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क्या बारिश का पानी आपके शहर को गर्मी और बाढ़ से बचा सकता है? जानिए क्या है ‘ग्रीन वॉटर’ सिस्टम

क्या आप जानते हैं कि बारिश का पानी आपके शहर को गर्मी और बाढ़ से बचाने में मदद कर सकता है? आइए जानते हैं क्या है ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और यह कैसे काम करता है?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 20, 2026

Green Water Management

सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)

शहरों में ‘ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट’ की जरूरत क्यों बढ़ रही है? यह समझना आज हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है। जब बारिश का पानी जमीन में समा जाए, पेड़ों और पौधों की जड़ों तक पहुंच जाए तो वह ‘ग्रीन वॉटर’ कहलाता है। यह सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि शहरों की ठंडक, बाढ़ से सुरक्षा और भूजल भंडार के लिए भी अहम है। आइए जानते हैं कि यह क्यों जरूरी है और हम इसे कैसे अपना सकते हैं?

क्या है ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट?

बारिश का पानी, जो मिट्टी में समा जाता है और पौधों को पानी देता है। उसे 'ग्रीन वॉटर' कहा जाता है। यह मिट्टी की नमी के रूप में होता है, जो वाष्पीकरण और पौधों के माध्यम से वायुमंडल में लौटता है। यह प्रक्रिया बारिश को सीधे नदियों या नालों में बहने से रोकती है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करती है।

शहरों में ग्रीन वॉटर क्यों जरूरी?

तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट और असंवेदनशील सतहें बारिश के पानी को जमीन में जाने नहीं देतीं हैं। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में लगभग 78% सतह कंक्रीट की हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में नहीं समा पाता और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। इसी तरह, ग्रीन वॉटर की कमी से गर्मी बढ़ती है, क्योंकि मिट्टी और पौधे ठंडक पैदा करते हैं। मिट्टी और पौधों के गायब होने से शहरों में गर्मी बढ़ जाती है। इसलिए आज के समय में ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट जरूरी हो गया है।

शहरों में ग्रीन वॉटर के फायदे

  • भूजल का पुनर्भरण (Groundwater recharge) होता है, जिससे पेयजल संकट कम होता है।
  • बारिश का पानी सीधे नदियों में नहीं जाता, जिससे बाढ़ की आशंका घटती है।
  • मिट्टी और पौधे ठंडक बनाए रखते हैं, जिससे गर्मी कम होती है।
  • यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखता है और शहरों को अधिक टिकाऊ बनाता है।

नीति और योजनाओं में ग्रीन वॉटर का स्थान

भारत सरकार ने ‘कैच द रेन’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत AMRUT 2.0 के माध्यम से शहरी निकायों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनरुद्धार पर काम शुरू किया है। इसमें जलाशयों और हरे क्षेत्रों के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह ग्रीन वॉटर को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

BGI (ब्लू–ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर) का महत्व

शहरों में पानी और हरियाली को एक साथ जोड़ने वाला BGI मॉडल कारगर साबित हो रहा है। थिरुवनंतपुरम में इसका अध्ययन किया गया। कई शहरों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु, भोपाल, मदुरै ने इसे अपनी मास्टर योजनाओं में शामिल किया है। यह मॉडल बाढ़, गर्मी और जल संकट से निपटने में मददगार है।

शहरी जल निकायों का संरक्षण और पुनरुद्धार

शहरों में तालाब, झीलें और छोटे जलाशय पारंपरिक रूप से जल आपूर्ति, भूजल पुनर्भरण और जल निकासी में मदद करते थे। लेकिन अब कई शहरों में ये गंदगी, कूड़ा और अतिक्रमण के कारण खतरे में हैं। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में 1970 के दशक में 250 से अधिक झीलें थीं, लेकिन अब लगभग 80 ही बची हैं, और उनमें से कई दूषित हैं। इन जल निकायों को साफ करना और पुनर्जीवित करना ग्रीन वॉटर मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है।

शहरों में ग्रीन वॉटर बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय

  1. वर्षा जल संचयन: घरों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में टैंक और रिचार्ज पिट बनाकर बारिश का पानी जमीन में भेजा जा सकता है।
  2. पर्मिएबल सतहें: पार्किंग, फुटपाथ और खुले क्षेत्र ऐसे बनाएं कि पानी जमीन में समा सके।
  3. हरित क्षेत्र बढ़ाना: पेड़, पार्क और बायोस्वेल (जैसे हरित नालियां) शहरों को ठंडा रखते हैं और पानी को सोखते हैं।
  4. जल निकायों की सफाई और संरक्षण: झीलों और तालाबों से कूड़ा हटाना, अतिक्रमण रोकना और आसपास हरियाली बढ़ाना।
  5. सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय लोग, स्कूल, किसान और नागरिक समूह मिलकर जल संरक्षण अभियान चला सकते हैं।