
सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)
खेती में आधुनिक उपकरणों का उपयोग अब केवल बड़े खेतों तक सीमित नहीं रह गया है। यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी सुलभ और लाभकारी हो गया है। फसल की देखभाल में समय, श्रम और लागत की बचत के साथ-साथ उत्पादन में सुधार की दिशा में ये उपकरण महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं।
आज के समय में खेती में श्रम की कमी, बढ़ती लागत और समय की पाबंदी जैसी चुनौतियां आम हैं। इनसे निपटने में आधुनिक उपकरण, जैसे- पावर टिलर, पावर वीडर, स्प्रेयर, जल पंप आदि काफी मददगार सिद्ध हो रहे हैं। ये उपकरण खेत की तैयारी, निराई-गुड़ाई, कीटनाशक छिड़काव और सिंचाई को तेज, सटीक और कम मेहनत वाला बनाते हैं।
सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक मशीनों की पहुंच बढ़ाने के लिए ‘Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM)’ जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इस योजना के तहत अब तक 21.61 लाख मशीनें वितरित की जा चुकी हैं, और ड्रोन के माध्यम से 40,918 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती में सटीकता लाने के लिए प्रदर्शन किए गए हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन में आधुनिक उपकरणों की भूमिका अहम है। फसल कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों को खेत में ही प्रबंधित करने के लिए ‘Happy Seeder’, ‘Super Seeder’, ‘Zero Till Seed cum Fertilizer Drill’ जैसे उपकरण उपयोगी हैं। सरकार इन उपकरणों पर सब्सिडी भी देती है। इन उपकरणों पर किसानों को 50% तक और कस्टम हायरिंग केंद्रों को 80% तक की छूट मिलती है।
GPS, ड्रोन, सेंसर और स्मार्ट ऐप्स जैसे डिजिटल उपकरण खेती को और अधिक सटीक बना रहे हैं। GPS से खेत की स्थिति जानना, ड्रोन से फसल स्वास्थ्य की निगरानी करना, और सेंसर से मिट्टी की नमी व तापमान का पता लगाना संभव हो गया है। इससे फसल की देखभाल समय पर और सही तरीके से हो पाती है।
ICAR-CIAE, भोपाल ने SPAD मीटर (पत्तियों में क्लोरोफिल की मात्रा मापने वाला उपकरण), Pre-Emergence Herbicide Strip-Applicator-cum-Planter, और इंटर-रो वीडर जैसे कई आधुनिक उपकरण विकसित किए हैं, जो फसल की सेहत और निराई-गुड़ाई में सहायक हैं।
ड्रोन अब केवल सर्वेक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव के लिए भी उपयोग में लिए जा रहे हैं। इससे समय की बचत होती है और लागत भी कम होती है।
उपकरण चुनते समय खेत का आकार, फसल का प्रकार, मिट्टी की स्थिति, उपयोग की आवृत्ति और सर्विस सपोर्ट जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। साथ ही, उपकरणों का सही रखरखाव उनकी आयु बढ़ाता है और खराबी से बचाता है।
डिजिटल कृषि (Smart Farming) में AI ऐप्स, स्मार्ट सिंचाई और डेटा आधारित निर्णय शामिल हैं। ये तकनीकें खेती को सस्ता, तेज और सटीक बनाती हैं।
किसानों को अपने खेत की जरूरतों को समझना चाहिए। जैसे- जमीन की स्थिति, फसल का प्रकार, सिंचाई की सुविधा। इसके बाद नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से संपर्क करें। वे आपको सही उपकरण चुनने, सब्सिडी आवेदन और प्रशिक्षण में मदद कर सकते हैं। फसल रखरखाव में आधुनिक उपकरणों का उपयोग केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि खेती की दिशा बदलने वाला कदम है। यह समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन में सुधार का मार्ग प्रशस्त करता है।
Updated on:
20 Aug 2026 08:26 pm
Published on:
20 Aug 2026 08:26 pm
