
राजस्थान की रंगीन धरती पर फिल्मांकन का सफर हमेशा से ही आकर्षक रहा है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी जुड़ी रहती हैं। इस लेख में हम देखेंगे कि शूटिंग के लिए यह प्रदेश क्यों खास है? यहां किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है? यहां किस तरह नए अवसर फिल्मकारों के लिए खुल रहे हैं?
राजस्थान में महल, किले, रेगिस्तान, झीलें और हरे-भरे पहाड़ी इलाके, ये सब एक ही राज्य में उपलब्ध हैं, जिससे फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग सेटिंग्स के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं होती। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे शहरों में फिल्म क्रू, उपकरण और लॉजिस्टिक्स की सुविधा अच्छी है। जिससे शूटिंग का बजट और समय दोनों बचते हैं।
राजस्थान सरकार ने फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लागू की हैं। राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति–2025 के तहत फीचर फिल्म, वेब सीरीज, टीवी सीरीज और डॉक्यूमेंट्री पर 30% तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसकी अधिकतम सीमा ₹3 करोड़ निर्धारित की गई है। इसके अलावा, राजस्थान फिल्म टूरिज्म प्रमोशन पॉलिसी–2025 के अनुसार, यदि किसी फिल्म की शूटिंग राजस्थान में होती है, तो संबंधित विभागों जैसे- वन, सिंचाई, PWD, पुलिस, देवस्थान से लिए गए शुल्क की 100% वापसी की सुविधा मिलती है।
फिल्मकारों के लिए सरकार ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम के तहत पुलिस, ट्रैफिक, नगर निगम, जिला कलेक्टर और पर्यटन विभाग से अनुमति एक ही मंच पर मिल जाती है। राजस्थान पर्यटन विकास निगम की संपत्तियों पर शूटिंग के लिए शुल्क नहीं लिया जाता और आवास पर 50% तक की छूट मिलती है, जो ₹10 लाख तक सीमित है।
ऐतिहासिक और संरक्षित स्थलों पर शूटिंग के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या निजी ट्रस्ट से अनुमति लेनी होती है। इसमें क्रू की संख्या, उपकरण और समय सीमा पर कड़े नियम होते हैं। यदि अनुमति प्रक्रिया में देरी हो जाए, तो शूटिंग शेड्यूल बिगड़ सकता है। रेगिस्तान में शूटिंग के दौरान बिजली, पानी, वाहन और गर्मी से निपटना भी एक बड़ी चुनौती होती है। अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अनुकूल माना जाता है, क्योंकि गर्मी और मानसून के मौसम में काम करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, यदि उपकरण विदेश से लाए जा रहे हैं, तो कस्टम्स और कार्नेट (आयात-पत्र) की व्यवस्था पहले से करनी होती है। यदि यह समय पर नहीं होता, तो शूटिंग में देरी हो सकती है। स्थानीय क्रू की कमी या गलत एजेंट चुनने से भी समस्या बढ़ सकती है। एक अच्छा स्थानीय पार्टनर ही समय पर समाधान दे सकता है।
1983 में जेम्स बॉन्ड की फिल्म “Octopussy” ने उदयपुर के लेक पिचोला, सिटी पैलेस और मानसून पैलेस में शूटिंग की थी। जिसने राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय लोकेशन मानचित्र पर ला खड़ा किया। इसके बाद “The Best Exotic Marigold Hotel” (2011), “The Dark Knight Rises”, “The Darjeeling Limited” जैसी फिल्मों ने जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और जैसलमेर में शूटिंग की और राज्य की विविधता को दर्शाया। इन फिल्मों ने दिखाया कि एक ही राज्य में रेगिस्तान, महल, झील और पुरातन शहर, सब मिल सकते हैं। इससे बजट बचता है और शूटिंग की योजना आसान हो जाती है।
राजस्थानी भाषा की फिल्मों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। 2022 की नीति के तहत राजस्थानी फिल्मों को शूटिंग शुल्क में छूट और आर्थिक सहायता दी जाती है। लेकिन क्षेत्रीय सिनेमा अभी भी सीमित है। भाषा की संवैधानिक मान्यता न होना, बजट की कमी, प्रचार की कमी और कमजोर पटकथा जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार को लोकेशन मुफ्त में उपलब्ध कराने, अनुमति प्रक्रिया आसान बनाने और फिल्म निर्माण के लिए बेहतर माहौल बनाने की सलाह दी गई है।
यदि आप फिल्म या वेब सीरीज की शूटिंग राजस्थान में करना चाहते हैं, तो पहले राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति–2025 और सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम की जानकारी लें। अपनी शूटिंग की योजना अक्टूबर–मार्च के बीच रखें और स्थानीय क्रू व लॉजिस्टिक्स को पहले से सुनिश्चित करें। इससे आपका बजट और समय दोनों बचेंगे, और राजस्थान की खूबसूरती आपके कैमरे में जीवंत हो उठेगी। राजस्थान को एक फिल्मिंग हब बनाने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। सब्सिडी, आसान अनुमति, विविध लोकेशन और स्थानीय क्रू की उपलब्धता। इससे युवा फिल्मकारों को नए अवसर मिल सकते हैं। खासकर वे जो ओटीटी, वेब सीरीज या डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं।