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अमेरिका ने दुनियाभर में वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स पर लगाई रोक, भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर में स्थित अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में इमिग्रेंट वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को अस्थायी रूप से टालने और पुनर्निर्धारित करने का फैसला लिया है। भारत पर इसका क्या असर होगा, आइए जानते हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 28, 2026

us suspends visa interview

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर में स्थित अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में इमिग्रेंट (स्थायी निवास/ग्रीन कार्ड श्रेणी) वीजा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स को अस्थायी रूप से टालने और पुनर्निर्धारित करने का फैसला लिया है। यह जानकारी 25-26 अगस्त 2026 को सामने आई, जब विभाग के एक प्रवक्ता ने ब्रिटिश अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स' को पुष्टि की कि कॉन्सुलर अधिकारियों के लिए एक वैश्विक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने के चलते वीजा सेवाओं का समय 'एडजस्ट' किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अगस्त की शुरुआत में ही आरंभ हो चुका था।

मीडिया रिपोर्ट में अलग-अलग दावे

कई मीडिया रिपोर्टों की पड़ताल से स्पष्ट होता है कि यह रोक खासतौर पर 'इमिग्रेंट वीजा' यानी स्थायी निवास की श्रेणी में आने वाले इंटरव्यू पर लागू है, न कि पर्यटक, छात्र या एच-1B जैसी सभी नॉन-इमिग्रेंट वीजा श्रेणियों पर एक साथ।

कुछ रिपोर्टों में इसे व्यापक रूप से 'सभी वीजा इंटरव्यू' पर रोक बताया गया, लेकिन रॉयटर्स, फाइनेंशियल टाइम्स और न्यूजवीक जैसे स्रोत इसे इमिग्रेंट वीजा तक सीमित बता रहे हैं। हालांकि एच-1B सहित अन्य कार्य-वीजा श्रेणियां भी अलग कारणों से पहले से ही भारी देरी झेल रही हैं, जिसका जिक्र आगे किया गया है।

रोक की क्या वजह है?

विदेश विभाग के अनुसार, कॉन्सुलर अधिकारियों को इस बात के आकलन के लिए नए सिरे से प्रशिक्षित किया जा रहा है कि कोई आवेदक भविष्य में अमेरिकी सरकार की सार्वजनिक सहायता योजनाओं पर निर्भर तो नहीं हो सकता। विभाग का कहना है कि इसका मकसद हर मामले का आकलन 'व्यापक और सुसंगत ढंग से' करना है। विभाग ने यह भी साफ किया है कि सामान्य अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग कब से फिर शुरू होगी। इसकी कोई तय समयसीमा फिलहाल नहीं बताई गई है। जिन आवेदकों के इंटरव्यू पहले से तय थे, उन्हें ईमेल के जरिए सूचित किया गया है कि उनकी अपॉइंटमेंट रद्द या पुनर्निर्धारित की जा रही है और नई तारीख बाद में बताई जाएगी।

अदालती फैसले से जुड़ी पृष्ठभूमि

अमेरिका द्वारा लगाई गई यह ताजा रोक 21 अगस्त 2026 के एक संघीय अदालत के फैसले के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। जिसमें एक अलग नीति को रद्द कर दिया गया था। ट्रंप प्रशासन ने 14 जनवरी 2026 को घोषणा की थी और 21 जनवरी 2026 से यह नियम लागू किया था कि 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीजा जारी करना निलंबित रहेगा। अदालत ने माना कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मामले में अपने कानूनी अधिकार-क्षेत्र को पार कर लिया था।

नई वैश्विक रोक अब किसी खास 75 देशों तक सीमित नहीं, बल्कि सभी देशों के इमिग्रेंट वीजा आवेदकों पर लागू होती है। हालांकि विभाग इसे 'देश-विशेष प्रतिबंध' नहीं बल्कि 'प्रशिक्षण उपाय' बता रहा है। गौरतलब है कि गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की एक नई 'पब्लिक चार्ज' नीति 18 सितंबर 2026 से अमेरिका के भीतर से किए जाने वाले ग्रीन कार्ड आवेदनों (एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस) पर भी लागू होने जा रही है। हालांकि विदेश विभाग ने अभी औपचारिक रूप से मौजूदा प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस नई नीति से नहीं जोड़ा है।

भारतीयों पर असर

भारत अमेरिकी वीजा के लिए दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्ततम बाजारों में गिना जाता है। अमेरिकी दूतावास की रिपोर्टों के अनुसार 2024 में भारत में स्थित अमेरिकी मिशन ने लगातार दूसरे साल 10 लाख से अधिक नॉन-इमिग्रेंट वीजा जारी किए, जो पर्यटन, कारोबार और पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने की भारतीयों की भारी मांग को दर्शाता है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता स्थित पांचों दूतावास/वाणिज्य दूतावास रोजाना हजारों आवेदनों को अलग-अलग वीजा श्रेणियों में संभालते हैं, और इनमें से एक हिस्सा इमिग्रेंट वीजा (जैसे परिवार व रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड) का भी है, जो सीधे इस ताजा रोक की जद में आता है।

H-1B वीजा को लेकर बड़ी चुनौती

भारतीय IT पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा से जुड़ी दिक्कतें इस ताजा इमिग्रेंट वीजा रोक से अलग हैं, मगर उतनी ही गंभीर हैं। दिसंबर 2025 से एच-1बी और एच-4 आवेदकों के लिए अनिवार्य 'ऑनलाइन प्रेजेंस' यानी सोशल मीडिया जांच लागू होने के बाद से भारत के पांचों दूतावासों में इंटरव्यू अपॉइंटमेंट भारी संख्या में पुनर्निर्धारित हो चुके हैं। जून 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक भारत के सभी पांच दूतावासों में दिसंबर 2026 तक के लिए एच-1बी इंटरव्यू स्लॉट खाली नहीं दिख रहे थे।

यानी नई अपॉइंटमेंट्स 2027 तक टल चुकी हैं। साथ ही, तीसरे देश (थर्ड-कंट्री नेशनल) से वीजा स्टैंपिंग की सुविधा भी सीमित कर दी गई है, जिससे भारतीय आवेदक कनाडा या मैक्सिको जैसे विकल्पों के जरिए बैकलॉग से बचने का रास्ता भी खो चुके हैं। इसके अलावा सितंबर 2025 में डीएचएस ने एच-1बी लॉटरी प्रणाली को वेतन-आधारित बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत ऊंचे वेतन वाले पदों को चयन में प्राथमिकता मिलेगी।

इसी दौर में ट्रंप प्रशासन ने नई एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर का शुल्क भी लागू किया, और अगस्त 2026 के अंत में एक और बड़ी फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी सामने आने की खबरें हैं। इन सभी नीतिगत बदलावों का सीधा असर भारतीय आईटी और टेक पेशेवरों पर पड़ता रहा है, क्योंकि एच-1बी वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक होती है।