
खाना या मिठाइयों को बार-बार गर्म करके खाने से आपकी सेहत खराब हो सकती है। खाने को ठंडा करने, स्टोर करने और दोबारा गर्म करने के तरीके का उसकी सुरक्षा पर काफी असर पड़ता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि खाना कैसे स्टोर किया गया है और उसे कितनी देर तक गर्म किया गया है? कुछ लोग तर्क देते हैं कि खाना गर्म करने से बैक्टीरिया मर जाते हैं तो सेहत को कैसे नुकसान हो सकता है? आइए जानते हैं, बार-बार खाना गर्म करके खाने के होने वाले नुकसान और एक्सपर्ट की राय।
डॉक्टर्स का कहना है कि खाने को बार-बार गर्म करने और मिठाइयों को गलत तरीके से रखने से फूडबॉर्न इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग का खतरा काफी बढ़ सकता है। जब पके हुए खाने को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाता है (खासकर गर्म और उमस भरे मौसम में) तो बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं।
खाने को दोबारा गर्म करने से वह हमेशा सुरक्षित नहीं हो जाता, क्योंकि कुछ बैक्टीरिया ऐसे टॉक्सिन पैदा करते हैं जो उच्च तापमान पर भी सक्रिय रह सकते हैं। हालांकि पहले से पके हुए खाने को दोबारा गर्म करना सुविधाजनक होता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि खाना पूरी तरह से अंदर तक गर्म हो जाए।
खाने को ठंडा करने, स्टोर करने और फिर से गर्म करने के चक्र से बचना चाहिए। खासकर तब, जब इन चरणों के बीच खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा रहा हो। ऐसा करने से बैक्टीरिया के पनपने और खाने के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।
यही सावधानियां पारंपरिक भारतीय मिठाइयों पर भी लागू होती हैं।
दूध से बनी मिठाइयां, जिनमें खोया, पनीर, क्रीम या अन्य डेयरी सामग्री होती है, बहुत जल्दी खराब हो सकती हैं। यदि इन्हें सही तापमान पर न रखा जाए या इन्हें संभालते समय इनमें कोई संदूषण हो जाए, तो इनमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। इस खतरे को कम करने के लिए ताजा बना खाना तुरंत खा लेना चाहिए, बचा हुआ खाना दो घंटे के अंदर फ्रिज में रख देना चाहिए और जल्दी खराब होने वाली मिठाइयों को भी फ्रिज में रखना चाहिए।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि खराब खाना हमेशा खराब होने के साफ निशान नहीं दिखाता है। खाने की महक, टेक्सचर या दिखने में कोई भी बदलाव एक चेतावनी का संकेत हो सकता है, लेकिन ऐसे बदलाव न होने का मतलब यह नहीं है कि खाना सुरक्षित है।
खाने को बार-बार पकाने से बचने के लिए उसे दोबारा गर्म करना एक सुविधाजनक तरीका तो है, लेकिन इसे गलत तरीके से रखने और बार-बार गर्म करने से फूडबॉर्न बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
बैक्टीरिया को पनपने से रोकने के लिए पके हुए खाने को दो घंटे के भीतर फ्रिज में रख देना चाहिए। खाना दोबारा गर्म करते समय यह पक्का करना जरूरी है कि वह अंदर तक अच्छी तरह गर्म हो जाए, ताकि हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाएं। खाने को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ देने या बिना सही तापमान का ध्यान रखे बार-बार गर्म करने से बैक्टीरिया पनप सकते हैं और फूडबॉर्न इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
खाद्य सुरक्षा के अलावा, बार-बार गर्म करने से भोजन की पोषण गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। गर्मी के प्रति संवेदनशील विटामिन, खासकर विटामिन B और विटामिन C, बार-बार गर्म करने से नष्ट हो सकते हैं। जिससे भोजन का पोषण मूल्य कम हो जाता है। इसी तरह, खाना पकाने वाले तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें रासायनिक बदलाव आ सकते हैं और हानिकारक तत्व बन सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
त्योहारों के दौरान, पारंपरिक भारतीय मिठाइयों को रखने और खाने-पीने के मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दूध और डेयरी उत्पादों से बनी मिठाइयां बहुत जल्दी खराब हो सकती हैं, खासकर गर्म मौसम में। इन्हें सही तापमान पर (फ्रिज में) रखना चाहिए और एक सुरक्षित समय-सीमा के भीतर ही खा लेना चाहिए। अगर मिठाइयों को सही तरीके से न रखा जाए, तो इनसे फूड-बॉर्न इन्फेक्शन हो सकते हैं, जिससे पेट में मरोड़, दस्त, जी मिचलाना और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अहमदाबाद के गुरुकुल (मेमनगर) स्थित स्टर्लिंग हॉस्पिटल्स में इंटरनल मेडिसिन और जेरियाट्रिक्स विभाग के निदेशक, डॉ। योगेश गुप्ता बताते हैं कि अगर खाने को शुरू से ही सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया है, तो उसे दोबारा गर्म करने से वह खाने लायक सुरक्षित नहीं हो जाएगा।
कुछ बैक्टीरिया (खासकर वे जो चावल और अन्य पके हुए खाने में पाए जाते हैं) ऐसे टॉक्सिन पैदा कर सकते हैं जो खाना उबालने या दोबारा गर्म करने के बाद भी सक्रिय रहते हैं। हर बार जब खाना ठंडा होता है और फिर दोबारा गर्म किया जाता है तो बचे हुए बैक्टीरिया को पनपने का एक और मौका मिल जाता है। खासकर तब, जब खाने को लंबे समय तक कमरे के तापमान (रूम टेम्परेचर) पर छोड़ दिया गया हो।
सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि केवल उतना ही खाना दोबारा गर्म किया जाए जिसे तुरंत खाना हो, और खाने को बार-बार गर्म करने से बचें। खाने को अच्छी तरह से गर्म किया जाना चाहिए, ताकि उसका अंदरूनी तापमान लगभग 74°C तक पहुंच जाए।
कलाकंद, पेड़ा, बर्फी, रसमलाई और क्रीम वाली मिठाइयां आमतौर पर दूध से बनी होती हैं। इनमें नमी की मात्रा अधिक होती है और ये पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो सूक्ष्मजीवों को पनपने में मदद करते हैं। इसलिए, अगर इन्हें सही तरीके से न रखा जाए, तो इनमें बैक्टीरिया पनपने का काफी खतरा रहता है।
त्योहारों, शादियों और अन्य समारोहों के दौरान, मिठाइयां अक्सर कई घंटों तक फ्रिज के बाहर रखी रहती हैं। कई लोगों के हाथों से गुजरती हैं या बड़ी मात्रा में पैक की जाती हैं। चूंकि इन मिठाइयों को आमतौर पर दोबारा गर्म किए बिना ही खा लिया जाता है, इसलिए इनमें मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव सीधे शरीर में जा सकते हैं और भोजन से होने वाली बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
खाने से होने वाले संक्रमण (फूडबॉर्न इन्फेक्शन) के सामान्य लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट में मरोड़, दस्त और कुछ मामलों में हल्का बुखार शामिल हैं। जिम्मेदार सूक्ष्मजीव या टॉक्सिन के आधार पर, लक्षण कुछ ही घंटों में दिख सकते हैं या सामने आने में अधिक समय ले सकते हैं। ज्यादातर हल्के मामलों में, पर्याप्त आराम करने और तरल पदार्थों का सेवन करने से एक से तीन दिनों में सुधार हो जाता है।