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रक्षा बंधन का त्योहार: बहना का प्यार, रंगबिरंगी राखियां, भाइयों के रिटर्न गिफ्ट और राजस्थानी स्वाद से सजी थाली

Rakhi Special:रक्षा बंधन पर राजस्थान के बाजारों में रंगबिरंगी राजस्थानी राखियों से लेकर मॉडर्न रिटर्न गिफ्ट तक कई विकल्प मौजूद हैं। घर और बाजार की राजस्थानी थाली में दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे, केर-सांगरी और घेवर त्योहार का स्वाद बढ़ाते हैं।
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भारत

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MI Zahir

Aug 20, 2026

Raksha Bandhan Festival News

रंगबिरंगी राजस्थानी राखियों, रिटर्न गिफ्ट और पारंपरिक थाली से सजे रक्षा बंधन का खास अंदाज़। (फोटो: AI)

रक्षा बंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने और उपहार देने का पर्व नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा, हस्तशिल्प और खान-पान को साथ जोड़ने वाला त्योहार भी है। वर्ष 2026 में रक्षा बंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार देश देश भर के बाजारों में रक्षा बंधन की रौनक है,वहीं राजस्थान के बाजारों में जहां रंगबिरंगी और पारंपरिक राखियों की रौनक दिखाई दे रही है, वहीं घरों की रसोई में राजस्थानी पकवानों की खुशबू भी त्योहार का माहौल बना रही है। भाइयों और बहनों दोनों को इसका बेसब्री से इंतजार है।

केवल पूजा और मिठाई तक सीमित नहीं त्योहार

रक्षा बंधन के मौके पर राजस्थान की खासियत यह है कि यहां त्योहार केवल पूजा और मिठाई तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय रंग, कारीगरी, पारंपरिक पोशाक और देसी भोजन मिलकर इसे एक अलग सांस्कृतिक पहचान देते हैं। बाजार में पारंपरिक धागे और गोटा-पट्टी वाली राखियों के साथ आधुनिक डिजाइन भी पसंद किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, कई परिवार घर में दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, कढ़ी और घेवर जैसी चीजें बनाकर त्योहार को राजस्थानी रंग देते हैं।

रक्षा बंधन का रंग बाजार और खान-पान दोनों में नजर आ रहा

राजस्थान में रक्षा बंधन का रंग बाजार और खान-पान दोनों में नजर आ रहा है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और अजमेर जैसे संभागों में त्योहार से पहले राखी और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारी बढ़ने लगती है। राष्ट्रीय स्तर पर भी 2026 में राखी कारोबार के करीब ₹30,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले साल यह करीब ₹25,000 करोड़ बताया गया था।

राजस्थानी दस्तकारी की राखियां बनीं खास आकर्षण

राजस्थान की पहचान उसके हस्तशिल्प से है। इसी वजह से यहां की राखियों में भी स्थानीय कला की झलक दिखाई देती है। गोटा-पट्टी, रंगीन धागे, मोती, कुंदननुमा सजावट, लटकन, मिरर वर्क और कपड़े की छोटी कलात्मक आकृतियों वाली राखियां पारंपरिक पसंद को बनाए हुए हैं।

गोटा-पट्टी का काम : सदियों पुरानी सजावटी परंपरा

राजस्थान में गोटा-पट्टी का काम सदियों पुरानी सजावटी परंपरा से जुड़ा है। राजस्थान सरकार के हस्तशिल्प पोर्टल के अनुसार गोटा-पट्टी में कपड़े पर छोटी-छोटी सुनहरी या सजावटी पट्टियों को एप्लीक तकनीक से लगाया जाता है और इसका इस्तेमाल पारंपरिक परिधानों के साथ त्योहारों के लिए भी होता रहा है।

पारंपरिक रंगबिरंगी राखियां: डिजाइन और अनुमानित रेट

राखी का प्रकारखासियतबाजार में सामान्य अनुमानित रेंज
गोटा-पट्टी राखीगोटा, धागा, लटकन₹30–₹100
मोती वाली राखीरंगीन मोती और धागा₹40–₹150
लटकन राखीराजस्थानी सजावटी लटकन₹50–₹180
मिरर वर्क राखीछोटे शीशे और कपड़ा₹60–₹200
कुंदन/स्टोन राखीचमकदार स्टोन और सजावट₹100–₹300
हस्तनिर्मित प्रीमियम राखीविशेष डिजाइन व पैकिंग₹200–₹500+

(नोट: ये कीमतें बाजार में मिलने वाले डिजाइन और सामग्री के आधार पर संकेतात्मक हैं। शहर, कारीगर, दुकान और पैकिंग के अनुसार कीमत बदल सकती है।)

