
सपनों की कोई तय सीमा नहीं होती और न ही किसी व्यक्ति का मुकद्दर उसकी शुरुआती परिस्थितियों का मोहताज होता है। हिमाचल प्रदेश के एक सुदूर गांव की पथरीली पगडंडियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े रेसलिंग एरीना WWE में तिरंगा लहराने वाले दलीप सिंह राणा उर्फ ‘द ग्रेट खली’ की कहानी इसका सबसे सशक्त उदाहरण है। 27 अगस्त को जन्मे खली का जीवन संघर्ष, अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय सफलता और अब भारतीय राजनीति के अखाड़े में सक्रिय भागीदारी का एक ऐसा दिलचस्प संगम है, जो हर किसी को प्रेरित करता है।
खली का जन्म 27 अगस्त 1972 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के धिराइना गांव में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था। सात भाई-बहनों वाले परिवार में आर्थिक तंगी का आलम यह था कि खली को कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर परिवार का हाथ बंटाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी और पत्थर तोड़ने जैसे कठिन काम करने पड़े।
एक्रोमेगाली (Acromegaly) नामक स्थिति के कारण उनका कद असामान्य रूप से 7 फीट 1 इंच तक बढ़ गया। इस विशालकाय शरीर को जहां शुरुआत में समाज के कौतूहल का सामना करना पड़ा, वहीं यही कद-काठी आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। 1993 में पंजाब पुलिस के एक अधिकारी की नजर उन पर पड़ी और उन्हें पंजाब पुलिस में खेल कोटे के तहत नौकरी मिल गई। जालंधर के जिमों में पसीना बहाते हुए खली ने बॉडीबिल्डिंग और रेसलिंग की बारीकियों को सीखा, जिसने उनके वैश्विक सफर की मजबूत नींव रखी।
साल 2000 में अमेरिका जाकर पेशेवर रेसलिंग का प्रशिक्षण लेने के बाद खली ने वर्ष 2006 में वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (WWE) में पदार्पण किया। डेब्यू मैच में ही उस दौर के सबसे खूंखार रेसलर 'द अंडरटेकर' को रिंग में धूल चटाकर उन्होंने रातों-रात वैश्विक स्तर पर तहलका मचा दिया।
अक्सर देखा गया है कि जब कोई हस्ती खेल और मनोरंजन के शिखर पर पहुंच जाती है, तो समाज और जनसेवा के मंच उसे स्वाभाविक रूप से अपनी ओर खींचते हैं। खली के साथ भी ऐसा ही हुआ।
राजनीतिक परिदृश्य में उनका नाम पहली बार 2016 में चर्चा में आया, जब उन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व खिलाड़ी साजन सिंह चीमा के समर्थन में प्रचार किया। इसके बाद 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान खली ने खुलकर किसानों का समर्थन किया और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। टिकरी बॉर्डर पर जाकर किसानों के साथ खड़े होना यह दर्शाता था कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति के बावजूद उनकी जड़ें आज भी मिट्टी और किसानी से गहराई से जुड़ी हैं।
खली ने अब तक कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन संगठन और प्रचार में उनकी बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि पार्टी आने वाले समय में उन्हें किसी महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले में उतार सकती है।
| ताकत और जनसंपर्क | संभावित प्रभाव |
| जमीनी जुड़ाव | ग्रामीण और किसान पृष्ठभूमि से आने के कारण आम जनमानस से सीधा संवाद। |
| युवा आकर्षण | फिटनेस, खेल और अनुशासन के प्रतीक के रूप में युवाओं पर मजबूत प्रभाव। |
| अखिल भारतीय पहचान | उत्तर भारत (हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में निर्विवाद लोकप्रियता। |
द ग्रेट खली की यात्रा सिर्फ एक पहलवान के नेता बनने की कहानी नहीं है; यह इस बात का प्रमाण है कि लगन और स्पष्ट उद्देश्य से कोई भी व्यक्ति जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत कर सकता है।
हिमाचल के धिराइना गांव की तंग गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों पर तिरंगा लहराना और फिर देश सेवा के भाव से सार्वजनिक जीवन में उतरना एक असाधारण मिसाल है। रिंग में प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने वाले खली के सामने राजनीति की पिच पर जन समस्याओं के समाधान और विकास की नई चुनौतियां हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि रिंग का यह महाबली आने वाले वर्षों में भारतीय सियासत के अखाड़े में विकास और जनसेवा के कितने नए कीर्तिमान स्थापित करता है।