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‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना भारत: G-20 शिखर सम्मेलन ने देश को दिलाई वैश्विक मंच पर मजबूती

भारत अब सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति का अहम केंद्र बन गया है। G-20 शिखर सम्मेलन ने देश की सुरक्षा और विकास के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोले हैं। आइए जानते हैं, G-20 शिखर सम्मेलन से भारत को क्या फायदा हुआ है?
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Aug 28, 2026
india on global stage
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और सुरक्षा पर प्रभाव को समझने के लिए जी-20 शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा है। यह सिर्फ एक आर्थिक मंच नहीं रहा, बल्कि भारत ने इसे वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति में अपनी सक्रिय भूमिका दिखाने का अवसर बनाया है।

वैश्विक दक्षिण की आवाज

भारत ने G-20 के माध्यम से वैश्विक दक्षिण (Global South) को एक मजबूत आवाज दी है। साल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी-20 समिट के दौरान भारत ने ‘Voice of the Global South’ सम्मेलन बुलाकर 125 देशों को एक साथ इकट्ठा किया। जिससे विकासशील देशों की चिंताओं, जैसे- जलवायु परिवर्तन, कर्ज संकट और स्वास्थ्य सुरक्षा को वैश्विक एजेंडा में शामिल किया गया। इसी दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 में स्थायी सदस्यता दिलाने का प्रस्ताव भी भारत ने जोरदार तरीके से उठाया।

सुरक्षा क्षेत्र में भारत की भूमिका

सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की भूमिका भी बढ़ी है। भारत ने 2008 से लगातार गल्फ ऑफ अडेन और हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए अभियान चलाए हैं। हाल ही में रेड सी और अरब सागर में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाई है। इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी लंबा योगदान दिया है। 1950 के दशक से अब तक 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें पहली महिला पुलिस इकाई भी शामिल थी।

मल्टीअलाइनमेंट की रणनीति

भारत की विदेश नीति में ‘मल्टीअलाइनमेंट’ (बहु-संतुलन) की रणनीति साफ दिखती है। वह किसी एक महाशक्ति के साथ पूरी तरह न जुड़ते हुए, अमेरिका, रूस, यूरोपीय देशों और चीन के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है। इससे न केवल उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता बनी रहती है, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था में एक लोकतांत्रिक बहुलता का भी संकेत देता है।

शांति और स्थिरता का संदेश

जी-20 मंच पर भारत ने युद्ध और संघर्ष के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश भी दिया। भारत ने घोषणा में मोदी के कथन 'आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए' को शामिल कराया, जिससे शांति और स्थिरता की दिशा में उसका रुख स्पष्ट हुआ।

भारत-चीन संबंध

भारत और चीन के बीच संबंधों में भी हालिया सुधार देखने को मिला है। साल 2020 से 2024 के तनावपूर्ण दौर के बाद, दोनों देशों ने फिर से संवाद शुरू किया है। इस बदलाव को लेकर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक संकेत मिलते हैं।

भारत के लिए अवसर

भारत की बढ़ती भूमिका से विदेश में करियर, पढ़ाई और व्यापार के अवसर बढ़ सकते हैं। भारत अब वैश्विक मंचों पर अधिक सक्रिय है, जिससे छात्रों और पेशेवरों के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग और सहयोग के रास्ते खुल रहे हैं। समुद्री सुरक्षा में भारत की भागीदारी से व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, जिससे भारत में निर्यात-आयात को स्थिरता मिलती है। यह सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था और रोजगार को लाभ पहुंचाता है।

मल्टीअलाइनमेंट का लाभ

मल्टीअलाइनमेंट नीति से भारत को वैश्विक निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता मिलती है। इससे भारत को अपनी राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेने में मदद मिलती है, चाहे वह रक्षा, ऊर्जा या तकनीकी सहयोग हो।

भविष्य की दिशा

भारत को चाहिए कि वह जी-20 और अन्य मंचों पर अपनी सुरक्षा पहल को और मजबूत करे, जैसे- साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और शांति निर्माण में। साथ ही, उसे वैश्विक दक्षिण की आवाज को और ऊंचा उठाना चाहिए। ताकि विकासशील देशों के मुद्दे विश्व स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाए जा सकें। भारत की यह यात्रा सिर्फ एक मंच पर नेतृत्व दिखाने की नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, कूटनीति और विकास में एक स्थायी, भरोसेमंद और संतुलित भूमिका निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Updated on:
28 Aug 2026 03:38 pm
Published on:
28 Aug 2026 03:38 pm