मॉडर्न राखियों में भी राजस्थानी टच

पारंपरिक राखियों के साथ इस बार आधुनिक डिजाइन भी बाजार में जगह बना रहे हैं। ब्रेसलेट स्टाइल राखी, पर्सनलाइज्ड नाम वाली राखी, फोटो राखी, बच्चों के कार्टून डिजाइन, ब्रोच राखी और स्टोन-ब्रेसलेट राखी जैसी वैरायटी युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। जयपुर के एक 2026 राखी कलेक्शन में ब्रोच-पिन राखी, जेमस्टोन ब्रेसलेट राखी और अन्य हैंडमेड विकल्प ₹350 के आसपास से दिख रहे हैं।

हॉलमार्क सिल्वर की हस्तनिर्मित राखियां

चांदी की राखी भी प्रीमियम विकल्प बन रही है। जयपुर स्थित एक ज्वेलरी ब्रांड के 2026 कलेक्शन में 92.5 हॉलमार्क सिल्वर की हस्तनिर्मित राखियों की कीमत करीब ₹2,295 से ₹3,366 के बीच बताई गई है।

यानी राखी बाजार में एक ओर ₹30-50 की साधारण लेकिन खूबसूरत राखी मिल सकती है, तो दूसरी ओर डिजाइन, धातु और कारीगरी के आधार पर इसकी कीमत हजारों रुपये तक जा सकती है।

रक्षा बंधन पर घर में सजेगी राजस्थानी थाली

राखी के दिन परिवार के एक साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा को राजस्थानी स्वाद और भी खास बना देता है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार दाल-बाटी-चूरमा राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध और संपूर्ण भोजन में शामिल है। इसके साथ लहसुन की चटनी और लाल मिर्च का स्वाद इसे और खास बनाता है।

घर पर क्या-क्या बन सकता है?

रक्षा बंधन की राजस्थानी थाली में परिवार अपनी पसंद और समय के अनुसार ये व्यंजन शामिल कर सकता है—

दाल-बाटी-चूरमा
पंचमेल दाल
गट्टे की सब्जी
केर-सांगरी
कढ़ी
मिर्ची टिपोरे
लहसुन की चटनी
पापड़ और अचार
बाजरे या गेहूं की रोटी
मसाला छाछ
घेवर
मालपुआ या मावा कचौरी

केर-सांगरी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र की खास पहचान है। केर और सांगरी से तैयार यह सब्जी मसालों के साथ बनाई जाती है और राजस्थान पर्यटन इसे राज्य के प्रामाणिक पारंपरिक व्यंजनों में गिनता है।

मिठाई में घेवर क्यों खास?

रक्षा बंधन के मौके पर घेवर का नाम अपने आप सामने आता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार घेवर की जड़ें जयपुर से जुड़ी हैं और यह मिठाई तीज तथा रक्षा बंधन जैसे त्योहारों से पारंपरिक रूप से जुड़ी रही है। आज बाजार में प्लेन, मावा और मलाई घेवर जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं।

घर पर बनाएं या बाजार से मंगाएं राजस्थानी थाली?

अगर परिवार बड़ा है और सभी लोग मिलकर खाना चाहते हैं तो घर पर राजस्थानी थाली तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। दाल, बाटी, चूरमा, गट्टे और चटनी जैसे व्यंजन मिलकर पारंपरिक स्वाद दे सकते हैं।

समय की कमी हो तो जयपुर में कई रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म राजस्थानी थाली उपलब्ध करा रहे हैं। मौजूदा ऑनलाइन मेन्यू के अनुसार कीमतों में काफी अंतर है।

राजस्थानी थालीउपलब्ध उदाहरणकीमत
साधारण दाल-बाटी4 बाटी + दालकरीब ₹149–₹200
दाल-बाटी-चूरमाबाटी, दाल, चूरमा, चटनीकरीब ₹159–₹300
स्पेशल राजस्थानी थालीबाटी, दाल, कढ़ी, चूरमा आदिकरीब ₹299
विस्तृत राजस्थानी थालीकई सब्जियां, दाल, कढ़ी, चूरमा आदिकरीब ₹450–₹500
प्रीमियम पारंपरिक थालीकरीब 16 आइटम का भोजन₹600 + GST

