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फ्यूचर स्किल्स: 2027 में बच्चों के लिए कौन से स्किल होंगे जरूरी?

Future Skills: 2027 के भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बच्चों को AI साक्षरता, ग्रीन स्किल्स और भावनात्मक समझ से लैस करना जरूरी है। जानिए वे अहम कौशल जो नई पीढ़ी को करियर और जीवन के हर मोड़ पर सक्षम बनाएंगे।
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Aug 22, 2026
Future Skills for Children News.
भविष्य की तकनीकी और सामाजिक दुनिया में बच्चों को सशक्त बनाने वाले जरूरी लाइफ स्किल्स। (फोटो: AI)

बदलते समय में बच्चों की तैयारी सिर्फ स्कूल की किताबों तक सीमित नहीं रही। सन 2027 तक, तकनीकी बदलाव, जलवायु संकट और सामाजिक चुनौतियों के बीच, वे कौशल जो बच्चों को सुरक्षित, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाएंगे, वे अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

कॉग्निटिव और मेटाकॉग्निटिव स्किल्स

UNICEF, UNESCO और ILO की वैश्विक गाइडेंस के अनुसार, बच्चों को विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, समस्या-समाधान, निर्णय लेने, आत्म-प्रतिबिंब और सीखने की क्षमता जैसे कौशल सीखने चाहिए। ये कौशल उन्हें बदलते हालात में खुद को ढालने और नये रास्ते खोजने में मदद करेंगे।

तकनीकी दौर में बच्चों को सुरक्षित, सजग और सफल बनाने वाले सात अनिवार्य भविष्य कौशल। (फोटो: AI)

डिजिटल और AI साक्षरता

UNESCO ने 2026 में World Youth Skills Day पर जोर दिया कि डिजिटल और AI साक्षरता अब केवल तकनीकी कौशल नहीं, बल्कि रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और सहानुभूति जैसे मानव-केंद्रित कौशल के साथ जुड़ी होनी चाहिए। UNICEF Innocenti की ‘Skills for an AI World’ पहल बताती है कि बच्चों को AI के साथ सुरक्षित, जिम्मेदार और प्रभावी तरीके से काम करना सीखना चाहिए।

ग्रीन (पर्यावरण) कौशल

जलवायु परिवर्तन और सतत विकास की चुनौतियों के बीच, बच्चों को पर्यावरण जागरूकता, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा और जल की बचत जैसे ग्रीन कौशल सीखना जरूरी है। ये कौशल उन्हें भविष्य में स्थायी जीवनशैली अपनाने में मदद करेंगे।

सामाजिक और भावनात्मक कौशल

तकनीक जितनी भी आगे बढ़ जाए, मानवता से जुड़े कौशल जैसे संवाद, सहयोग, टीम वर्क, संघर्ष समाधान, बातचीत और भावनात्मक बुद्धिमत्ता की अहमियत कम नहीं होगी। ये वे कौशल हैं जो बच्चों को समाज में बेहतर तरीके से जुड़ने और नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

भारत की स्थिति: QS World University Rankings 2027

QS की रिपोर्ट में भारत को Future of Work के लिए तैयार होने में 96.0 अंक (दुनिया में 5वां स्थान) मिला है, लेकिन Skills Alignment में 82.7 अंक (18वां स्थान) है। यह दर्शाता है कि भारत में तकनीकी और आर्थिक क्षमता अच्छी है, लेकिन शिक्षा प्रणाली अभी भी उद्योग की मांग के अनुरूप पूरी तरह तैयार नहीं है।

भारत में 2025-26 में ₹34,000 करोड़ का बजट स्किलिंग पर खर्च हुआ, लेकिन स्कूलों में व्यावसायिक कौशल की पहुंच अभी भी सीमित है - केवल 12वीं तक के कुछ ही स्कूलों में यह उपलब्ध है।

व्यावसायिक शिक्षा का महत्व

भारत में व्यावसायिक शिक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत, व्यावसायिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करना और उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान करना है।

शिक्षकों का प्रशिक्षण : अहम पहलू

शिक्षकों का प्रशिक्षण भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। शिक्षकों को नए कौशल और तकनीकों में प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि वे छात्रों को प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन कर सकें। इसके लिए सरकार और निजी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

संक्षेप में, 2027 में बच्चों के लिए जरूरी कौशल इस प्रकार हैं:

  • विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और सीखने की क्षमता
  • डिजिटल और AI साक्षरता
  • पर्यावरण-सम्बंधित जागरूकता और ग्रीन कौशल
  • संवाद, सहयोग और भावनात्मक बुद्धिमत्ता

इन कौशलों को स्कूलों में शामिल करना, शिक्षकों को प्रशिक्षित करना और व्यावहारिक अनुभव देना—ये सब अगले कदम होने चाहिए।

यह तैयारी जीवन के हर मोड़ पर सक्षम बनाएगी

बहरहाल, बच्चों को केवल तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि सोचने, समझने, जुड़ने और जिम्मेदारी से काम करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। यह तैयारी उन्हें 2027 और उससे आगे के भविष्य में न केवल काम के लिए बल्कि जीवन के हर मोड़ पर सक्षम बनाएगी।

Updated on:
22 Aug 2026 01:24 pm
Published on:
22 Aug 2026 01:23 pm