
शहरों में ‘ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट’ की जरूरत क्यों बढ़ रही है? यह समझना आज हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है। जब बारिश का पानी जमीन में समा जाए, पेड़ों और पौधों की जड़ों तक पहुंच जाए तो वह ‘ग्रीन वॉटर’ कहलाता है। यह सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि शहरों की ठंडक, बाढ़ से सुरक्षा और भूजल भंडार के लिए भी अहम है। आइए जानते हैं कि यह क्यों जरूरी है और हम इसे कैसे अपना सकते हैं?
बारिश का पानी, जो मिट्टी में समा जाता है और पौधों को पानी देता है। उसे 'ग्रीन वॉटर' कहा जाता है। यह मिट्टी की नमी के रूप में होता है, जो वाष्पीकरण और पौधों के माध्यम से वायुमंडल में लौटता है। यह प्रक्रिया बारिश को सीधे नदियों या नालों में बहने से रोकती है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करती है।
तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट और असंवेदनशील सतहें बारिश के पानी को जमीन में जाने नहीं देतीं हैं। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में लगभग 78% सतह कंक्रीट की हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में नहीं समा पाता और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसी तरह, ग्रीन वॉटर की कमी से गर्मी बढ़ती है, क्योंकि मिट्टी और पौधे ठंडक पैदा करते हैं। मिट्टी और पौधों के गायब होने से शहरों में गर्मी बढ़ जाती है। इसलिए आज के समय में ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट जरूरी हो गया है।
भारत सरकार ने ‘कैच द रेन’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत AMRUT 2.0 के माध्यम से शहरी निकायों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनरुद्धार पर काम शुरू किया है। इसमें जलाशयों और हरे क्षेत्रों के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह ग्रीन वॉटर को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
शहरों में पानी और हरियाली को एक साथ जोड़ने वाला BGI मॉडल कारगर साबित हो रहा है। थिरुवनंतपुरम में इसका अध्ययन किया गया। कई शहरों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु, भोपाल, मदुरै ने इसे अपनी मास्टर योजनाओं में शामिल किया है। यह मॉडल बाढ़, गर्मी और जल संकट से निपटने में मददगार है।
शहरों में तालाब, झीलें और छोटे जलाशय पारंपरिक रूप से जल आपूर्ति, भूजल पुनर्भरण और जल निकासी में मदद करते थे। लेकिन अब कई शहरों में ये गंदगी, कूड़ा और अतिक्रमण के कारण खतरे में हैं। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में 1970 के दशक में 250 से अधिक झीलें थीं, लेकिन अब लगभग 80 ही बची हैं, और उनमें से कई दूषित हैं। इन जल निकायों को साफ करना और पुनर्जीवित करना ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है।