राजस्थान के कई शहरों के ऑनलाइन मेन्यू में दाल-बाटी-चूरमा थाली ₹159 से ₹450 तक के अलग-अलग विकल्पों में दिखाई दे रही है, जबकि एक अन्य रेस्टोरेंट में पारंपरिक 16-आइटम राजस्थानी थाली ₹600 प्लस GST में उपलब्ध है। बाजार के अनुसार भाव अनुमानित है, इसमें कम ज्यादा का बदलाव भी हो सकता है। इससे साफ है कि परिवार अपनी जेब और पसंद के हिसाब से साधारण थाली से लेकर शाही राजस्थानी भोजन तक चुन सकता है।

भाइयों की ओर से रिटर्न गिफ्ट में कई आइटम

रक्षा बंधन पर बहन की कलाई में राखी बांधने के बाद भाई की ओर से उपहार देने की परंपरा भी तेजी से बदल रही है। इस बार सामान्य गिफ्ट के बजाय राजस्थानी हस्तशिल्प और परिधानों को रिटर्न गिफ्ट बनाया जा सकता है।

बहन के लिए बंधेज या लहरिया दुपट्टा, राजस्थानी प्रिंट की कुर्ती, गोटा-पट्टी वाला सूट, पारंपरिक राजस्थानी पोशाक, मोजड़ी या हस्तनिर्मित बैग अच्छे विकल्प हो सकते हैं। गोटा-पट्टी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से घाघरा, दुपट्टा, साड़ी और अन्य परिधानों को सजाने में किया जाता रहा है।

अगर बजट सीमित है तो बंधेज दुपट्टा या छोटा हस्तशिल्प उपहार दिया जा सकता है। मध्यम बजट में सूट या कुर्ती और बड़े बजट में पूरा राजस्थानी ड्रेस सेट, आभूषण या हस्तनिर्मित प्रीमियम गिफ्ट चुना जा सकता है।

रक्षा बंधन स्पेशल: राजस्थानी रिटर्न गिफ्ट और बाजार भाव

रिटर्न गिफ्टबाजार में विकल्पअनुमानित कीमत
बंधेज दुपट्टारंगीन बंधेज/लहरिया डिजाइन₹250–₹700
राजस्थानी कुर्तीबंधेज, ब्लॉक प्रिंट, गोटा-पट्टी₹500–₹1,200
राजस्थानी ड्रेस सेटकुर्ती-दुपट्टा/सूट सेट₹800–₹2,000
राजस्थानी मोजड़ीहैंडक्राफ्टेड डिजाइन₹400–₹1,000
गोटा-पट्टी बैगपारंपरिक हैंडवर्क₹300–₹900
पोटली बैगबंधेज, मिरर वर्क, गोटा-पट्टी₹200–₹600
ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरीझुमके, नेकलेस, सेट₹250–₹1,000
पर्सनलाइज्ड फोटो फ्रेमभाई-बहन की तस्वीर के साथ₹250–₹700
कस्टमाइज्ड मग/कुशनफोटो या नाम प्रिंट₹200–₹500
परफ्यूम/बॉडी केयर गिफ्ट सेटमॉडर्न पैकिंग में₹400–₹1,200
चॉकलेट गिफ्ट बॉक्सप्रीमियम/कस्टम पैकिंग₹300–₹1,000
सिल्वर राखी/पेंडेंट925 सिल्वर डिजाइन₹1,500–₹3,500+

(नोट: कीमतें राजस्थान के बाजारों और ऑनलाइन उपलब्ध सामान्य विकल्पों के आधार पर अनुमानित हैं। शहर, ब्रांड, कारीगरी, सामग्री और डिजाइन के अनुसार रेट कम-ज्यादा हो सकते हैं।)

राखी में इस बार राजस्थान का रंग

रक्षा बंधन 2026 में बाजार की चमक भले ही आधुनिक डिजाइन, पर्सनलाइज्ड राखियों और ऑनलाइन गिफ्टिंग से बढ़ी हो, लेकिन राजस्थान की पारंपरिक पहचान अब भी मजबूत है। हाथ से बनी राखी, गोटा-पट्टी की सजावट, बंधेज का रंग, दाल-बाटी-चूरमा की खुशबू और घेवर की मिठास मिलकर त्योहार को सिर्फ एक रस्म नहीं रहने देते।

कलाई पर बंधी राखी से बाजार की कारीगरी तक कई रंग

यही राजस्थान की खूबसूरती है-यहां त्योहार कलाई पर बंधी राखी से शुरू होकर बाजार की कारीगरी, घर की रसोई और उपहार में दिए गए परिधान तक पहुंचता है। भाई-बहन के रिश्ते के साथ जब स्थानीय कला और भोजन जुड़ते हैं, तो रक्षा बंधन की खुशी में राजस्थानी रंग और भी गहरा हो जाता है।