 महीने बाद एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार, 28 सितंबर को इसकी जानकारी दी। यह पास पिछले साल 15 अगस्त 2025 को शुरू हुआ था। एनएचएआई ने भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए इसे डिजिटल टोलिंग की यात्रा का अहम पड़ाव बताया।
मंत्रालय के अनुसार यह पास देश के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर मान्य है, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शामिल हैं। एक बार 3,075 रुपए देने पर यह एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक, जो भी पहले पूरा हो, वैध रहता है। यानी प्रति क्रॉसिंग औसत खर्च करीब 15.4 रुपए बैठता है, बशर्ते सभी 200 क्रॉसिंग इस्तेमाल हों।
पास सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए है, जिन पर वैध फास्टैग लगा हो। इसका भुगतान राजमार्ग यात्रा ऐप या एनएचएआई की वेबसाइट से होता है और यह वाहन के मौजूदा फास्टैग पर ही सक्रिय हो जाता है। पास की एक्टिवेशन में अधिकतम दो घंटे लगते हैं और नया टैग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर फास्टैग सामान्य रूप से काम करता है और वहां लागू शुल्क देना होता है।
लॉन्च के समय पास की कीमत 3,000 रुपए थी। पीआईबी में जारी मंत्रालय के बयान के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए शुल्क बढ़ाकर 3,075 रुपए किया गया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है। यानी 75 रुपए की बढ़ोतरी हुई।
शुरुआत से ही पास को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लॉन्च के दो महीने के भीतर इसके यूजर्स 25 लाख के पार पहुंच गए और करीब 5.67 करोड़ लेन-देन दर्ज हुए। मार्च 2026 तक यह संख्या 56 लाख से ज्यादा हो चुकी थी और अब एक करोड़ हो गई है। अक्टूबर 2025 में एनएचएआई ने ऐप के जरिए पास दूसरों को गिफ्ट करने की सुविधा भी शुरू की थी। सरकार का कहना है कि बढ़ती स्वीकृति से साफ है कि योजना राजमार्गों पर निर्बाध और किफायती यात्रा को बढ़ावा देने में असरदार रही है।
इस बीच NHAI ने 17 सितंबर को राजमार्ग यात्रा ऐप पर 'वनटैग' की शुरुआत की। यह फास्टैग पोर्टेबिलिटी सेवा है, जो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी जैसी है। इसके जरिए उपयोगकर्ता वाहन पर लगे मौजूदा टैग को बदले बिना जारीकर्ता बैंक बदल सकते हैं। सेवा की शुरुआत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की थी।
उपयोगकर्ता ऐप में लॉग-इन कर वाहन का पंजीकरण नंबर डालकर पात्रता जांचता है। इसके बाद वर्तमान बैंक से 6 अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड (एमवीसी) आता है। अनुमति देने के बाद नया जारीकर्ता चुनना होता है और नए बैंक में केवाईसी व वॉलेट ऑनबोर्डिंग पूरी करनी होती है। पोर्टेबिलिटी पूरी होने पर पुराना बैंक अपना वॉलेट बंद कर देता है। NHAI के अनुसार इससे टैग के बार-बार उत्पादन और डिस्पैच की लागत भी घटेगी। अधिकारियों ने एमवीसी को गोपनीय रखने की अपील की है। इसे किसी कॉल करने वाले को न बताएं और केवल आधिकारिक ऐप में ही डालें।
मंत्रालय के मुताबिक देश में फास्टैग की पहुंच 98% से ज्यादा है और उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 13 करोड़ है। फास्टैग जनवरी 2021 से सभी टोल प्लाजा पर अनिवार्य है। एनएचएआई ने 2024-25 में टोल से 72,931 करोड़ रुपए वसूले थे। सरकार का कहना है कि एनुअल पास और वनटैग जैसी सुविधाएं डिजिटल टोलिंग को मजबूत करेंगी और यात्रियों को अधिक सुविधा, लचीलापन और बेहतर अनुभव देंगी।